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ज्योतिर्मठ को लेकर अब नही है कोई विवाद, किसी को भी लिखित में नही बनाया शंकराचार्य – स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराज।

जोशीमठ/चमोली – ज्योतिर्मठ को लेकर कोई विवाद नहीं है। पहले विचारधाराओं का विवाद था, लेकिन स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के बाद अब पीठ पर कोई विवाद नहीं है। यह बात स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराज ने ज्योतिर्मठ में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कही।

कहा, स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने किसी को भी लिखित में शंकराचार्य नहीं बनाया है। अयोध्या में राम मंदिर को लेकर कहा, वह मंदिर नहीं, बल्कि रामलला का निवास स्थान है। मंदिर किसी दूसरी जगह हो सकता है, लेकिन यह उनका घर है। घर बनाने में जितनी जगह बन जाती है उतने में ही प्रवेश हो जाता है। बाद में धीरे-धीरे निर्माण होता रहता है।
कहा, उत्तराखंड के चारोंधामों में यात्रियों से ज्यादा पर्यटक आ रहे हैं। पहले जो यात्री आते थे वे तपस्वी होते थे, अब पर्यटन के नजरिए से लोग आ रहे हैं। कहा, धर्मयात्रा को टूरिज्म बना दिया गया है। इस मौके पर तीर्थ पुरोहित ऋषि प्रसाद सती आदि मौजूद रहे।
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Badrinath Dham के पास कंचन गंगा के ऊपर अचानक टूटा हिमखंड, मचा हड़कंप, देखें पूरी खबर

Chamoli News : बढ़ते तापमान का असर अब पहाड़ी क्षेत्रों में भी साफ दिखाई देने लगा है। गर्मी बढ़ने के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में जमी बर्फ और हिमखंड तेजी से पिघल रहे हैं। इसी क्रम में आज कंचनगंगा क्षेत्र के ऊपर एक हिमखंड टूटकर नीचे आ गया।
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Badrinath Dham के पास कंचन गंगा के ऊपर अचानक टूटा हिमखंड
बद्रीनाथ धाम में यात्रा के दौरान सुबह कंचन गंगा क्षेत्र के ऊपर अचानक एक हिमखंड टूटने की घटना सामने आई। घटना के बाद कुछ समय के लिए यात्रियों और स्थानीय लोगों में हलचल का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना से किसी प्रकार की जनहानि या अन्य नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

तापमान बढ़ने के साथ बर्फ पिघलने के कारण टूट रहे हिमखंड
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों के मौसम में तापमान बढ़ने के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जमी बर्फ तेजी से पिघलने लगती है। इसी प्रक्रिया के कारण कई बार हिमखंड खिसकने या टूटने की घटनाएं सामने आती हैं।
पहाड़ी इलाकों में यह एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया मानी जाती है और हर वर्ष इस तरह की घटनाएं देखने को मिलती हैं। फिलहाल स्थिति पूरी तरह सामान्य बताई जा रही है।
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लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के विधि-विधानपूर्व खुले कपाट, विशेष पूजा-अर्चना के बाद भगवान लक्ष्मण को लगाया गया भोग
Chamoli News : लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट आज विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार सुबह 11:15 बजे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए।
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लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के विधि-विधानपूर्व खुले कपाट
लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट आज विधि-विधानपूर्व खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने से पहले पूलना गांव के ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की और भगवान लक्ष्मण को भोग अर्पित किया। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ यात्रा से जुड़े कार्यक्रम संपन्न हुए।
कल खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट
गोविंदघाट से पंच प्यारों की अगुवाई में श्रद्धालुओं का पहला जत्था हेमकुंड साहिब के लिए रवाना होने की तैयारी में है। वहीं 23 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे, जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

बुधवार को ऋषिकेश से रवाना हुआ पहला जत्था
बुधवार को ऋषिकेश से रवाना हुआ पहला जत्था गुरुवार को गोविंदघाट पहुंचा। हेमकुंड साहिब यात्रा को लेकर गोविंदघाट और गुरुद्वारा परिसर को आकर्षक फूलों से सजाया गया है। यात्रा मार्ग को सुगम बनाने के लिए सेना के जवान पहले ही आस्था पथ से बर्फ हटाकर रास्ता साफ कर चुके हैं।
शुक्रवार सुबह अरदास के बाद श्रद्धालुओं का जत्था हेमकुंड साहिब के लिए आगे रवाना हुआ। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है।
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चमोली में आग बुझाते-बुझाते खाई में गिरा फायर वाचर, मौत से मचा हड़कंप, लोगों में भारी आक्रोश

Chamoli News : चमोली जिले में जंगल की आग बुझाने के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। आग पर काबू पाने के लिए गए एक फायर वाचर की मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
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जंगल की आग बुझाते हुए फायर वॉचर की खाई में गिरकर मौत
चमोली से दुखद खबर सामने आ रही है। यहां जंगल की आग बुझाते हुए एक फायर वॉचर की खाई में गिरकर मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार बुधवार रात बेड़ूबगढ़-बिरही क्षेत्र में बदरीनाथ हाईवे के पास स्थित चीड़ के जंगल में अचानक आग लग गई थी। आग तेजी से फैलने लगी, जिसके बाद वन विभाग की ओर से आग बुझाने के लिए टीम को मौके पर भेजा गया।
फायर वाचर की मौत से मचा हड़कंप
बताया जा रहा है कि पाखी जलगवाड़ गांव निवासी 42 वर्षीय राजेंद्र सिंह नेगी भी आग बुझाने वाली टीम का हिस्सा थे। वन विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर कुल 15 कर्मियों की टीम प्रभावित क्षेत्र में पहुंची और आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास शुरू किया।

काफी मशक्कत के बाद देर शाम तक आग को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया। इसके बाद टीम के अन्य सदस्य वापस हाईवे तक पहुंच गए, लेकिन राजेंद्र सिंह नेगी वहां नहीं पहुंचे। उनके नहीं मिलने पर साथियों ने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
70 मीटर नीचे खाई में मिला शव
सूचना मिलने के बाद प्रशासन और पुलिस को मामले से अवगत कराया गया। इसके बाद रातभर खोजबीन अभियान चलाया गया। गुरुवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान राजेंद्र सिंह नेगी का शव घटनास्थल से करीब 70 मीटर नीचे खाई में मिला।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग की चपेट में आने के बाद वह संतुलन खो बैठे और गहरी खाई में गिर गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों और विभागीय कर्मचारियों में शोक का माहौल है। मामले की जांच की जा रही है।
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