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भारत की महिला अंडर-19 टीम ने जीता दूसरा लगातार टी20 वर्ल्ड कप, रचा नया इतिहास…

कुआलालंपुर (मलेशिया): भारत ने रविवार, 2 फरवरी को आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 9 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया। यह मुकाबला मलेशिया के बयूमास ओवल में खेला गया, जहां भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन के साथ लगातार दूसरी बार यह खिताब अपने नाम किया।

भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 82 पर समेटा
टॉस हारकर पहले गेंदबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने अपने शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन से दक्षिण अफ्रीका को केवल 82 रनों पर समेट दिया। भारतीय गेंदबाजों ने निरंतर दबाव बनाए रखते हुए अफ्रीकी टीम को विकेट दर विकेट गंवाने पर मजबूर किया।
गोंगाडी त्रिशा और सानिका चालके की नाबाद पारियों से मिली जीत
भारत को जीत के लिए 83 रन बनाने थे, जिसे टीम ने सिर्फ 11.2 ओवर में हासिल कर लिया। गोंगाडी त्रिशा ने नाबाद 44 रन बनाकर भारत को लक्ष्य के करीब पहुंचाया, जबकि सानिका चालके ने नाबाद 26 रन बनाकर भारत को एक आसान जीत दिलाई।
दूसरी बार चैंपियन बनी भारतीय टीम
निकी प्रसाद की कप्तानी में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने यह खिताब अपने नाम किया, और यह लगातार दूसरी बार था जब भारतीय टीम ने यह वर्ल्ड कप जीता। इससे पहले, 2023 में शेफाली वर्मा की कप्तानी में टीम इंडिया ने पहला आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप जीता था।
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Team India New T20 Captain 2026 : BCCI ने श्रेयस अय्यर को सौपी टीम इंडिया की कमान..
BCCI Named Shreyas Iyer Is The Team India New T20 Captain 2026
भारतीय क्रिकेट में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की एपेक्स काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक में आखिरकार वह फैसला ले लिया गया, जिसका क्रिकेट प्रेमी लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। आईपीएल के सबसे सफल कप्तानों में से एक और घरेलू क्रिकेट में ‘सरपंच साहब’ के नाम से मशहूर श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) को भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का नया टी20 अंतरराष्ट्रीय (T20I) कप्तान नियुक्त किया गया है।
यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब टीम इंडिया आगामी सीरीज और भविष्य के बड़े टूर्नामेंट्स के लिए एक मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व की तलाश कर रही थी। श्रेयस अय्यर को उनकी शानदार कप्तानी शैली, व्यक्तिगत प्रदर्शन और बेहतरीन टीम भावना का इनाम मिला है।
सूर्या की विदाई और कप्तानी का नया समीकरण
श्रेयस अय्यर से पहले भारतीय टी20 टीम की कमान स्टार बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव (SKY) के हाथों में थी। सूर्यकुमार यादव की अगुआई में भारत ने 2026 में टी20 का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया था। हालांकि, विश्व कप जीतने के बाद से ही सूर्या का व्यक्तिगत फॉर्म लगातार खराब दौर से गुजर रहा था। लगातार फ्लॉप होने की वजह से न सिर्फ उनकी कप्तानी पर सवाल उठ रहे थे, बल्कि 35 वर्षीय इस खिलाड़ी के लिए अब टीम में अपनी जगह बचाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
बीसीसीआई की एपेक्स काउंसिल ने भविष्य की योजनाओं और कार्यभार प्रबंधन (Workload Management) को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व परिवर्तन का कड़ा फैसला लिया। अब शनिवार को होने वाली चयनकर्ताओं और मुख्य कोच की अहम बैठक में श्रेयस अय्यर आधिकारिक तौर पर नए कप्तान के रूप में शामिल होंगे, जहां आगामी श्रृंखलाओं के लिए भारतीय टीम का चयन किया जाएगा।
आईपीएल में कप्तानी का लोहा मनवा चुके हैं ‘सरपंच’
श्रेयस अय्यर को कप्तानी सौंपने के पीछे सबसे बड़ी वजह उनका आईपीएल (IPL) में जबरदस्त नेतृत्व रिकॉर्ड रहा है। वे लीग के इतिहास में अलग-अलग फ्रेंचाइजी को अपनी रणनीति से सफलता दिलाने वाले गिने-चुने कप्तानों में शामिल हैं। उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स, कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और पंजाब किंग्स जैसी टीमों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है।
1. दिल्ली कैपिटल्स को पहली बार फाइनल में पहुंचाया
साल 2020 में श्रेयस अय्यर की कप्तानी में ही दिल्ली की टीम ने पहली बार आईपीएल के फाइनल का सफर तय किया था। हालांकि फाइनल में मुंबई इंडियंस के खिलाफ टीम को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन श्रेयस ने उस खिताबी मुकाबले में 50 गेंदों पर नाबाद 65 रनों की कप्तानी पारी खेलकर अपनी क्लास दिखाई थी। उस पूरे सीजन में उन्होंने 519 रन बनाए थे।
2. कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को बनाया चैंपियन
साल 2024 में श्रेयस अय्यर ने कोलकाता नाइट राइडर्स की कमान संभाली और टीम को तीसरी बार आईपीएल का चैंपियन बनाया। उनके नेतृत्व में केकेआर ने फाइनल में सनराइजर्स हैदराबाद को एकतरफा मुकाबले में 8 विकेट से करारी शिकस्त दी। इस सीजन में उन्होंने 147 के शानदार स्ट्राइक रेट से 351 रन बनाए और एक बेहतरीन ‘टीम मैन’ की भूमिका निभाई।
3. पंजाब किंग्स के साथ धमाकेदार प्रदर्शन
साल 2025 में पंजाब की फ्रेंचाइजी ने उन्हें अपना कप्तान बनाया। इस सीजन में श्रेयस ने बल्ले से तबाही मचाते हुए 6 अर्धशतकों और 175 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट के साथ 604 रन ठोक दिए। उनकी कप्तानी में पंजाब ने फाइनल तक का सफर तय किया। इसके बाद 2026 के सीजन में भी उन्होंने अपनी फॉर्म जारी रखी और 169 के स्ट्राइक रेट से 1 शतक और 5 अर्धशतक की मदद से 498 रन बनाए, हालांकि टीम अंक तालिका में पांचवें स्थान पर रही।
क्रिकेट दिग्गजों की नजर में अय्यर:
आईपीएल 2026 के दौरान श्रेयस अय्यर की फील्डिंग और बाउंड्री लाइन पर उनकी सूझबूझ की तारीफ सचिन तेंदुलकर और जोंटी रोड्स जैसे महान खिलाड़ियों ने की थी। मुंबई के खिलाफ एक मैच में बाउंड्री के बाहर जाते हुए अय्यर ने हवा में गेंद को अंदर फेंका, जिसे जेवियर बार्टलेट ने लपककर हार्दिक पांड्या को आउट किया। इस ‘टीम-कैच’ ने साबित कर दिया कि श्रेयस मैदान पर हर पल पूरी तरह मुस्तैद रहते हैं।
श्रेयस अय्यर के टी20 और अंतर्राष्ट्रीय आंकड़े
श्रेयस अय्यर केवल एक चतुर कप्तान ही नहीं हैं, बल्कि मिडिल ऑर्डर में भारतीय टीम की सबसे मजबूत रीढ़ की हड्डी भी हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है:
| फॉर्मेट | मैच | कुल रन | औसत / स्ट्राइक रेट | सर्वोच्च स्कोर | अर्धशतक / शतक |
| टी20 अंतरराष्ट्रीय (T20I) | 51 | 1104 | 136.00 (स्ट्राइक रेट) | 74* | 8 अर्धशतक |
| वनडे (ODI) | 76 | – | – | – | – |
| टेस्ट (Test) | 14 | – | – | – | – |
अय्यर के बचपन के कोच और पूर्व भारतीय क्रिकेटर प्रवीण आमरे हमेशा से उनकी नेतृत्व क्षमता के कायल रहे हैं। आमरे का मानना है कि श्रेयस एक बेहद ‘थिंकिंग क्रिकेटर’ (सोच-समझकर खेलने वाले खिलाड़ी) हैं और नंबर 3 या 4 पर बल्लेबाजी करते हुए वे मैच की परिस्थितियों को बहुत जल्दी भांप लेते हैं।
क्या है BCCI की एपेक्स काउंसिल और इसका काम?
टीम इंडिया के कप्तान का फैसला करने वाली बीसीसीआई की एपेक्स काउंसिल (Apex Council) क्रिकेट बोर्ड की सबसे बड़ी और प्रमुख प्रशासनिक समिति है। इसका मुख्य कार्य क्रिकेट की नीतियां बनाना, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दौरों की देखरेख करना और बोर्ड के वित्तीय तथा प्रशासनिक मामलों को संभालना होता है। इस काउंसिल में कुल 9 सदस्य होते हैं, जिसमें निर्वाचित पदाधिकारियों के अलावा एक सीएजी (CAG) प्रतिनिधि और भारतीय क्रिकेटर्स एसोसिएशन (ICA) के सदस्य शामिल होते हैं।
वर्तमान में इस महत्वपूर्ण काउंसिल की कमान निम्नलिखित पदाधिकारियों के हाथों में है:
- अध्यक्ष: मिथुन मन्हास
- उपाध्यक्ष: राजीव शुक्ला
- सचिव: देवजीत सैकिया
- संयुक्त सचिव: प्रभतेज भाटिया
- कोषाध्यक्ष: ए. रघुराम भट
- काउंसलर: जयदेव शाह
- CAG नॉमिनी: डी. जयशंकर
- ICA प्रतिनिधि: सुधा शाह (महिला) और वंकिना चामुंडेश्वरा नाथ (पुरुष)
नए कप्तान के सामने चुनौतियों का पहाड़: आगामी शेड्यूल
बतौर कप्तान श्रेयस अय्यर का सफर आसान नहीं होने वाला है। जून 2026 से लेकर जुलाई 2026 के बीच भारतीय टीम को लगातार कई महत्वपूर्ण और कड़े विदेशी दौरे करने हैं। नए कप्तान के सामने सबसे पहली चुनौती अपनी पसंदीदा कोर टीम तैयार करने की होगी।
भारतीय टीम का आगामी पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है:
1. भारत बनाम अफगानिस्तान सीरीज (जून 2026)
- 1 टेस्ट मैच: 6 जून से 10 जून 2026 (स्थान: भारत)
- 3 वनडे मैच: 13 जून से 20 जून 2026 (स्थान: भारत)
2. भारत बनाम आयरलैंड दौरा (जून 2026)
- 2 टी20 मैच: 26 जून से 28 जून 2026 (स्थान: आयरलैंड)
- श्रेयस अय्यर बतौर टी20 कप्तान इसी सीरीज से अपने नए सफर की शुरुआत कर सकते हैं।
3. भारत बनाम इंग्लैंड का कड़ा दौरा (जुलाई 2026)
- 5 टी20 मैच: 1 जुलाई से 11 जुलाई 2026 (स्थान: इंग्लैंड)
- 3 वनडे मैच: 14 जुलाई से 19 जुलाई 2026 (स्थान: इंग्लैंड)
इसके अलावा भारतीय टीम को इस साल एशियन गेम्स में भी हिस्सा लेना है, जहां टी20 फॉर्मेट में स्वर्ण पदक जीतने की जिम्मेदारी श्रेयस अय्यर के कंधों पर होगी।
निष्कर्ष: क्या अय्यर साबित होंगे गेम चेंजर?
रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों के टी20 से हटने के बाद भारतीय टी20 टीम एक बदलाव के दौर (Transition Phase) से गुजर रही है। सूर्यकुमार यादव ने निश्चित रूप से टीम को एक विश्व कप जिताया, लेकिन आधुनिक क्रिकेट में फॉर्म और उम्र को देखते हुए बोर्ड का यह फैसला भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
श्रेयस अय्यर के पास न सिर्फ दबाव की परिस्थितियों में बल्लेबाजी करने का अनुभव है, बल्कि आईपीएल में दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को एक साथ लेकर चलने का हुनर भी है। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि ‘सरपंच’ की यह नई पारी भारतीय टी20 टीम को अधिक आक्रामक, अनुशासित और निडर बनाएगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि आगामी आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर कप्तान श्रेयस अय्यर की ‘नई नीली सेना’ किस तरह का प्रदर्शन करती है।
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RBI Monetary Policy June 2026: अनिश्चित वैश्विक माहौल के बीच रेपो रेट 5.25% पर स्थिर; विकास दर का अनुमान घटाकर 6.6% किया गया..

RBI Monetary Policy June 2026 Overview
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू मोर्चे पर मौसम की अनिश्चितताओं के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी जून 2026 की त्रैमासिक समीक्षा बैठक के नतीजे घोषित कर दिए हैं। चालू वित्त वर्ष की इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय बैंक ने एक बार फिर सतर्क रुख अपनाते हुए नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में हुई छह सदस्यीय समिति की बैठक में सर्वसम्मति से रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर बरकरार रखने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही, मौद्रिक रुख (Policy Stance) को भी ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) बनाए रखा गया है। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट और अल नीनो (El Nino) के उभरते जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने आर्थिक विकास दर (GDP Growth) के अनुमान को घटा दिया है।
नीतिगत फैसले के मुख्य बिंदु (Key Directives)
आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए आरबीआई ने निम्नलिखित मुख्य घोषणाएं की हैं:
| संकेतक (Indicators) | वर्तमान स्थिति (June 2026) | पिछला रुख / अनुमान |
| रेपो रेट (Repo Rate) | 5.25% | 5.25% (यथावत) |
| पॉलिसी स्टांस (Stance) | न्यूट्रल (Neutral) | न्यूट्रल |
| FY27 जीडीपी ग्रोथ अनुमान | 6.6% | 6.9% (कटौती की गई) |
| FY27 खुदरा महंगाई अनुमान | 5.1% | 4.6% (बढ़ोतरी की गई) |
| विदेशी मुद्रा भंडार | $682.2 अरब | ऐतिहासिक रूप से मजबूत |
रेपो रेट को स्थिर रखने के पीछे का गणित
फरवरी 2025 में ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू होने के बाद से आरबीआई अब तक कुल 1.25% (125 बेसिस प्वाइंट) की कटौती कर चुका है। पिछली कटौतियों के बाद से रेपो दर 5.25% पर टिकी हुई है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भले ही घरेलू स्तर पर खुदरा महंगाई इस समय नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन की बाधाओं को देखते हुए दरों में और कटौती करना जोखिम भरा हो सकता था। केंद्रीय बैंक इस समय ‘रुको और देखो’ की रणनीति पर चल रहा है ताकि पिछली कटौतियों का असर बाजार में पूरी तरह से दिखाई दे सके।
जीडीपी (GDP) वृद्धि दर के अनुमान में गिरावट क्यों?
जून 2026 की इस नीतिगत समीक्षा में सबसे बड़ा बदलाव भारत की विकास दर के अनुमान में देखने को मिला है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है।
केंद्रीय बैंक ने इसके लिए मुख्य रूप से तीन बड़े जोखिमों को जिम्मेदार ठहराया है:
- पश्चिम एशिया संकट (Middle East Conflict): इस क्षेत्र में जारी तनाव के कारण वैश्विक माल ढुलाई (Freight Costs) और बीमा लागतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय निर्यात और आयात दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
- इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी: कच्चे तेल और अन्य औद्योगिक कमोडिटीज की कीमतों में अस्थिरता के चलते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत बढ़ रही है।
- कमजोर मानसून का साया: देश में अल नीनो (El Nino) की स्थितियां विकसित हो रही हैं। इसके कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून के असमान रहने की आशंका है, जो सीधे तौर पर कृषि उत्पादन और ग्रामीण इलाकों में मांग को प्रभावित कर सकता है।
आरबीआई के अनुमान के मुताबिक, आगामी तिमाहियों में जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार कुछ इस तरह रह सकती है:
- Q1 (अप्रैल-जून): 6.6%
- Q2 (जुलाई-सितंबर): 6.3%
- Q3 (अक्टूबर-दिसंबर): 6.5%
- Q4 (जनवरी-मार्च): 6.8%
महंगाई का मोर्चा: अनुमान में 50 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि
आरबीआई को खुदरा महंगाई (CPI Inflation) को 4% के दायरे में रखने का वैधानिक दायित्व मिला हुआ है। अप्रैल 2026 में यह आंकड़ा 3.48% पर था, जो संतोषजनक है। लेकिन थोक मूल्यों (WPI) और ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने केंद्रीय बैंक को सतर्क कर दिया है।
यही वजह है कि आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई के अनुमान को बढ़ाकर 5.1% कर दिया है, जो पहले के अनुमान से 0.50% अधिक है। त्योहारों के सीजन (तिमाही 3) में इसके 5.9% के उच्चतम स्तर पर पहुंचने की आशंका जताई गई है, जो आरबीआई की ऊपरी सीमा (6%) के बेहद करीब है।
रुपये की विनिमय दर और विदेशी पूंजी को बढ़ावा
हाल के महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) में देखे गए उतार-चढ़ाव पर गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक रुपये के किसी विशेष स्तर को लक्षित नहीं करता है। भारतीय मुद्रा का मूल्य बाजार की ताकतों द्वारा ही तय होता है। हालांकि, उन्होंने सट्टेबाजी के दबावों और अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
वर्तमान में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $682.2 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर है, जो 11 महीने से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। विदेशी पूंजी प्रवाह (Foreign Capital Flows) को और तेज करने के लिए आरबीआई ने दो बड़े नीतिगत सुधारों की घोषणा की है:
- सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) का दायरा बढ़ाना: फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत विदेशी निवेशकों के लिए अब 15, 30 और 40 वर्ष की लंबी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड्स को भी शामिल कर लिया गया है।
- रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) को बढ़ावा देने के लिए 13 सितंबर 2026 तक एक विशेष रियायती स्वैप सुविधा दी जाएगी।
आम जनता और रीयल एस्टेट सेक्टर पर प्रभाव
नीतिगत दरों में बदलाव न होने का सीधा मतलब है कि आम उपभोक्ताओं के होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि ब्याज दरों में स्थिरता से रीयल एस्टेट मार्केट में चल रही खरीदारी की रफ्तार बनी रहेगी। डेवलपर्स और बिल्डर्स ने भी इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे उनकी ऋण लागत स्थिर रहेगी और नए प्रोजेक्ट्स में निवेश को बल मिलेगा।
आर्थिक विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों का नजरिया
आरबीआई के इस कदम पर उद्योग जगत और अर्थशास्त्रियों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है:
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी के अनुसार, “वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए दरों को स्थिर रखना एक परिपक्व फैसला है। बाजार को पहले से ही इस बात का अंदेशा था और यह कदम बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी (तरलता) को संतुलित बनाए रखेगा।”
डीबीएस बैंक (DBS Bank) की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव ने अपनी रिपोर्ट में संकेत दिया है कि भले ही जून में दरों को नहीं बदला गया है, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जमीन तैयार हो रही है। यदि कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है और खुदरा महंगाई 5% को पार करती है, तो आगामी तिमाहियों में आरबीआई को दरों में 75 से 100 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
निष्कर्ष
आरबीआई मौद्रिक नीति जून 2026 के फैसलों से यह साफ झलकता है कि केंद्रीय बैंक इस समय त्वरित आर्थिक विकास की तुलना में व्यापक आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stability) को अधिक प्राथमिकता दे रहा है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए लगातार परीक्षा ले रही हैं।
वर्तमान में ब्याज दरों का न बढ़ना कॉर्पोरेट जगत और आम जनता दोनों के लिए फौरी राहत जरूर है, लेकिन विकास दर के अनुमान में की गई कटौती यह संकेत देती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को आने वाले दिनों में फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाना होगा। यदि आने वाले महीनों में वैश्विक हालात और नहीं बिगड़ते हैं, तभी देश इस संशोधित विकास लक्ष्य को हासिल करने में सफल हो पाएगा।
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बड़ी खबर : धामी सरकार ने बांटे दायित्व, इन नेताओं की हुई बल्ले बल्ले, जानें किसे क्या मिला ?

Uttarakhand Politics : धामी सरकार ने देर रात दायित्व बांटे हैं। उत्तराखंड सरकार ने विभिन्न परिषदों और आयोगों में नई नियुक्तियां करते हुए कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और पूर्व सैनिकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
Table of Contents
धामी सरकार ने बांटे दायित्व
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विभिन्न परिषदों और आयोगों में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं।
मंत्रिपरिषद अनुभाग द्वारा जारी आदेशों के अनुसार छह व्यक्तियों को अलग-अलग पदों पर नामित किया गया है। इन नियुक्तियों को संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इन नेताओं की हुई बल्ले बल्ले
पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल को सेतु आयोग में सलाहकार नियुक्त किया गया है, जबकि जोत सिंह बिष्ट को ग्रामीण अभियंत्रण सेवा परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है।

उत्तराखंड राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद में कैप्टन गम्भीर सिंह धामी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष और शमेशर सिंह बिष्ट को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ज्योति कोटिया और अभिषेक शाही को मिली ये जिम्मेदारी
गोरखा कल्याण परिषद में ज्योति कोटिया को अध्यक्ष और अभिषेक शाही को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सरकार की इन नियुक्तियों को विभिन्न सामाजिक वर्गों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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