Delhi
सरकार ने व्हाट्सएप और जीमेल पर संवेदनशील दस्तावेजों के आदान-प्रदान पर लगाई रोक !

नई दिल्ली: जम्मू और कश्मीर सरकार ने शनिवार को एक अहम आदेश जारी किया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों से संवेदनशील आधिकारिक दस्तावेजों को साझा करने के लिए थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप और जीमेल का इस्तेमाल न करने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किया गया है, और इसका उद्देश्य सुरक्षा उल्लंघनों और डेटा लीक के खतरे को कम करना है।
डेटा सुरक्षा में चिंता
आदेश में कहा गया कि व्हाट्सएप और जीमेल जैसे प्लेटफॉर्म्स सरकारी डेटा के आदान-प्रदान के लिए उचित सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते हैं। ये टूल्स संवेदनशील या गोपनीय डेटा के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं, और इनकी सुरक्षा प्रणाली सरकारी संचार की कठोर आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती। इससे सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा और अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
संवेदनशील दस्तावेजों के वर्गीकरण
संवेदनशील दस्तावेजों को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- टॉप सीक्रेट
- सीक्रेट
- कॉन्फिडेंशियल
- रिस्ट्रिक्टेड
आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि टॉप सीक्रेट और सीक्रेट दस्तावेजों को इंटरनेट पर साझा नहीं किया जाएगा। इन दस्तावेजों को केवल एक सुरक्षित नेटवर्क के माध्यम से साझा किया जा सकता है, जिसमें SAG-ग्रेड एन्क्रिप्शन लागू हो। वहीं कॉन्फिडेंशियल और रिस्ट्रिक्टेड दस्तावेजों को इंटरनेट पर तब ही साझा किया जा सकता है, जब AES 256-बिट एन्क्रिप्शन लागू हो।
गोपनीयता को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्लेटफॉर्म का प्रयोग
सरकार ने सुझाव दिया है कि गोपनीय और सीमित जानकारी के आदान-प्रदान के लिए सरकारी ईमेल सेवाओं या सरकारी इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स (जैसे सी-डैक का संवाद, एनआईसी का संदेश आदि) का इस्तेमाल किया जाए। इसके अतिरिक्त, विभागों को ई-ऑफिस सिस्टम का उपयोग करते समय उचित फायरवॉल और व्हाइटलिस्टेड आईपी एड्रेस का इस्तेमाल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर प्रतिबंध और घर से काम के निर्देश
सरकार ने टॉप सीक्रेट और सीक्रेट जानकारी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साझा करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, घर से काम करने वाले अधिकारियों को सुरक्षा-संबंधी डिवाइस (जैसे लैपटॉप, डेस्कटॉप) का इस्तेमाल करने और वीपीएन और फायरवॉल के माध्यम से कार्यालय सर्वर से जुड़ने का निर्देश दिया गया है।
गोपनीय मुद्दों पर चर्चा के दौरान डिजिटल असिस्टेंट से दूरी बनाए रखने का आदेश
आदेश में यह भी कहा गया कि डिजिटल असिस्टेंट डिवाइस जैसे अमेजन इको, एपल होमपॉड, गूगल होम आदि को गोपनीय मुद्दों पर चर्चा के दौरान कार्यालय से दूर रखा जाए।
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National
कौन है गांधी परिवार की होने वाली बहू अवीवा, जानें उनके बारे में सबकुछ…

गांधी–नेहरू परिवार में जश्न का माहौल, रेहान वाड्रा ने की Aviva Baig से सगाई
नई दिल्ली : गांधी–नेहरू परिवार में एक बार फिर खुशियों का माहौल देखने को मिल रहा है। कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi और उद्योगपति Robert Vadra के बेटे Raihan Vadra ने अपनी करीबी दोस्त Aviva Baig से सगाई कर ली है। यह सादगी भरा आयोजन एक निजी समारोह में संपन्न हुआ, जिसकी चर्चा अब सोशल मीडिया पर तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, रेहान वाड्रा ने अपनी लंबे समय से दोस्त रही Aviva Baig को जीवनसाथी बनने का प्रस्ताव दिया, जिसे अवीवा ने खुशी के साथ स्वीकार किया। बताया जा रहा है कि दोनों एक-दूसरे को करीब सात वर्षों से जानते हैं और दोनों परिवारों की सहमति के बाद इस रिश्ते को औपचारिक रूप दिया गया।
Table of Contents
कौन हैं अवीवा बेग?
Aviva Baig दिल्ली की रहने वाली हैं और उनका परिवार सामाजिक रूप से वाड्रा परिवार के काफी नजदीक माना जाता है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के प्रतिष्ठित मॉडर्न स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी से मीडिया कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की पढ़ाई की।

प्रोफेशनल पहचान: कैमरे से समाज की कहानियां
Aviva Baig पेशे से एक फोटोग्राफर और प्रोड्यूसर हैं। उनकी फोटोग्राफी को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। उनकी क्लिक की गई तस्वीरें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुकी हैं।
आर्ट एग्जिबिशन और क्रिएटिव सफर
Aviva Baig ने बीते कुछ वर्षों में कई चर्चित कला प्रदर्शनियों में हिस्सा लिया है।
- ‘You Cannot Miss This’ (इंडिया आर्ट फेयर, 2023)
- ‘The Illusory World’ (2019)
इन प्रदर्शनियों में उनके काम को कला समीक्षकों और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
सामाजिक मुद्दों से जुड़ाव
Aviva Baig की फोटोग्राफी केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है। वे अपने कैमरे के माध्यम से सामाजिक विषयों, मानवीय संवेदनाओं और जमीनी सच्चाइयों को सामने लाने का प्रयास करती हैं। उनका मानना है कि कला समाज में संवाद और बदलाव का माध्यम बन सकती है।


खेल, प्रकृति और यात्रा का शौक
बहुत कम लोग जानते हैं कि अवीवा राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्हें प्रकृति से खास लगाव है। वे अक्सर जंगलों, पहाड़ों और रेगिस्तानी इलाकों की यात्राएं करती हैं और अपने लेंस के जरिए अनकही कहानियों को कैद करती हैं। घूमना और नई जगहों को समझना उनके रचनात्मक सफर का अहम हिस्सा है।
रैहान वाड्रा: शिक्षा और करियर की संक्षिप्त प्रोफाइल
Raihan Vadra कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi और उद्योगपति Robert Vadra के बेटे हैं। भले ही वे देश के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार से आते हों, लेकिन रैहान वाड्रा ने अब तक खुद को राजनीति की सीधी सुर्खियों से दूर रखा है।
शिक्षा (Education)
रैहान वाड्रा की शुरुआती पढ़ाई भारत और विदेश दोनों जगहों पर हुई है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा प्रतिष्ठित निजी संस्थानों से पूरी की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विदेश का रुख किया, जहां उन्होंने लिबरल आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज से जुड़े विषयों में अध्ययन किया।
शिक्षा के दौरान उनकी रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय मामलों और सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों में बताई जाती है।
करियर और रुचियां (Career & Interests)
रैहान वाड्रा फिलहाल किसी सक्रिय राजनीतिक भूमिका में नहीं हैं। वे सार्वजनिक मंचों पर बहुत कम नजर आते हैं और अपनी निजी व पेशेवर जिंदगी को मीडिया से दूर रखना पसंद करते हैं।
हालांकि, वे अपनी मां प्रियंका गांधी के साथ कभी-कभी सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में दिखाई देते हैं, लेकिन इसे राजनीतिक एंट्री के तौर पर नहीं देखा जाता।
अलग रास्ते, लेकिन मजबूत रिश्ता

जहां रेहान वाड्रा अक्सर अपनी मां प्रियंका गांधी के साथ राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में नजर आते हैं, वहीं अवीवा बेग पूरी तरह अपनी रचनात्मक दुनिया में सक्रिय हैं। दोनों ने अलग-अलग क्षेत्रों में रहते हुए भी अपने रिश्ते को निजी और संतुलित बनाए रखा।
निष्कर्ष
रेहान वाड्रा और अवीवा बेग की सगाई ने एक बार फिर गांधी–नेहरू परिवार को सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि दोनों ही अपनी निजी जिंदगी को लाइमलाइट से दूर रखना पसंद करते हैं, लेकिन यह रिश्ता सादगी, आपसी समझ और वर्षों की दोस्ती पर आधारित माना जा रहा है।
आने वाले समय में इस नए रिश्ते से जुड़ी और जानकारी सामने आ सकती है, लेकिन फिलहाल परिवार में खुशियों की दस्तक ने सभी का ध्यान जरूर खींच लिया है।
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Sanchar Saathi : क्या है संचार साथी एप ?, जिसे लेकर देश में मचा घमासान, जानें कैसे करेगा काम

Sanchar Saathi : देश में बीते कुछ दिनों से संचार साथी एप को लेकर घमासान मचा हुआ है। सरकार जहां इसे हर मोबाइल में इंस्टॉल करवाना चाहती थी तो वहीं विपक्ष ने इसका पुरजोर विरोध किया। विपक्ष ने इसे केंद्र सरकार का जासूसी का एक तरीका बताया। देशभर में भारी विरोध के बाद सरकार ने Sanchar Saathi को प्री-इंस्टॉल करने का अपना फैसला वापस ले लिया है। जिसके बाद हर कोई ये जानना चाहता है कि ये एप क्या है और कैसे काम करेगा ?, तो आईए हम आपको देते हैं इसके बारे में हर जानकारी।
क्या है Sanchar Saathi एप ?
दूरसंचार विभाग के मुताबिक संचार साथी डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स की एक नागरिक केंद्रित पहल है। जिसका उद्देश्य मोबाइल सब्सक्राइबर्स को मजबूत बनाना, उनकी सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके साथ ही सरकार की नागरिक को लिए की जाने वाली पहलों के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी इसका मकसद है। आपको बता दें कि संचार साथी ऐप और वेब पोर्टल के रूप में उपलब्ध है। जो कि कीप योरसेल्फ अवेयर सुविधा एंड यूजर सिक्योरिटी, टेलीकॉम और इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर लेटेस्ट अपडेट के साथ जागरूकता सामग्री भी देता है।

संचार साथी को लेकर देश में मचा घमासान
आसान भाषा में बात करें तो संचार साथी को सरकार साइबर फ्रॉड से बचाने का एक टूल बता रही है। सरकार का कहना है कि अगर आपका फोन चोरी हो जाता है तो इस एप के जरिए फोन को आसानी से ट्रेक किया जा सकता है। इसके साथ ही ये एप इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी नंबर (आईएमईआई) के माध्यम से लोगों को मोबाइल हैंडसेट की वास्तविकता जांचने में भी सक्षम बनाता है। अगर आपको अपने साथ साइबर फ्रॉड होने का शक भी होता है तो आप इस एप पर रिपोर्ट कर सकते हैं।

लेकिन जहां एक ओर सरकार इसे बहुत ही फायदेमंद बता रही है तो वहीं विपक्ष इसे जासूसी का टूल बता रहा है। विपक्ष का कहना है कि संचार साथी के माध्यम से बीजेपी सरकार जासूसी करना चाहती है। बता दें कि सरकार ने संचार साथी को प्री-इंस्टॉल करने के साथ ही इसे डिसेबल या डिलीट ना करने का आदेश दिया था और इसी को लेकर विपक्ष सरकार को घेर रहा है। भारी विरोध के बाद आखिरकार सरकार को अपना कदम पीछे लेना पड़ा। केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन पर ‘संचार साथी’ एप के प्री-इंस्टॉलेशन (पहले से डाउनलोड) के फैसले को वापस ले लिया है।
अब तक 1.40 करोड़ कर चुके हैं डाउनलोड
प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता खत्म करने को लेकर दूरसंचार विभाग का बयान भी सामने आया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि संचार साथी एप की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए सरकार ने मोबाइल बनाने वाली कंपनी के लिए प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता खत्म कर दिया है। उनका कहना है कि बुधवार दोपहर 12 बजे तक 1.40 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं। दो दिन में अपनी मर्जी से एप डाउनलोड करने वालों की संख्या में 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि संचार साथी एप से जासूसी करना न तो संभव है, न ही जासूसी होगी।
Dehradun
उत्तराखंड को बड़ी सौगात, कृषि मंत्री गणेश जोशी के आग्रह पर जल्द राज्य में खुलेगी खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के टेस्टिंग लैब

कैबिनेट मंत्री जोशी ने किया नई दिल्ली में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा आयोजित बोर्ड ऑफ ट्रेड बैठक में प्रतिभाग
उत्तराखंड को बड़ी सौगात, कृषि मंत्री गणेश जोशी के आग्रह पर जल्द राज्य में खुलेगी खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के टेस्टिंग लैब
मंत्री जोशी ने केंद्रीय मंत्री का राज्य को टेस्टिंग लैब की स्वीकृति प्रदान करने के लिए जताया आभार
नई दिल्ली: कृषि एवं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने नई दिल्ली में वाणिज्य भवन में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित बोर्ड ऑफ ट्रेड बैठक में प्रतिभाग किया।
बैठक के दौरान कृषि एवं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने उत्तराखंड के निर्यात क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों को रखते हुए मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के परीक्षण के लिए एपिडा की परीक्षण प्रयोगशाला को उत्तराखंड में स्थापित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में ही जांच सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो कृषि उत्पादों की निर्यात गुणवत्ता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से अनुरोध करते हुए कहा कि राज्य में अभी तक विदेशी बाजारों में निर्यात होने वाले उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप जांच के लिए कोई उन्नत टेस्टिंग लैब उपलब्ध नहीं है। विशेष रूप से फल, सब्जी और अन्य खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के परीक्षण के लिए आधुनिक लैब न होने से निर्यात प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब होता है और किसानों व निर्यातकों को चंडीगढ़, लखनऊ, गाजियाबाद सहित अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की हानि होती है और प्रतिस्पर्धी बाजारों में उत्तराखंड के उत्पादों को अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी के इस अनुरोध को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बैठक में उपस्थित एपिडा अधिकारियों को तुरंत निर्देशित किया कि उत्तराखंड को आयात–निर्यात प्रक्रिया में आ रही कठिनाइयों को देखते हुए टेस्टिंग लैब की स्वीकृति प्रदान की जाए। मंत्री गणेश जोशी ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का आभार जताते हुए कहा कि इससे कृषक उत्पादों, विशेषकर फलों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा।
नई दिल्ली में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित बोर्ड ऑफ ट्रेड बैठक में मंत्री जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रतिनिधि के रूप में प्रतिभाग कर कहा कि राज्य में निर्यात प्रोत्साहन नीति 2021 लागू है, जिसका लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में निर्यात को 15,000 करोड़ से बढ़ाकर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। वर्तमान में उत्तराखंड से मुख्य रूप से फार्मा, प्लास्टिक, केमिकल एवं ऑटोमोबाइल उत्पादों का UAE, USA और सिंगापुर सहित अन्य देशों को निर्यात किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि पंतनगर और काशीपुर में दो ICD संचालित हैं तथा हरिद्वार में एक नया ICD निर्माणाधीन है। निर्यात नीति 2021 और लॉजिस्टिक नीति 2023 ने राज्य की निर्यात क्षमता को मजबूत आधार प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया अंब्रेला ब्रांड “हाउस ऑफ हिमालयास” उत्तराखंड के कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दे रहा है।
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