Chamoli
भगवान बदरीनाथ का चतुर्भुज स्वरूप काली शिला धीरे-धीरे बदल रही अपना स्वरूप, उभर रही आकृतियां, अंत में यही होंगे दर्शन

चमोली – उत्तराखंड के पंच बदरी में से एक भविष्य बदरी में भगवान बदरीनाथ का चतुर्भुज स्वरूप काली शिला पर धीरे-धीरे आकार लेने लगा है। इस शिला पर पहले फूलों की माला तक नहीं टिकती थी, लेकिन अब धीरे-धीरे शिला पर माला व शृंगार सामग्री भी अटकने लगी है। शिला के इर्दगिर्द अन्य आकृतियां भी उभर रही हैं।

समुद्र तल से 2744 मीटर की ऊंचाई पर देवदार और सुराई के घने जंगल के बीच भविष्य बदरी का प्राचीन मंदिर स्थित है। नंदादेवी पर्वत शृंखला की तलहटी में स्थित भविष्य बदरी मंदिर के कपाट भी बदरीनाथ धाम के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए खोेल दिए जाते हैं।
तपोवन के संदीप नौटियाल ने बताया कि मंदिर में पहले एक शिला आकृति थी, जो धीरे-धीरे अपना स्वरूप बदल रही है। उन्होंने बताया कि वह पिछले 20 साल से भविष्य बदरी के दर्शन कर रहे हैं और लगातार शिला के स्वरूप में परिवर्तन देख रहे हैं।


बदरीनाथ धाम में भगवान विष्णु योग मुद्रा में विराजमान हैं, जबकि भविष्य बदरी में चतुर्भुज स्वरूप उभर रहा है। बदरीनाथ की तरह ही भविष्य बदरी में भी शिला पर प्रतिदिन अभिषेक के बाद तिल के तेल का लेपन किया जाता है। इसके बाद तुलसी माला, दुपट्टा, फूल माला और जनेऊ का शृंगार किया जाता है। तपोवन के पंडित संदीप नौटियाल का कहना है कि भविष्य बदरी मंदिर का प्रचार-प्रसार अभी कम होने के चलते श्रद्धालुओं की संख्या भी कम ही रहती है। उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से भविष्य बदरी के दर्शनों को पहुंचने की अपील की है।

बदरीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि केदारखंड के स्कंद पुराण में लिखा है कि कलियुग के अंत में बदरीनाथ धाम का रास्ता बंद हो जाएगा, तब भविष्य बदरी में बदरीनाथ के दर्शन होंगे। वे कहते हैं कि पुराणों में यह भी लिखा है कि जोशीमठ में जब तक नृसिंह भगवान विराजमान हैं, तब तक बदरीनाथ के दर्शन होंगे। लोक मान्यता है कि बदरीनाथ धाम के मार्ग में स्थित जय-विजय पर्वत आपस में मिलकर एक हो जाएंगे, जिसके बाद बदरीनाथ क्षेत्र अगम्य (रास्ता बंद) हो जाएगा।

जोशीमठ से मलारी हाईवे पर 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तपोवन बाजार से भविष्य बदरी के लिए सड़क मार्ग निकलता है। रिंगी और सुभाई गांव से होते हुए 13 किलोमीटर तक वाहन से और करीब एक किमी पैदल दूरी तय कर भविष्य बदरी मंदिर पहुंचा जाता है। यहां ठहरने और खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। तपोवन और जोशीमठ में रात्रि प्रवास व खाने की पर्याप्त सुविधा है।
Uttarakhand
गोपेश्वर में बस की चपेट में आई स्कूटी सवार महिला, हादसे में दर्दनाक मौत
Chamoli: गोपेश्वर में दर्दनाक सड़क हादसा, स्कूटी सवार महिला की मौत
मुख्य बिन्दु
चमोली (Chamoli): उत्तराखंड के चमोली जिले से एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है. जहां पर स्कूटी से घर जा रही एक महिला बस की चपेट में आ गई. इस हादसे में महिला की दर्दनाक मौत हो गई.
गोपेश्वर में दर्दनाक सड़क हादसा, महिला की मौत
मिली जानकारी के मुताबिक, चमोली जिले के गोपेश्वर के ग्वीलों बैंड के पास स्कूटी सवार महिला बस की चपेट में आ गई. स्थानीय लोगों ने तत्काल महिला को अस्पताल पहुँचाया लेकिन तब तक महिला दम तोड़ चुकी थी. घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
महिला की पहचान
- मंजू देवी (35 वर्ष) पत्नी भरत सिंह नेगी, निवासी- ईरानी हाल कोठियालसैंण, चमोली
पुलिस की हिरासत में बस चालक
इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है. वहीँ, हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके से बस चालक को हिरासत में ले लिया है. बस चालक से पूछताछ की जा रही है. साथ ही घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है.
Chamoli
चमोली जिले में स्कूली छात्रों पर सरिया से हमला, एक के सिर पर आए 14 टांके

Chamoli: गणतंत्र दिवस परेड से घर लौट रहे छात्रों पर गंभीर हमला, दो छात्र हुए घायल
मुख्य बिंदु
चमोली (Chamoli): देवभूमि उत्तराखंड को एक शांत पहाड़ी राज्य के रूप में जाना जाता है. मगर अब यहाँ पर पहाड़ी जिलों में भी लगातार अपराधिक घटनाएँ बदती जा रही हैं . ताजा मामला चमोली जिले से सामने आया है . जहाँ पर पीपलकोटी में दो स्कूली छात्रों पर कुछ लोगों ने लोहे की रॉड से हमला किया .
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चमोली जिले में स्कूली छात्रों पर गंभीर हमला
दरअसल, पूरा मामला चमोली जिले के पीपलकोटि से सामने आया है . जहाँ पर स्कूल की छुट्टी होने पर घर जा रहे दो छात्रों पर रस्ते में कुछ युवकों ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया .जानकारी के मुताबिक दोनों छात्र पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज पीपलकोटी में पढ़ते हैं जो गणतंत्र दिवस परेड के बाद घर जा रहे थे. रास्ते में पीपलकोटी ग्रेफ कैंप के पास कुछ युवकों ने छात्रों पर जानलेवा हमला किया .
हमले में एक के सिर पर चोट लगने से 14 टांके
हमले के बाद स्थानीय लोगों ने दोनों घायलों को विवेकानंद धर्मार्थ अस्पताल पहुंचाया. दोनों छात्रों के सिर पर गहरी चोट आई है. एक छात्र के सर पर गंभीर चोट आने से 14 टांके लगे हैं . दोनों छात्रों को इलाज के बाद घर भेज दिया गया है . लेकिन घटना ने माता-पिता की टेंशन बढ़ा दी है .
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परिजनों ने पुलिस को तहरीर सौंपकर कार्रवाई की मांग की
साथ ही मामले में छात्रों के परिजनों की ओर से पुलिस को तहरीर सौंपी गई है. जिसमें तीन लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं . परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. साथ ही परिजनों ने इस तरह की घटना को लेकर चिंता जताई है.
पुलिस ने दोनों छात्रों के बयान दर्ज कर लिए हैं. पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है.“- पूनम खत्री, रिपोर्टिंग चौकी प्रभारी पीपलकोटी
Chamoli
इस दिन खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट… वसंत पंचमी पर की गई घोषणा

Badrinath Opening Date 2026: वसंत पंचमी के दिन हुई कपाट खुलने की तिथि की आधिकारिक घोषणा
मुख्य बिंदु
Badrinath Opening Date 2026: साल 2026 में चारधाम यात्रा की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। वसंत पंचमी के पावन अवसर पर गाडू घड़ा पूजन संपन्न होने के बाद बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की आधिकारिक तिथि की घोषणा कर दी गई है। ये घोषणा हर वर्ष की तरह पारंपरिक धार्मिक विधियों के तहत की गई, जिससे यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।
परंपरा के अनुसार हुई तिथि की घोषणा
इससे पहले डिम्मर गांव से डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के सदस्य गाडू घड़ा लेकर ऋषिकेश के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद वसंत पंचमी के दिन पुजारी गाडू घड़ा के साथ नरेंद्रनगर स्थित राजदरबार पहुंचे। यहां परंपरागत पंचांग पूजा के बाद विधि-विधान से भगवान बदरीविशाल धाम के कपाटोद्घाटन की तिथि घोषित की गई।
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23 अप्रैल को खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट
घोषणा के मुताबिक, भगवान बदरीविशाल के कपाट 23 अप्रैल 2026 को ब्रह्म काल मुहूर्त में सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वहीं, गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा की शुरुआत 7 अप्रैल से होगी, जो बदरीनाथ धाम की धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा मानी जाती है।
डिम्मर गांव से शुरू हुई गाडू घड़ा यात्रा
इससे पहले डिम्मर गांव स्थित श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। गांव के पुजारी और आचार्यों ने भगवान का महाभिषेक कर बाल भोग अर्पित किया। इसके बाद गाडू घड़ा को मंदिर की परिक्रमा कराई गई और भगवान बदरीविशाल के जयघोष के साथ यात्रा ऋषिकेश के लिए रवाना हुई। इसी धार्मिक क्रम में आगे चलकर कपाट खुलने की तिथि की औपचारिक घोषणा संपन्न हुई।
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