Chamoli
बद्रीनाथ हाईवे: 12 घंटे बाद खुला कमेडा मार्ग, यात्रियों ने ली राहत की सांस।

चमोली – ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे गोचर के पास कमेडा में 12 घंटे बाद खुल गया है। जिसके बाद जाम में फंसे लोगों ने राहत की सांस ली। बीती रात को आई भारी बारिश के कारण हाईवे कमेडा में बंद हो गया था।

तहशीलदार कर्णप्रयाग सुधा डोभाल ने बताया कि शुक्रवार रात्रि की भारी बारिश के चलते यहां पहाड़ी से मलबा गिरकर सड़क पर आ गया…जिसके चलते यातायात बंद हो गया था। काफी संख्या में यहां वाहन फंसे हुए रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाईवे को खोलने के लिए सुबह सात बजे तक कोई जेसीबी मशीन नहीं आई थी। बदरीनाथ हाईवे पर कमेडा में स्लाइंडिंग जोन है। हाईवे बंद होने से यहां सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में वाहन फंसे रहे।
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चमोली की नीति घाटी में आया भयानक जलसैलाब, पुल-गाड़ियां बहीं, एक BRO कर्मी लापता

Chamoli News : भारत-चीन सीमा से सटे चमोली जिले की नीती घाटी में सोमवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक नाले में अचानक पानी का स्तर बढ़ने से तेज जलसैलाब आ गया। पानी और मलबे के तेज बहाव में नाले पर बना वैली ब्रिज बह गया।
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चमोली की नीति घाटी में आया भयानक जलसैलाब
चमोली में देर शाम हुई घटना के बाद से चीन सीमा का संपर्क कट गया है। मिली जानकारी के मुताबिक घटना शाम करीब साढ़े पांच बजे की बताई जा रही है। तमक नाले में अचानक आए तेज बहाव की चपेट में 123 बीआरटीएफ सुराईथोटा की ओर से बनाया गया वैली ब्रिज आ गया। देखते ही देखते पुल पानी के तेज बहाव में बह गया। अचानक आई बाढ़ से आसपास मौजूद वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है।
GREF का वाहन भी तेज बहाव की चपेट में आया
तमक नाले में आए सैलाब के दौरान जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) से जुड़े कई वाहन प्रभावित हुए। इनमें स्कॉर्पियो वाहन संख्या 24 BE 16058 और बोलेरो कैंपर संख्या 23 B 15947 समेत एक अन्य वाहन शामिल है।

जलसैलाब में बीआरओ का एक कर्मी लापता
घटना के दौरान स्कॉर्पियो चला रहे नायक पंकज कुमार के तेज बहाव में बहने की सूचना सामने आई है। उनकी तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। बताया गया है कि स्कॉर्पियो वाहन को बाद में सुरक्षित स्थान पर कर लिया गया।
कुछ ही मिनटों में बदला नाले का मिजाज
प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक, तमक नाले में अचानक पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा आने लगा। तेज बहाव इतना शक्तिशाली था कि आसपास खड़े वाहन भी इसकी चपेट में आ गए। पानी और मलबे ने कुछ ही समय में पूरे इलाके को प्रभावित कर दिया।
स्थानीय स्तर पर बताया जा रहा है कि तमक क्षेत्र में एक के बाद एक करीब तीन बार अत्यधिक बारिश हुई। लगातार हुई तेज बारिश के बाद नाले में पानी का दबाव अचानक बढ़ गया। इसी तेज बहाव के कारण वैली ब्रिज इसकी चपेट में आया और देखते ही देखते बह गया।
Chamoli
हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने की तिथि की हुई घोषणा, 10 अक्टूबर को किए जाएंंगे बंद

Hemkund Sahib : हेमकुंड साहिब की इस वर्ष की तीर्थयात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है। हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा के अनुसार, पवित्र धाम के कपाट 10 अक्टूबर को बंद कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही इस साल की यात्रा का औपचारिक समापन हो जाएगा।
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हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने की तिथि की हुई घोषणा
हेमकुंड साहिब के कपाट इस साल 23 मई को धार्मिक अनुष्ठानों और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। कपाट खुलने के बाद से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी यहां पहुंचे। अब तक 2 लाख 38 हजार से अधिक श्रद्धालु हेमकुंड साहिब के दर्शन कर चुके हैं।
श्रद्धालुओं से यात्रा समय से पूरी करने की अपील
यात्रा अवधि के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद बड़ी संख्या में संगत ने पवित्र धाम पहुंचकर मत्था टेका और अरदास की। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि का ध्यान रखते हुए अपनी यात्रा समय से पूरी कर लें।

15 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित है हेमकुंड साहिब
हेमकुंड साहिब सिख धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। यह उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्र तल से 15 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। सात बर्फीली चोटियों से घिरे इस पवित्र स्थल के बीच स्थित हिमानी झील इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और खास बनाती है।
बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु
ऊंचाई और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हेमकुंड साहिब की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आस्था के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण तीर्थ अनुभव भी होती है। हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
Uttarakhand
उफनते गधेरे के पास मिला नवजात!, रोने की आवाज सुनाई देने पर बची मासूम की जान

Chamoli News : उत्तराखंड के चमोली जिले में लगातार बारिश और भूस्खलन के बीच एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। दशोली विकासखंड में एक नवजात शिशु गधेरे के पास जीवित अवस्था में मिला। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस टीम ने नवजात को सुरक्षित बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया।
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उफनते गधेरे के पास जिंदा मिला नवजात!
गुरुवार 6 अगस्त की सुबह ग्राम पंचायत रागतोली के आसपास की है। स्थानीय लोगों ने गधेरे की ओर से बच्चे के रोने की आवाज सुनी। आवाज का पीछा करते हुए ग्रामीण जब मौके पर पहुंचे तो वहां एक नवजात शिशु लावारिस हालत में पड़ा मिला। बारिश के बीच गधेरे के पास नवजात को देखकर ग्रामीणों के होश उड़ गए।
रोने की आवाज सुनाई देने पर बची मासूम की जान
ग्रामीणों ने बिना देरी किए पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नवजात को अपने कब्जे में लेकर तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्चे की जांच की, जिसके बाद उसकी स्थिति सामान्य बताई गई है। फिलहाल नवजात चिकित्सकों की निगरानी में है।
ग्रामीणों ने सुनी छी नवजात के रोने की आवाज
चमोली पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार के मुताबिक, रागतोली गांव के पास ग्रामीणों ने नवजात के रोने की आवाज सुनी थी। मौके पर पहुंचने के बाद बच्चे के लावारिस हालत में मिलने की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नवजात को अस्पताल पहुंचाया।
घटना की खबर फैलते ही आसपास के क्षेत्र में लोगों की भीड़ जमा हो गई। नवजात के मिलने को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। शुरुआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि किसी व्यक्ति ने नवजात को सुबह के समय वहां छोड़ दिया होगा।
आसपास के लोगों से की जा रही है पूछताछ
पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि नवजात को गधेरे के पास कौन छोड़कर गया था। पुलिस आसपास के इलाकों से भी जानकारी जुटा रही है, ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
फिलहाल सबसे राहत की बात यह है कि कठिन परिस्थितियों के बीच नवजात को समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया और उसे अस्पताल में चिकित्सा सुविधा मिल गई। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चे को वहां किसने और किन परिस्थितियों में छोड़ा था।
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