धर्म-कर्म
रमजान 2026 : कब रखा जाएगा पहला रोजा , जानें रमजान से जुड़ी हर जरूरी बात…

रमजान 2026: पवित्र महीने को लेकर तैयारियां तेज
दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए रमजान सिर्फ एक धार्मिक महीना नहीं बल्कि आत्मिक अनुशासन, दया और सामाजिक एकता का समय माना जाता है। साल 2026 का रमजान खास इसलिए भी है क्योंकि यह सर्द मौसम में पड़ रहा है, जिससे कई जगह रोज़े के दौरान मौसम अपेक्षाकृत आरामदायक रह सकता है। इस बीच कई देशों में रमजान की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और धार्मिक संगठनों ने टाइमटेबल, चैरिटी गाइडलाइन और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर योजनाएं बनानी शुरू कर दी हैं।
रमजान 2026 कब शुरू होगा?
खगोलीय गणनाओं और धार्मिक अनुमानों के आधार पर:
- खाड़ी देशों में रमजान 18 फरवरी 2026 की शाम के बाद शुरू होने की संभावना
- भारत सहित दक्षिण एशिया में पहला रोज़ा 19 फरवरी 2026 को होने की उम्मीद
- रमजान आमतौर पर 29 या 30 दिन का होता है
खबरों और खगोलीय अनुमानों के अनुसार दक्षिण एशिया में रमजान अक्सर खाड़ी देशों से एक दिन बाद शुरू होता है।
खगोलीय अनुमानों के मुताबिक 2026 में पहला रोज़ा 19 फरवरी को पड़ सकता है, हालांकि अंतिम फैसला चांद दिखने के बाद ही लिया जाता है।
ईद-उल-फितर 2026 कब होगी?
रमजान खत्म होने के बाद ईद-उल-फितर मनाई जाती है।
- अनुमानित तारीख: 20 या 21 मार्च 2026
- अगर रमजान 29 दिन का रहा तो ईद 20 मार्च
- अगर 30 दिन का रहा तो ईद 21 मार्च
यह अनुमान चंद्रमा दिखने पर निर्भर करता है।
रमजान का धार्मिक और सामाजिक महत्व
रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना होता है। इस दौरान मुसलमान:
- रोज़ा रखते हैं
- कुरान पढ़ते हैं
- नमाज़ बढ़ा देते हैं
- दान और मदद करते हैं
इस महीने को आत्म शुद्धि और आध्यात्मिक सुधार का समय माना जाता है।
रोज़ा क्या होता है और इसका उद्देश्य क्या है?
रोज़ा रखने का मतलब सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं होता। इसका मकसद होता है:
- आत्म नियंत्रण बढ़ाना
- जरूरतमंद लोगों की तकलीफ समझना
- आध्यात्मिक जुड़ाव मजबूत करना
रमजान के दौरान सुबह सहरी और शाम इफ्तार का खास महत्व होता है।
आखिरी 10 दिन क्यों खास होते हैं?
रमजान के आखिरी 10 दिन बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इन्हीं दिनों में लैलतुल कद्र आने की मान्यता होती है।
यह रात इस्लाम में सबसे पवित्र रातों में से एक मानी जाती है, जिसमें इबादत का बहुत बड़ा महत्व होता है।
ज़कात और दान की परंपरा
रमजान में चैरिटी का महत्व बहुत ज्यादा होता है।
हाल ही में कुछ देशों में रमजान से पहले ज़कात और चैरिटी की दरें भी घोषित की गई हैं ताकि जरूरतमंदों तक मदद पहुंच सके।
दान के मुख्य प्रकार:
- ज़कात
- सदक़ा
- ज़कात-उल-फितर
दुनिया भर में रमजान की तैयारियां
कई देशों में रमजान के दौरान काम और स्कूल टाइमिंग बदली जाती है ताकि लोग धार्मिक गतिविधियों पर ध्यान दे सकें।
कुछ जगहों पर स्कूल शेड्यूल में बदलाव और छुट्टियां भी घोषित की गई हैं ताकि परिवार और बच्चे धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकें।
रमजान हर साल अलग तारीख पर क्यों आता है?
इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है।
- इस्लामिक साल: लगभग 354 दिन
- अंग्रेजी कैलेंडर साल: 365 दिन
इस वजह से रमजान हर साल लगभग 10–11 दिन पहले आ जाता है।
2026 का “विंटर रमजान” क्यों खास है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 का रमजान ठंडे मौसम के आसपास पड़ रहा है, जिसे कई जगह “विंटर रमजान” कहा जा रहा है।
इसका मतलब:
- कुछ देशों में रोज़े के घंटे कम हो सकते हैं
- मौसम के कारण रोज़ा रखना आसान लग सकता है
रमजान के बाद ईद का जश्न
ईद-उल-फितर रमजान के बाद आने वाला सबसे बड़ा त्योहार होता है।
ईद के दिन:
- खास नमाज़
- परिवार मिलन
- ईदी देना
- दान करना
यह त्योहार भाईचारे और खुशी का प्रतीक माना जाता है।
रमजान 2026 – मुख्य तथ्य
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| संभावित शुरुआत | 18–19 फरवरी 2026 |
| भारत में शुरुआत | लगभग 19 फरवरी 2026 |
| संभावित अवधि | 29–30 दिन |
| ईद-उल-फितर | 20–21 मार्च 2026 |
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
खगोलीय विशेषज्ञों के अनुसार चांद 17 फरवरी के आसपास बन सकता है लेकिन उस दिन दिखना मुश्किल हो सकता है, इसलिए 19 फरवरी से रोज़े शुरू होने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है।
निष्कर्ष
रमजान 2026 सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान का महीना नहीं बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक सुधार का समय है। यह महीना इंसान को संयम, सहनशीलता और मदद की भावना सिखाता है।
दुनिया भर में लोग इस पवित्र महीने का इंतजार करते हैं क्योंकि यह आत्म सुधार और समाज सेवा का मौका देता है।
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तुंगनाथ और मध्यमहेश्वर के कपाट खुलने की तिथि की हुई घोषणा, इस दिन से कर पाएंगे दर्शन

Rudraprayag News : द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथियों की घोषणा कर दी गई है। आज वैसाखी के पावन पर्व पर कपाट खुलने की तारीखों का ऐलान किया गया।
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तुंगनाथ के कपाट खुलने की तिथि की हुई घोषणा
तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खोल दिए जाएंगे। आज भगवान तुंगनाथ के पुजारी विजय भारत मैठाणी व मंदिर समिति ग्रामीणों की उपस्थिति में वैसाखी के पावन पर्व पर कपाट खुलने की तिथि की घोषणा की गई। बता दें कि 20 अप्रैल को भगवान की चल विग्रह डोली शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कू से अपनी यात्रा शुरू करेगी। यात्रा के दौरान पुंडखी में भोग अर्पित किया जाएगा और रात्रि विश्राम भूतनाथ मंदिर में होगा।

21 अप्रैल भूतनाथ मंदिर से रवाना होगी डोली
21 अप्रैल को डोली सुबह लगभग 11 बजे भूतनाथ मंदिर से आगे बढ़ेगी। ये यात्रा पाब गांव, चलियाखोड़ और बनियाकुंड होते हुए अपने दूसरे पड़ाव चोपता पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम किया जाएगा। 22 अप्रैल को डोली सुबह 8 बजे चोपता से प्रस्थान कर ग्रीष्मकालीन गद्दी स्थल तुंगनाथ धाम पहुंचेगी। यहां पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी, जिसके बाद मंदिर के कपाट सुबह 11 बजे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे।

21 मई को खोल दिए जाएंगे मध्यमहेश्वर धाम के कपाट
तुंगनाथ के साथ ही आज द्वितीय केदार मध्यमहेश्वर के कपाट खुलने की तिथि का भी ऐलान किया गया। पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में आज मध्यमहेश्वर धाम के कपाट खोलने की तारीख की घोषणा हुई। इस साल 21 मई को मध्यमहेश्वर धाम के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे।
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बैसाखी के पावन पर्व पर खुले मां गौरामाई मंदिर के कपाट, सैंकड़ों श्रद्धालु बने इस पल के साक्षी

Rudraprayag News : गौरीकुंड स्थित गौरामाई मंदिर के खुले कपाट, छह महीने यहीं दर्शन देंगी मां गौरा
Rudraprayag News : आज बैसाखी पर्व के शुभ अवसर पर बाबा केदारनाथ के अंतिम पड़ाव गौरीकुंड स्थित मां Gauramai mandir के कपाट विधिविधानपूर्व खोल दिए गए हैं। इसी के साथ बाबा केदार के धाम की यात्रा की आध्यात्मिक शुरुआत हो गई है।
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बैसाखी के पावन पर्व पर खुले मां गौरामाई मंदिर के कपाट
बैसाखी के पावन पर्व पर गौरामाई मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए हैं। बाबा केदारनाथ के अंतिम पड़ाव गौरीकुंड स्थित गौरामाई मंदिर (Gauramai mandir) के कपाट आज सुबह आठ बजे शुभ मुहूर्त में विधिविधान पूर्व खोले गए। इस ऐतिहासिक पल के सैकड़ों श्रद्धालु साक्षी बने।
पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल
गौरामाई मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही पूरा इलाका मां के जयकारों से गूंज उठा। कपाट खुलते ही पूरे क्षेत्र में आस्था और उल्लास का वातावरण बन गया। इस पावन क्षण में लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला।

बता दें कि सुबह गौरी गांव स्थित मां गौरी मंदिर में आचार्य गणों ने पूजा की। जिसके बाद मां गौरामाई की भोग मूर्तियों को कंडी में गौरामाई मंदिर तक लाया गया। जिसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए गए। अब अगले छह महीने तक गौरामाई भक्तों को इसी मंदिर में दर्शन देंगी।
Haridwar
बैसाखी स्नान पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़

Haridwar News : बैसाखी स्नान पर्व के अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में देशभर से आए श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई।
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बैसाखी स्नान पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब
बैसाखी स्नान पर हरिद्वार में आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है। बैसाखी स्नान को लेकर श्रद्धालुओं ने आज से ही हरिद्वार पहुंचना शुरू कर दिया है। सुबह से ही देशभर से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच रहे हैं और मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ कमा रहे हैं।
हर की पैड़ी समेत प्रमुख गंगा घाटों पर भारी भीड़
हर की पौड़ी समेत प्रमुख गंगा घाटों पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। जहां श्रद्धालुओं में खासा उत्साह और श्रद्धा देखने को मिल रही है। गंगा स्नान के साथ-साथ लोग पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में
वहीं, इस बड़े धार्मिक आयोजन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। सुरक्षा के मद्देनजर गंगा घाटों और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन की मुस्तैदी के बीच श्रद्धालु भी शांति और व्यवस्था के साथ स्नान कर रहे हैं, जिससे पूरा आयोजन सुचारू रूप से संपन्न होता दिख रहा है।
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