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कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने का सबसे आसान तरीका: खाली पेट पिएं यह एक गिलास जूस….

सर्दियों में अदरक का सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। खासकर अदरक का जूस शरीर में जमा खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। अदरक में जिंजरोल, एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन को कम करने और इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं।
अदरक का जूस, खासकर सुबह खाली पेट पीने से कई लाभ होते हैं। यह न केवल कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है, बल्कि वजन घटाने और दिल की सेहत को भी बेहतर बनाता है। इसके अलावा, अदरक में विटामिन बी6, विटामिन सी, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो रक्तचाप और हृदय रोगों के जोखिम को कम करते हैं।
अदरक का जूस कैसे बनाएं:
- अदरक के 2-3 इंच टुकड़े को कद्दूकस या कुचलकर उसका जूस निकालें।
- जूस को मलमल के कपड़े में डालकर कसकर निचोड़ लें।
- स्वाद बढ़ाने के लिए आप इसमें थोड़ा शहद और नींबू मिला सकते हैं।
- सुबह खाली पेट 1-2 चम्मच जूस से शुरुआत करें।
अदरक के फायदे:
- खराब कोलेस्ट्रॉल कम करना: अदरक का जूस कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है और हृदय स्वास्थ्य को सुधारता है।
- वजन घटाना: अदरक का सेवन वजन घटाने में मदद करता है और शरीर के मेटाबोलिज्म को तेज करता है।
- इम्युनिटी को बढ़ाना: अदरक में पाए जाने वाले विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।
- सर्दी-खांसी में राहत: अदरक की चाय सर्दी-खांसी से राहत देने के लिए भी प्रभावी है।
अदरक का जूस पीकर आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं और कई बीमारियों से बच सकते हैं।
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नहीं थम रहे बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले , 18 दिन मे 6 हिंदुओं की हुई मौत..

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले: 6 मौतों से बढ़ी चिंता, सुरक्षा पर सवाल
बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा बढ़ी है। ताज़ा घटना में नरसिंदी जिले के पोलाश उपजिला में एक हिंदू दुकानदार की हत्या हुई। अलग-अलग जिलों में हुई घटनाओं को मिलाकर अब तक 6 हिंदुओं की मौत की पुष्टि सामने आई है, जिससे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ी है।
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ताज़ा वारदात क्या है
सोमवार रात नरसिंदी जिले के पोलाश उपजिला क्षेत्र के चोरसिंदूर बाजार में किराना दुकानदार मोनी चक्रवर्ती पर अज्ञात बदमाशों ने धारदार हथियारों से हमला किया। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वे स्थानीय स्तर पर सम्मानित व्यापारी माने जाते थे और परिवार के मुख्य सहारा थे।
पत्रकार की दिनदहाड़े हत्या
इससे पहले जशोर जिले के मनीरामपुर इलाके में पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावर मोटरसाइकिल पर आए, उन्हें उनकी बर्फ फैक्ट्री से बाहर बुलाया और पास की गली में सिर में कई गोलियां मारीं। घटना ने प्रेस की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े किए हैं।
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले : अब तक किन-किन की मौत
उपलब्ध जानकारी के अनुसार हालिया हिंसा में हिंदू समुदाय के 6 लोगों की मौत हो चुकी है:
- मोनी चक्रवर्ती
- राणा प्रताप बैरागी
- दीपू दास
- अमृत मंडल
- बजेंद्र विश्वास
- खोकोन दास
रिपोर्ट्स के मुताबिक दीपू दास की हत्या कथित ईशनिंदा के आरोप में हुई, जबकि कारोबारी खोकोन दास पर भीड़ ने हमला कर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। कई दिनों के इलाज के बाद उनकी मौत हुई।
माहौल क्यों चिंताजनक है
लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव को और गहरा किया है। हिंदू समुदाय में भय का माहौल है। लोग स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार से ठोस सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले की जांच और प्रशासन की स्थिति
पुलिस जांच जारी है, लेकिन अब तक किसी बड़ी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। सुरक्षा बढ़ाने, संवेदनशील इलाकों में गश्त और त्वरित न्याय की मांग तेज हो रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. हालिया घटनाओं में कितनी मौतें हुई हैं?
A. अब तक 6 हिंदुओं की मौत की पुष्टि सामने आई है।
Q2. ताज़ा घटना कहां हुई?
A. नरसिंदी जिले के पोलाश उपजिला क्षेत्र में।
Q3. क्या जांच चल रही है?
A. हां, पुलिस जांच जारी है, लेकिन बड़ी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
Q4. समुदाय की प्रमुख मांग क्या है?
A. स्थायी सुरक्षा व्यवस्था, दोषियों की त्वरित गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच।
निष्कर्ष: हालिया घटनाएं केवल अपराध नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल हैं। भरोसा बहाल करने के लिए पारदर्शी जांच, त्वरित कार्रवाई और जमीनी स्तर पर सुरक्षा मजबूत करना जरूरी है।
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कब है Sakat Chauth Vrat 2026 , जानें क्या करें , क्या न करें और पूजा विधि…

Sakat Chauth Vrat 2026: संतान सुख, विघ्न नाश और रिद्धि-सिद्धि का पावन पर्व
हिंदू धर्म में सकट चौथ व्रत को अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान श्री गणेश और सकट माता की उपासना का विशेष दिन है, जिसे संतान की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन की बाधाओं के नाश से जोड़ा जाता है। वर्ष 2026 में सकट चौथ व्रत 06 जनवरी, मंगलवार को माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाएगा। यह पर्व विशेष रूप से माताओं और महिलाओं के बीच गहरी आस्था रखता है, हालांकि पुरुष भी यह व्रत रख सकते हैं।
सनातन परंपरा में माना जाता है कि सकट चौथ के दिन विधि-विधान से पूजा और नियमों का पालन करने पर भगवान गणेश अपने भक्तों के सभी विघ्न हर लेते हैं और जीवन में शुभता का विस्तार होता है।
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Sakat Chauth Vrat का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
सकट चौथ व्रत को कई क्षेत्रों में संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। “सकट” शब्द का अर्थ संकट से है, यानी यह व्रत संकटों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। लोक मान्यताओं के अनुसार, सकट माता ने अपने आशीर्वाद से संतान की रक्षा की थी, इसलिए माताएं इस दिन उपवास रखकर अपनी संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं।
यह व्रत मातृत्व, त्याग और श्रद्धा का प्रतीक है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस पर्व की परंपराएं थोड़ी-बहुत भिन्न हो सकती हैं, लेकिन मूल भाव एक ही है—भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करना।
सकट चौथ व्रत 2026: तिथि, वार और समय
- तिथि: 06 जनवरी 2026
- वार: मंगलवार
- मास: माघ
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- व्रत पारण: चंद्र दर्शन के बाद
सकट चौथ व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत का पारण नहीं करना चाहिए। यही कारण है कि भक्त पूरे दिन उपवास रखकर रात में चंद्रमा निकलने की प्रतीक्षा करते हैं।
सकट चौथ व्रत की पूजा विधि (Step-by-Step)
सफल और पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए Sakat Chauth Vrat की पूजा विधि का पालन करना आवश्यक माना गया है।
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के ईशान कोण को साफ कर वहां पूजा स्थान तैयार करें।
- भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को लाल वस्त्र पर स्थापित करें।
- दीप जलाकर गणपति का ध्यान करें और संकल्प लें।
- दूर्वा, तिल के लड्डू, मोदक, गन्ना और लाल फूल अर्पित करें।
- गणेश मंत्र, स्तोत्र और आरती का पाठ करें।
- शाम को चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दें और फिर व्रत का पारण करें।
सकट चौथ व्रत में क्या करें
(What to do on Sakat Chauth Vrat)
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करें।
- पूजा के समय लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें।
- लाल रंग के ऊनी आसन का प्रयोग करें।
- पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
- गणपति को उनकी प्रिय वस्तुएं जैसे दूर्वा और तिल से बने भोग अर्पित करें।
- पूरे दिन मन को शांत और संयमित रखें।
सकट चौथ व्रत में क्या न करें
(What to not do on Sakat Chauth Vrat)
- क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें।
- तामसिक भोजन और नशे से दूरी रखें।
- दिन में सोने से बचें।
- पूजा में तुलसी दल अर्पित न करें।
- चूहों या किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाएं।

Sakat Chauth Vrat की पौराणिक कथा
प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक अत्यंत गरीब ब्राह्मणी अपने छोटे से पुत्र के साथ रहती थी। उसका जीवन अत्यंत कष्टों से भरा हुआ था। भोजन और वस्त्र तक का प्रबंध बड़ी कठिनाई से होता था, लेकिन वह स्त्री अत्यंत धार्मिक और संस्कारी थी। वह प्रतिदिन भगवान की पूजा करती और अपने पुत्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती।
एक वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आई। उसी दिन नगर की सभी महिलाएं सकट चौथ व्रत रख रही थीं। ब्राह्मणी भी व्रत रखना चाहती थी, लेकिन उसके पास न तो पूजा की सामग्री थी और न ही भोग चढ़ाने के लिए कुछ। फिर भी उसने मन में ठान लिया कि वह श्रद्धा से व्रत रखेगी।
ब्राह्मणी ने पूरे दिन उपवास रखा। शाम को जब चंद्रमा निकलने का समय हुआ, तो उसके घर में दीपक जलाने के लिए तेल तक नहीं था। वह बहुत दुखी हुई, लेकिन उसने मन में भगवान से प्रार्थना की और चंद्रमा को मन ही मन अर्घ्य अर्पित किया।
उसी रात उसके पुत्र को अचानक तेज बुखार आ गया और उसकी स्थिति गंभीर हो गई। ब्राह्मणी भयभीत हो उठी और रोते-रोते भगवान गणेश और सकट माता से अपने पुत्र की रक्षा की गुहार लगाने लगी।
उसकी सच्ची भक्ति और मातृत्व की पुकार सुनकर भगवान गणेश प्रकट हुए। उन्होंने सकट माता के साथ मिलकर बालक को जीवनदान दिया। बालक का बुखार उतर गया और वह स्वस्थ हो गया।
भगवान गणेश ने ब्राह्मणी से कहा,
“हे माता, तुमने बिना किसी दिखावे और स्वार्थ के श्रद्धा से सकट चौथ व्रत रखा है। आज से यह व्रत संतान की रक्षा, दीर्घायु और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाएगा।”
इसके बाद ब्राह्मणी का जीवन बदल गया। उसके घर में कभी अभाव नहीं रहा और उसका पुत्र दीर्घायु व यशस्वी बना।
Sakat Chauth Vrat की दूसरी लोकप्रचलित कथा
एक अन्य कथा के अनुसार, एक राजा की रानी के कई पुत्र थे, लेकिन सभी अल्पायु में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते थे। दुखी रानी ने एक वृद्धा से अपने कष्ट का कारण पूछा। वृद्धा ने बताया कि रानी ने कभी सकट चौथ व्रत नहीं रखा है।
रानी ने विधि-विधान से सकट चौथ व्रत रखा, चंद्र दर्शन किया और कथा सुनी। इसके बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जो दीर्घायु और पराक्रमी बना। तभी से यह व्रत संतान की रक्षा से जुड़ गया।
किन गलतियों से लगता है दोष या पाप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार Sakat Chauth Vrat में कुछ गलतियां पुण्य के स्थान पर दोष का कारण बन सकती हैं।
- टूटे हुए अक्षत या बासी फूल चढ़ाना।
- केतकी का फूल या तुलसी दल अर्पित करना।
- सफेद वस्त्र, सफेद आसन या सफेद चंदन का प्रयोग करना।
- पूजा के दौरान श्रद्धा का अभाव या जल्दबाजी दिखाना।
इनसे बचकर ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है।
सकट चौथ व्रत का आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश
यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। Sakat Chauth Vrat आत्मसंयम, अनुशासन और सकारात्मक सोच का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि आस्था और नियमों के पालन से जीवन की कठिनाइयों को भी सरल बनाया जा सकता है।
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FAQs
प्रश्न 2: सकट चौथ व्रत 2026 कब है?
6 जनवरी 2025 को ।
प्रश्न 2: सकट चौथ व्रत कौन-कौन रख सकता है?
यह व्रत महिलाएं, पुरुष और युवा सभी रख सकते हैं।
प्रश्न 3: क्या बिना चंद्र दर्शन व्रत खोला जा सकता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्र दर्शन के बिना व्रत का पारण नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 4: सकट चौथ व्रत से क्या लाभ होते हैं?
संतान सुख, परिवार में शांति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति।
निष्कर्ष
Sakat Chauth Vrat 2026 आस्था, श्रद्धा और संयम का पर्व है। सही विधि, नियम और शुद्ध भाव से किया गया यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्रदान करता है। यदि आप संतान के मंगल और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं, तो यह व्रत आपके लिए विशेष फलदायी सिद्ध हो सकता है।
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अग्निवीर जवानों के लिए बड़ी खबर ! सेवा के दौरान शादी की तो नहीं मिलेगा…..

Agniveer Update: अग्निवीर जवानों के विवाह को लेकर सेना का रूख सख्त, शादी की तो स्थाई नहीं हो पाएंगे
मुख्य बिंदु
Agniveer Update: अगर आप भी भारतीय सेना में जाने का सपना देखते हैं और सेना भर्ती की तैयारी कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। भारतीय सेना ने अग्निवीर सैनिकों के स्थाई कार्यकाल के सम्बन्ध में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। जिसमें सेना की तरफ से साफ़ किया गया है कि अग्निवीर सैनिक सेवा में रहते हुए या सेवामुक्त होने के तुरंत बाद भी शादी नहीं कर सकते हैं।
Indian army latest news ; अग्निवीर भर्ती को लेकर नया नियम
बता दें कि साल 2022 से अग्निवीर योजना शुरू की गई थी। जिसमें भर्ती हुए जवानों का पहला बैच इस साल सेवामुक्त हो जाएगा। इस से पहले सेना की तरफ से अग्निवीर जवानों के नियमितीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। जिसमें सेवाकाल के दौरान विवाह करने वाले अग्निवीरों को स्थाई सैनिक के रूप में दावेदारी करने के लिए अयोग्य बताया गया है।

Agniveer Retirement : इस साल होंगे 20 हजार अग्निवीर सेवामुक्त
इस वर्ष जून-जुलाई में लगभग 20 हजार अग्निवीर सेवामुक्त होंगे। जिसके बाद उनमे से 25 फीसदी जवानों को उनकी शारीरिक दक्षता और परीक्षा के माध्यम से वापस सेना में परमानेंट कमीशन (Agniveer Permanent Commission) दिया जाएगा। अग्निवीरों के सेवामुक्त होने के बाद परमानेंट कमीशन की ये प्रक्रिया लगभाग 4 से 6 महीने लम्बी हो सकती है। लेकिन इसमें कुछ जवान ऐसे होंगे जो पहले ही इस से बाहर रखे जाएंगे।
Agniveer Marriage Rules: विवाह को लेकर सेना का रुख सख्त
- चार साल के कार्यकाल के बीच में कोई भी अग्निवीर शादी नहीं कर सकता है।
- सेवामुक्त होने के तुरंत बाद भी अग्निवीर शादी नहीं कर सकते अन्यथा वो परमानेंट कमीशन के लिए अयोग्य माने जाएंगे।
- परमानेन्ट कमीशन (Agniveer Permanent Commission) की पूरी प्रक्रिया के बाद परिणाम घोषित होने के बाद ही अग्निवीरों को शादी की अनुमति दी जाएगी।
- परमानेंट कमीशन पाने के लिए देना होगा अनुसाशन और त्याग का परिचय।

क्या Agniveer Soldiers सेवा के दौरान शादी कर सकते हैं?
नहीं, भारतीय सेना के नियमों के अनुसार चार साल के कार्यकाल के दौरान अग्निवीर जवानों को शादी की अनुमति नहीं है।
कितने Agniveer को Permanent Commission मिलेगा?
सेवामुक्त होने वाले कुल अग्निवीरों में से लगभग 25 प्रतिशत जवानों को शारीरिक दक्षता, मेडिकल और लिखित परीक्षा के आधार पर स्थायी कमीशन दिया जाएगा।
agniveer Scheme कब शुरू हुई थी?
अग्निवीर योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में भारतीय सेना द्वारा की गई थी।
अगर अग्निवीर ने नियमों के खिलाफ शादी की तो क्या होगा?
यदि कोई अग्निवीर नियमों के विरुद्ध शादी करता है, तो वह स्थायी कमीशन की चयन प्रक्रिया से बाहर हो जाएगा।
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