Champawat
चंपावत: मां गौरा देवी की कैलाश विदाई के साथ गौरा महोत्सव का समापन, हजारों लोगों ने नम आंखों से मां को किया विदा।

चंपावत – चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक के नेपाल सीमा से लगे जिंडी ,सुनकुरी , सुल्ला, पाशम , निडील , बिबिल आदि गांवो में आज आठ दिवसीय गौरा महोत्सव का समापन हो गया है। समापन के अवसर पर क्षेत्र के हजारों लोगों ने मां गोरा को नम आंखों से उनके ससुराल कैलाश की ओर विदा किया।

क्षेत्र के प्रसिद्ध पंडित मदन कॉलोनी ने बताया मान्यता के अनुसार मां गौरा के अपने मायके आने की खुशी में सीमांत क्षेत्रों में बड़े धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ गौरा महोत्सव मनाया जाता है। जिसमे में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में प्रवासी लोग भी अपने गांव पहुंचते हैं। पंडित कलोनी ने बताया गौरा महोत्सव में सीमांत क्षेत्र के गांवो में पुरुषों के द्वारा महाभारत कालीन गाथाओं का गायन किया जाता है…तो वहीं महिलाओं के द्वारा मां गौरा महेश्वर की प्रतिमाओं के सामने गोरा गायन किया जाता है।
उन्होंने कहा आज मां गोरा को उनके ससुराल कैलाश क्षेत्र की ओर हजारों लोगों ने विदा किया। विदाई के अवसर पर ग्रामीणों के द्वारा मां गोरा को भेंट भी दी जाती है। उन्होंने बताया अब ग्रामीण अगले वर्ष मां गौरा के अपने मायके आने का इंतजार करेंगे।
इस अवसर पर सीमांत क्षेत्र के सुनकुरी व चमदेवल में विशाल मेले का आयोजन किया। गया जिसमें क्षेत्र के हजारों लोग शामिल हुए।
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चंपावत में छुट्टी पर आए जवान का निधन, परिजनों में कोहराम, आज शारदा घाट होगा अंतिम संस्कार

Champawat News : चंपावत में छुट्टी पर घर आए हवलदार का निधन हो गया। हवलदार के आकस्मिक निधन से परिजनों में कोहराम मच गया। जवान का अंतिम संस्कार आज बनबसा के शारदा घाट पर किया जाएगा।
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चंपावत में छुट्टी पर आए जवान का निधन
चंपावत जिले के बनबसा में छुट्टी पर घर आए हवलदार हरीश चंद का निधन होने से पूरे इलाके में मातम पसर गया है। मिली जानकारी के मुताबिक छुट्टी पर घर आए हवलदार हरीश चंद का अचानक तबीयत खराब हो गई। जिस से उनका निधन हो गया। जवान के आकस्मिक निधन से परिजनों में कोहराम मच गया है।
आज बनबसा के शारदा घाट में होगा अंतिम संस्कार
हवलदार हरीश चंद का अंतिम संस्कार आज सैन्य सम्मान के साथ बनबसा शारदा घाट में किया जाएगा। बता दें किबनबसा के सीमांत गांव गड़ीगोठ निवासी हरीश चंद पुत्र भरत चंद (उम्र 35 वर्ष) भारतीय सेना में हवलदार के पद पर तैनात थे। जो कि पिथौरागढ़ स्थित 12 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात थे।

बीते कुछ दिनों पहले ही वो छुट्टी लेकर अपने भाई की शादी के लिए घर आए थे। 9 फरवरी को तड़के 3 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी की जा रही थी। लेकिन इस पहले ही उनकी मौत हो गई। उनकी मौत से पूरे गांव में मातम पसर गया है।
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Champawat: पड़ोसी ने बुजुर्ग की दरांती से हमला कर की हत्या, इलाके में दहशत का माहौल

सनिया गाँव में बुजुर्ग की बेरहम हत्या, आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
मुख्य बिंदु
चंपावत (Champawat): उत्तराखंड के चंपावत जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. जहाँ मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर एक गाँव में एक बुजुर्ग की दरांती से हत्या कर दी गई है. घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है.
CHAMPAWAT में बुजुर्ग की दरांती से हत्या
जानकारी के मुताबिक, चंपावत जिले के सनिया गांव में एक बुजुर्ग पर धारदार हथियार से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई. आरोपी की पहचान मृतक के पड़ोसी सुभाष खर्कवाल के रूप में हुई है. आरोपी मानसिक रूप से बीमार बताया जा रहा है.
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आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने हत्यारोपी को गिरफ्तार कर लिया है. पूरी घटना की खबर से क्षेत्र में दहशत का माहौल है. मृतक की पहचान 80 साल के अंबादत्त खर्कवाल पुत्र स्वर्गीय भैरव दत्त खर्कवाल निवासी के रूप में हुई है. जिनकी शनिवार को अपने ही घर में दरांती से वार कर हत्या कर दी गई है.
आरोपी मानसिक रूप से है बीमार
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने की कार्रवाई की. आरोपी सुभाष खर्कवाल को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसे मानसिक रूप से बीमार बताया जा रहा है. लेकिन, हत्या के पीछे की असल वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है.
कोतवाली प्रभारी बीएस बिष्ट ने बताया कि
शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल चंपावत भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है. दूसरी ओर, इस घटना से गांव के लोग दहशत में हैं और उन्होंने पुलिस से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है.
Champawat
लोहाघाट में देवदार के जंगलों पर मंडरा रहा खतरा, प्रशासन ने अपनाया सख्त रुख, जानिए विस्तार से…
Champawat News: लोहाघाट के देवदारों पर संकट, प्रशासन और वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया
मुख्य बिंदु
Champawat News: चंपावत जिले के लोहाघाट क्षेत्र, जो अपनी घनी देवदार (Deodar cedar) की पहाड़ियों और हरे-भरे जंगलों के लिए जाना जाता है। आज गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है। बीते कुछ वर्षों में नगर में लगातार बढ़ते कंक्रीट के जंगल, अतिक्रमण और अवैध कटान ने इन दुर्लभ वृक्षों को संकट में डाल दिया है। हाल ही में नगर क्षेत्र में देवदार के सूखते पेड़ों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन और वन विभाग सक्रिय हो गया है।
जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देश पर लोहाघाट वन विभाग ने जहां देवदार (Deodar cedar) के सूखते पेड़ों का उपचार शुरू किया है। साथ ही अज्ञात लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
Champawat Deodar Cedar Trees देवदारों की स्थिति गंभीर
लोहाघाट (Lohaghat) नगर पालिका क्षेत्र में देवदारों की दुर्लभ और ऐतिहासिक प्रजाति पर संकट लगातार बढ़ रहा है। नगर क्षेत्र में रसायन डालकर पेड़ों को सुखाने की घटनाओं के सामने आने के बाद प्रशासन और वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया। ये मामला सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन के संज्ञान में आया।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए वन विभाग ने कार्रवाई शुरू की। उप प्रभागीय वन अधिकारी सुनील कुमार के नेतृत्व में टीम ने लगभग एक दर्जन से अधिक देवदार के हरे पेड़ों में गार्डनिंग और विशेष ट्रीटमेंट किया, ताकि उन्हें पूरी तरह से सूखने से बचाया जा सके। साथ ही, वन संरक्षण अधिनियम के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
प्रशासनिक जटिलताएं और जिम्मेदारी का बंटवारा
Lohaghat में देवदारों की सुरक्षा को लेकर कई सालों से प्रशासनिक उलझन चली आ रही है। ज्यादातर भूमि नजूल श्रेणी की है, जिसका निरीक्षण राजस्व विभाग करता रहा है। वहीं, पेड़ों की सुरक्षा का जिम्मा नगर पालिका और वन विभाग के बीच स्पष्ट रूप से तय नहीं हो पाया। अब जिलाधिकारी ने जनवरी-फरवरी में एरिया वाइज विभागीय जिम्मेदारी तय करने की बात कही थी। लेकिन जमीन पर ये व्यवस्था व्यावहारिक रूप से कठिन मानी जा रही है।
वरिष्ठ पत्रकार गणेश पांडे (Journalist Ganesh Pandey) के मुताबिक, बीते दशकों में नगर क्षेत्र से 12,000 से अधिक देवदार पेड़ गायब हो चुके हैं।
इतिहास में देवदारों की गिनती और संरक्षण
वर्ष 1985 में, जब चंपावत पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा था, तत्कालीन पर्यावरण प्रेमी जिलाधिकारी विजेंद्र पाल ने लोहाघाट के प्रत्येक देवदार पेड़ की नंबरिंग और विस्तृत रिकॉर्ड तैयार कराया। उस समय लगभग 15,000 पेड़ों की गिनती की गई थी। इसके बाद साल 2013 में, तत्कालीन जिलाधिकारी चौधरी द्वारा कराई गई गिनती में ये संख्या घटकर करीब 12,000 रह गई। इसके बाद भी अवैध कटान और अतिक्रमण लगातार जारी रहा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दिनदहाड़े देवदारों (Deodar cedar) पर कुल्हाड़ी चलने जैसी घटनाएं सामने आने लगीं। वन विभाग ने केवल जुर्माना लगाया, लेकिन इस अपराध की जड़ और स्थायी समाधान पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
स्थानीय सुझाव और संरक्षण के उपाय
Journalist Ganesh Pandey का कहना है कि नगर क्षेत्र में देवदारों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनका नियंत्रण सीधे थाना द्वारा किया जाए। इसके अलावा, नगर क्षेत्र में देवदार वन क्षेत्र (Deodar cedar) की पूर्ण सुरक्षा वन विभाग को ही सौंपी जाए। नगर पालिका और वन विभाग की संयुक्त गश्त नियमित रूप से की जानी चाहिए। वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों को लिखित रूप से पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी देकर उन्हें सहभागी बनाया जा सकता है। इससे लोग इन्हें अपनी धरोहर समझकर संरक्षित करेंगे।
पर्यटन और धार्मिक महत्व
लोहाघाट के देवदार वन न केवल पर्यावरणीय बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे महानगरों से पर्यटक और तीर्थयात्री मायावती आश्रम और रीठा साहिब जैसे धार्मिक स्थलों में आकर इन देवदारों की शोभा का दीदार करते हैं। इसलिए केवल प्रशासनिक उपाय ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों और पर्यटकों की सक्रिय भागीदारी भी इन दुर्लभ वृक्षों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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