Bageshwar
बच्ची की मौत के बाद वन विभाग ने उठाए कदम, गुलदार हुआ कैद…

बागेश्वर: कांडा तहसील के अंतिम छोर पर स्थित औलानी गांव में हाल ही में एक दो वर्षीय मासूम बच्ची को गुलदार ने अपना निवाला बना लिया था। इस घटना के बाद वन विभाग ने गांव में ट्रैप कैमरे, पिंजरे, और फोर्स ट्रैकुलाइज गन एक्स्पर्ट रेस्क्यू टीम की तैनाती की थी।
शनिवार शाम को रेस्क्यू टीम को नरगोली गांव में एक गाय पर गुलदार के हमले की सूचना मिली। रेस्क्यू टीम के प्रभारी डॉ. हिमांशु पांगती ने तत्परता दिखाते हुए रात्रि प्राथमिक विद्यालय में मोर्चाबंदी की और मात्र एक घंटे के भीतर गुलदार को ट्रैकुलाइज कर पिंजरे में कैद कर दिया।
हालांकि, औलानी और नरगोली गांव की महिलाओं ने इस गुलदार को वही मानने से इंकार कर दिया, जिसने बच्ची को बचाने में मदद की थी। इस घटना ने ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल और बढ़ा दिया है।
प्रभागीय वनाधिकारी बागेश्वर, ध्रुव मर्तोलिया ने जानकारी दी कि गुलदार के सैम्पलिंग की जा रही है। यदि पुष्टि होती है कि यह वही गुलदार है, तो आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अन्यथा, रेस्क्यू टीम सहित सभी संसाधन गांव में बने रहेंगे। उन्होंने ग्रामीणों से धैर्य और सावधानी बरतने की अपील की है।
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J&K में आतंकियों से मठभेड़ में उत्तराखंड का लाल शहीद, आज घर लाया जाएगा पार्थिव शरीर

Bageshwar News : जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में उत्तराखंड के बागेश्वर का लाल शहीद हो गया। उनका पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक गांव लाया जाएगा।
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आतंकियों से मठभेड़ में बागेश्वर का लाल शहीद
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में उत्तराखंड के Bageshwar निवासी जवान शहीद हो गए। मिली जानकारी के मुताबिक बागेश्वर जिले के कपकोट के बीथी निवासी गजेंद्र सिंह गढ़िया तंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में बलिदान हो गए। उनका पार्थिव शरीर आज कपकोट लाया जाएगा।
टू-पैरा कमांडो में तैनात थे शहीद गजेंद्र सिंह गढ़िया
बता दें कि शहीद गजेंद्र सिंह गढ़िया टू-पैरा कमांडो में तैनात थे। रविवार को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकियों की तलाश में चलाए जा रहे संयुक्त अभियान ऑपरेशन त्राशी में वो भी शामिल थे। इस ऑपरेशन के दौरान छात्रू क्षेत्र के सुदूर-सिंहपोरा में आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला किया। इसी हमले में हवलदार गजेंद्र शहीद हो गए।

केदारेश्वर मैदान में लाया जाएगा पार्थिव शरीर
मिली जानकारी के मुताबिक बलिदानी गजेंद्र सिंह गढ़िया अपने पीछे पिता धन सिंह गढि़या, माता चंद्रा देवी गढि़या, पत्नी लीला गढि़या और दो बच्चे राहुल गढि़या और धीरज गढि़या को छोड़ गए हैं। इस खबर के बाद से उनकी पत्नी बेसुध हैं और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार बलिदानी गजेंद्र सिंह गढ़िया का पार्थिव शरीर आज हेलीकॉप्टर के माध्यम से Bageshwar के कपकोट के केदारेश्वर मैदान में लाया जाएगा। जबकि सरयू-खीरगंगा नदी के संगम पर सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
Uttarakhand
बागेश्वर में SARRA की अहम बैठक, गरुड़ गंगा समेत जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर जोर

Bageshwar: स्प्रिंग व रिवर रीजुविनेशन को लेकर SARRA की अहम बैठक सम्पन्न
मुख्य बिंदु
बागेश्वर (Bageshwar): उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में कलेक्ट्रेट सभागार में स्प्रिंग एवं रिवर रीजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) की बैठक आयोजित की गई। जिसमें प्राचीन नौलों, धारों और नदियों के संरक्षण-संवर्धन, भू-जल स्तर में सुधार तथा प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर चर्चा हुई।
गरुड़ गंगा नदी के पुनर्जीवन के लिए तैयार किया जाएगा प्रस्ताव
बैठक में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने भागीरथ ऐप पर चिन्हित क्रिटिकल जल स्रोतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी पुनरुद्धार के निर्देश दिए। साथ ही गरुड़ गंगा नदी के पुनर्जीवन हेतु विस्तृत और व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार की लिए कहा।
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वैज्ञानिक सर्वे और लोकज्ञान से जल स्रोतों को मिलेगा नया जीवन: डीएम
जिलाधिकारी ने कहा कि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विस्तृत सर्वे बेहद जरुरी है। जिसमें आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ-साथ स्थानीय बुजुर्गों और अनुभवी व्यक्तियों के ज्ञान और अनुभव को भी शामिल किया जाना चाहिए। जिससे जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति का सटीक विश्लेषण किया जा सके और योजनाएं अधिक प्रभावी बनें।
SARRA से जुड़े सभी विभागों को समन्वय मजबूत करने को कहा
उन्होंने SARRA से जुड़े सभी विभागों को आपसी समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए। और कहा कि अगले 15 दिनों के अंदर गरुड़ गंगा सहित अन्य महत्वपूर्ण जल स्रोतों के संरक्षण से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएं।
योजना के अंतर्गत कम जलधारा वाले स्रोतों को चिन्हित कर उनके पुनर्जीवन के लिए व्यापक पौधरोपण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग (जल संचयन) एवं अन्य वैज्ञानिक उपाय अपनाए जाएंगे, जिससे भविष्य में पेयजल संकट से प्रभावी रूप से निपटा जा सके।
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Uttarakhand
ठण्ड से बचने के लिए जलाई अंगीठी, 2 साल की मासूम समेत चार लोग बेहोश

BAGESHWAR NEWS : अंगीठी के धुंए से चार लोग बेहोश, अस्पताल में चल रहा इलाज
मुख्य बिंदु
BAGESHWAR NEWS: उत्तराखंड में बढ़ती ठण्ड के प्रकोप से बचने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में लोग आग का सहारा ले रहे हैं। लेकिन कई बार यही आग लापरवाही के कारण जान जोखिम में डाल देती है। ताजा मामला बागेश्वर के दाड़िमठौक गांव से सामने आया है जहाँ पर घर के अंदर अंगीठी की गैस से एक ही परिवार के चार सदस्य बेहोश हो गए हैं।
BAGESHWAR में अंगीठी के धुंए से चार लोग बेहोश
दरअसल, बागेश्वर कोतवाली के दाड़िमठौक गांव में घर के अंदर एक परिवार ने ठण्ड से बचने के लिए अंगीठी जलाई थी। जिसके बाद उन्होंने घर के सभी खिड़की दरवाजे बंद कर दिए थे। जिस से परिवार के चार लोग बेहोश हो गए जिनमें एक बच्ची भी शामिल थी। चारों लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना का पता सुबह दूध लेने वाली महिला की वजह से चला, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
कोतवाल अनिल उपाध्याय ने बताया कि
शुक्रवार सुबह 112 पर गुनाकोट ग्राम पंचायत के तेवाड़ीगांव, दाड़िमठौक तोक से चार लोगों को गैस लगने की खबर मिली थी। जिसके बाद तत्काल 112 टीम और एम्बुलेंस को मौके के लिए रावण किया गया। मौके पर पहुंचकर गैस लगने से प्रभावित चारों लोगों को एम्बुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया। अंगीठी के धुंए से बेहोश होने वालों के नाम –
- नवीन चंद्र तिवारी (62)
- विमला तिवारी (55)
- बबीता तिवारी (24)
- पोती काव्या (02)
सुबह जलाई थी अंगीठी में आग
पुलिस के मुताबिक, सुबह करीब चार बजे कमरे में अंगीठी जलाई गई थी। इसके बाद जब आग बुझ गई तो खिड़की और दरवाजे बंद कर दिए गए। इसी बीच अंगीठी में बचे कोयलों से उठी गैस फैल गई और जिसके बाद चारों लोग बेहोश हो गए। फिर जब सुबह उजाला हुआ तो रोज की तरह दूध देने पहुंची गांव की महिला खष्टी देवी ने घर का दरवाजा बाहर से बंद देखा। उसने काफी देर तक इन्तजार किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसी दौरान बबीता वहां पहुंची और दरवाजा खोला, जिसके बाद वो भी बेहोश हो गई। तुरंत महिला ने गांव वालों को इसकी सूचना दी और ग्रामीणों ने बिना देरी किए पुलिस को खबर दी।
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