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साल 2025 में कई उपलब्धियों के साथ ही मिले गहरे जख्म, जानें इस साल उत्तराखंड ने क्या खोया क्या पाया ?

Uttarakhand Year Ender 2025 : साल 2025 विदा होने वाला है और नए साल का आगाज होने वाला है। इस साल जहां एक ओर उत्तराखंड ने 25 साल पूरे होने का जश्न मनाया तो वहीं दूसरी ओर धराली और थराली जैसी आपदाएं कभी ना भरने वाली जख्म दे दिए।
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साल 2025 में कई उपलब्धियों के साथ ही मिले गहरे जख्म
साल 2025 में उत्तराखंड ने कई उपलब्धियां हासिंल की। राज्य स्थापना के 25 सालों का जश्न भई मनाया। लेकिन व आपदाओं ने उत्तराखंड को इस बार कभी ना भरने वाले जख्म भी दिए। धराली, थराली और हर्षिल की आपदाओं के कारण कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल गई। तो वहीं 50 से भी ज्यादा जिंदगियां मिट्टी में दफन हो गईं।
इस साल उत्तराखंड ने क्या खोया क्या पाया ?
जहां 2025 में Uttarakhand में आपदाओं के कारण कभी ना भरने वाले जख्म पाए। तो वहीं पेपर लीक जैसे घोटालों और पलायन जैसी समस्याओं का सामना किया। इसके साथ ही चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे महत्वपूर्ण कानून भी इस साल उत्तराखंड ने पाए। इसके साथ ही कई गेम चेंजर योजनाएं भी इस साल लागू की गईं।

समान नागरिक संहिता (UCC) देश के लिए बना मिसाल
उत्तराखंड में इस साल समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू किया गया। जो कि पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है। देश के अन्य राज्य इसे उद्धाहरण की तरह ले रहे हैं। ये कानून विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे निजी मामलों में सभी धर्मों और समुदायों के लिए समान नियम तय करता है, जिससे महिलाओं को बराबरी का अधिकार और न्याय मिलता है। UCC को संविधान में निहित ‘एक राष्ट्र, समान कानून’ की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है

रजत जयंती से लेकर रिकॉर्ड चारधाम यात्रा
साल 2025 में Uttarakhand राज्य के स्थापना के 25 साल पूरे हो गए हैं। जिसके उपलक्ष्य में सरकार ने रजत जयंती समारोह मनाया। इसके तहत गांव, तहसील स्तर तक कई कार्यक्रम किए गए। इसके साथ ही इस साल चारधाम यात्रा ने भी पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ डाले। इस साल 48.32 लाख श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए। प्रदेश के इतिहास में पहली बार राज्य ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया।

आपदाएं दे गई कभी ना भरने वाले जख्म
साल 2025 में आपदाओं ने Uttarakhand को कभी ना भरने वाले जख्म दिए। इस साल 2013 के बाद पहली बार उत्तराखंड में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। धराली में जहां बादल फटने से हुई इस भीषण आपदा में 60 से ज्यादा लोगों मिट्टी में जिंदा दफन हो गए। तो वहीं चमोली के थराली पौड़ी के सैंजी गांव में छह लोगों की मौत हो गई। तो वहीं 44 परिवार बेघर हो गए।
उत्तरकाशी में की स्थानों पर आपदा के कारण भारी नुकसान हुआ और कई लोगों को अपनी जान भी इसमें गंवानी पड़ी। इस साल प्रदेश में पहाड़ से लेकर मैदान तक ऐसा कोई जिला नहीं रहा जो आपदा की मार से अछूता रहा हो। देहरादून में अतिवृष्टि से 13 की मौत जबकि लगभग 15 से 16 लोग लापता हो गए।

मानव वन्य जीव संघर्ष में इस साल हुी सबसे ज्यादा मौतें
उत्तराखंड में साल 2025 मानव वन्यजीव संघर्ष के हिसाब से बेहद ही खराब रहा। इस साल गुलदार, बाघ के अलावा भालू ने भी आतंक मचाया। इस साल मानव वन्यजीव संघर्ष ने सारे रिकॉर्ड तोड़े हैं। इस साल जंगली जानवरों के आतंक के कारण 68 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। वहीं बात करें पिछले 25 सालों की तो 1264 से ज्यादा लोगों को जंगली जानवरों ने मौत के घाट उतारा है।
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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का आखिरी दिन आज, कल से अस्तित्व में आएगा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

Uttarakhand News : उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा बदलाव 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। राज्य सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लागू कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी मदरसों को अब नई व्यवस्था के तहत उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी और उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता प्राप्त करनी होगी।
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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का आखिरी दिन आज
मंगलवार, 30 जून यानी कि आज उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का अंतिम कार्य दिवस है। इसके बाद 1 जुलाई से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण आधिकारिक रूप से कार्यभार संभालेगा। प्रदेश के सभी 452 मदरसों को नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण और मान्यता की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
कल से अस्तित्व में आएगा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण
नई नियमावली के अनुसार किसी भी मदरसे को मिलने वाली मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए वैध रहेगी। इसके अलावा संस्थानों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से विधिवत संबद्धता भी प्राप्त करनी होगी। प्राधिकरण समय-समय पर मदरसों का भौतिक निरीक्षण करेगा और निर्धारित मानकों के पालन की समीक्षा करेगा।

सरकार द्वारा जारी नियमों के अनुसार मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान भी प्राधिकरण के दायरे में आएंगे। संस्थानों को निर्धारित सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा तथा आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित शुल्क जमा करना होगा।
1 जुलाई 2026 से नई व्यवस्था होगी लागू
मान्यता प्रक्रिया के दौरान संस्थान की अल्पसंख्यक पहचान, भूमि संबंधी दस्तावेज, वित्तीय स्थिति, शिक्षकों की योग्यता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी। अगर कोई संस्थान नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी मान्यता निरस्त की जा सकती है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 14 मई 2026 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान संबंधी मान्यता नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई थी। इसी निर्णय के आधार पर 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की जा रही है।
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अल्मोड़ा में भीषण सड़क हादसा, चार लोगों की मौके पर ही मौत, दो की हालत गंभीर

Almora Accident : उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में सोमवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहां कार खाई में गिरने के कारण चार लोगों की मौत हो गई। जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि ये दुर्घटना लमगड़ा विकासखंड के चायखान-बेगानिया मोटर मार्ग पर बलिया क्षेत्र के पास हुई है।
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अल्मोड़ा में खाई में गिरी कार, 4 की मौत
मिली जानकारी के मुताबिक मारुति ऑल्टो कार चायखान-बेगानिया मार्ग से गुजर रही थी। बलिया के समीप पहुंचते ही चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, जिससे कार सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के समय वाहन में चालक सहित कुल छह लोग सवार थे।
दुर्घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। साथ ही पुलिस और प्रशासन को घटना की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान चलाया।

दर्दनाक हादसे में दो गंभीर रूप से घायल
इस हादसे में चार लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लमगड़ा ले जाया गया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने दोनों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल अल्मोड़ा रेफर कर दिया।
पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुटी
पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं दुर्घटना के कारणों की जांच भी की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से पहाड़ी मार्गों पर वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
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पौड़ी में गुलदार ने घास काटने गई महिला को बनाया निवाला, घसीटते हुए ले गया जंगल की ओर…

Pauri News : पौड़ी गढ़वाल जिले के लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र के नैनीडांडा विकासखंड स्थित बणासी तल्ली गांव में शनिवार सुबह गुलदार के हमले में एक महिला की जान चली गई। इस दर्दनाक घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में भय और शोक का माहौल है।
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पौड़ी में गुलदार ने महिला को बनाया निवाला
पौड़ी गढ़वाल में एक बार फिर गुलदार का आतंक देखने को मिला है। अपने पालतू मवेशियों के लिए घास लेने गई महिला को गुलदार ने अपना निवाला बना लिया। मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह गांव की दो महिलाएं शांति देवी और सुशीला देवी रोजमर्रा की तरह जंगल में घास काटने गई थीं।
इसी दौरान झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक सुशीला देवी पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक और तेज था कि महिला को बचाव का मौका नहीं मिला। गुलदार उन्हें घसीटते हुए जंगल की ओर ले गया।
गुलदार ने घास काटने के दौरान किया हमला
हमले के समय साथ मौजूद शांति देवी ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और जंगल में महिला की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद घटनास्थल से कुछ दूरी पर सुशीला देवी का शव बरामद हुआ। इस घटना से पूरे क्षेत्र में मातम छा गया।

वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हो गई। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही गुलदार की तलाश के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। घटना की सूचना क्षेत्रीय विधायक महंत दिलीप रावत को भी दे दी गई है।
हादसे के बाद से स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के प्रति नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इसके साथ ही लोगों ने गुलदार को आदमखोर घोषित करने और जल्द से जल्द पकड़ने की मांग की है।
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