Uttarakhand
उत्तरकाशी: मस्जिद विवाद का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, मुस्लिम समुदाय ने सुरक्षा की अपील…

उत्तरकाशी: उत्तरकाशी शहर में मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब नैनीताल हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मुस्लिम समुदाय के लोग इस मस्जिद को अवैध बताए जाने का विरोध करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाए हैं। उनका कहना है कि जिस मस्जिद को अवैध करार दिया जा रहा है, वह पूरी तरह से वैध है और इसके खिलाफ उठाए गए आरोप गलत हैं।
हाईकोर्ट में दायर की अपील
मुस्लिम समुदाय के इश्तियाक अहमद, अनवर बेग, नासिर शेख और नसीर खान ने बताया कि उन्होंने हाल ही में हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें उन्होंने मस्जिद को सुरक्षा देने की मांग की है। उनका कहना है कि इस मस्जिद की जमीन की रजिस्ट्री से लेकर दाखिला खारिज जैसे सभी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं, जिन्हें वे पहले भी जिला प्रशासन को सौंप चुके हैं। मस्जिद के खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई आधार नहीं है, क्योंकि यह मस्जिद 1982 के नगर पालिका अभिलेखों के साथ-साथ 1986 में वक्फ बोर्ड उत्तर प्रदेश में भी दर्ज है। वर्तमान में यह उत्तराखंड वक्फ बोर्ड देहरादून के अंतर्गत आती है।
विश्व हिंदू परिषद और देवभूमि विचार मंच का विरोध
हाल ही में विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर देवभूमि विचार मंच ने मस्जिद के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। 25 नवंबर को तहसील स्तर पर ज्ञापन सौंपने और 1 दिसंबर को महापंचायत का आयोजन करने की योजना बनाई गई है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मस्जिद को लेकर जन जागरूकता फैलाना है।
संयुक्त सनातन धर्म रक्षक संघ का विरोध
संयुक्त सनातन धर्म रक्षक संघ ने मस्जिद के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। संघ का कहना है कि यह मस्जिद नहीं, बल्कि अवैध निर्माण है। संघ ने बीते 24 अक्टूबर को मस्जिद के खिलाफ जनाक्रोश रैली का आयोजन किया था, जिसमें प्रदर्शनकारी पुलिस के तय मार्ग को छोड़कर दूसरे मार्ग से जाने पर अड़े थे। इस गतिरोध के बाद पथराव और लाठीचार्ज की घटना घटी, जिसमें पुलिस के 9 जवानों समेत 27 लोग घायल हुए थे। इस बवाल के बाद 8 नामजद और 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, और तीन मुख्य आयोजकों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जांच की घोषणा
उत्तरकाशी दौरे पर आए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विवाद की जांच करवाने की बात कही थी, लेकिन विवाद अभी तक शांत नहीं हो पाया है। अब देखना यह है कि हाईकोर्ट में दायर की गई अपील और सरकारी कार्रवाई के बाद यह मामला किस दिशा में बढ़ता है।
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Pithoragarh
बड़ी खबर : डीडीहाट में युवक की हत्या से सनसनी, सड़क के किनारे खून ले लथपथ मिला शव

Pithoragarh News : पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट क्षेत्र में एक युवक का संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। युवक सड़क किनारे गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा मिला था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में पुलिस ने हत्या की आशंका जताई है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
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डीडीहाट में युवक की हत्या से सनसनी
पुलिस के अनुसार, सोमवार देर रात दूनाकोट मार्ग पर कफलवा बैंड के पास से गुजर रहे लोगों ने एक युवक को खून से लथपथ हालत में सड़क किनारे पड़ा देखा। इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और 108 एंबुलेंस की मदद से युवक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सड़क के किनारे खून ले लथपथ मिला शव
मृतक की पहचान भूपेंद्र सिंह चौहान (37) निवासी हुनेरा के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि युवक के सिर और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं, जिससे प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है। घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम ने पहुंचकर साक्ष्य भी जुटाए हैं।

मां की शिकायत पर हत्या का मुकदमा दर्ज
मृतक की मां ने पुलिस को दी गई तहरीर में एक वाहन चालक पर हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनका बेटा घर से डीडीहाट बाजार गया था और शाम के समय एक वाहन चालक के साथ वापस लौट रहा था। आरोप है कि रास्ते में उसके साथ घटना हुई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने नामजद वाहन चालक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर साक्ष्य जुटा रही है।
मामले की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है। फोरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
Dehradun
SIR के पहले चरण के बाद उत्तराखंड में ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी, 19 लाख मतदाताओं को जारी होगा नोटिस

Uttarakhand News : उत्तराखंड में एसआईआर का पहला चरण पूरा हो गया है। जिसके बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई है। जिसमें कुल 71,33,785 मतदाता शामिल हैं।
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SIR के पहले चरण के बाद उत्तराखंड में ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों के कम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ बीवीआरसी पुरुषोत्तम के नेतृत्व में उत्तराखण्ड में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के प्रथम चरण पूर्ण होने के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची का दिनांक 14 जुलाई 2026 को प्रकाशन कर दिया गया है।
71,33,785 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ विजय कुमार जोगदंडे ने मंगलवार को मीडिया सेंटर में प्रेस कांफ्रेंस कर विस्तृत जानकारी दी। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि एसआईआर के प्रथम चरण पूर्ण होने के बाद प्रदेश में 71,33,785 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए गए हैं।
प्रदेश में मतदान केंद्रों की संख्या 11733 से हुई 12543
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर एसआईआर प्रक्रिया संपादित की जा रही है। प्रदेश में 8 जून से 7 जुलाई तक गणना पत्रों के वितरण और डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण किया गया। उन्होंने बताया कि पूर्व में 11733 मतदान केंद्रों के सापेक्ष वर्तमान में मतदान केंद्रों की संख्या 12543 हो गई है।
15 सितंबर को जारी की जाएगी अंतिम मतदाता सूची
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि आयोग द्वारा मतदाता को 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 के बीच फार्म 6,7 और 8 पर दावे एवं आपत्तियों को दर्ज करने का समय दिया गया है। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई से 11 सितंबर 2026 तक नोटिस की अवधि और दावे आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा।

19 लाख मतदाताओं को जारी किए जाएंगे नोटिस
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल 71,33,785 मतदाताओं में से लगभग 19 लाख मतदाताओं में विभिन्न प्रकार की विसंगति प्राप्त हुई जिन्हें सम्बंधित ईआरओ/एईआरओ द्वारा नोटिस जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नोटिस की सुनावाई के लिए न्याय पंचायत स्तर पर कल्सटर में कैंम्प लगाए जाएंगे, इसके साथ ही मैदानी क्षेत्र के मतदाताओं की सुविधा के लिए तहसील के अतरिक्त नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड लेवल पर कैंप लगाने के भी निर्देश डीईओ / ईआरओ को दिए गए हैं।
फार्म 6 भरकर मतदाता सूची में दर्ज करवा सकते हैं नाम
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि ऐसे नागरिक जिनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है वे फार्म 6 भरकर अपने नाम दर्ज करवाने हेतु ऑफलाइन मोड में अपने सम्बंधित बीएलओ से और ऑनलाइन मोड में ईसीआईनेट ऐप के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही फार्म 7 आरै 8 के जरिए नाम हटवाने और नाम में सुधार किया जा सकता है। वर्तमान में फार्म 6 और 8 के साथ एनेक्चर 4 भरना अनिवार्य है।
निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य दस्तावेजों की सूची
- किसी भी केंद्रीय सरकार/राज्य सरकार/पीएसयू के नियमित कर्मचारी/पेंशनभोगी को जारी कोई भी पहचान पत्र/पेंशन भुगतान आदेश।
- 01.07.1987 से पूर्व भारत में सरकार / स्थानीय प्राधिकारी/बैंक/डाकघर/एलआईसी/पीएसयू द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र/प्रमाण पत्र/दस्तावेज ।
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र।
- पासपोर्ट ।
- मान्यता प्राप्त बोर्ड / विश्वविद्यालयों द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन / शैक्षिक प्रमाण पत्र।
- सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र।
- वन अधिकार प्रमाण पत्र।
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी/एससी/एसटी या किसी भी जाति का प्रमाण पत्र।
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहाँ कहीं अस्तित्व में हो)।
- राज्य/स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार परिवार रजिस्टर।
- सरकार द्वारा जारी कोई भी भूमि/मकान आवंटन प्रमाण पत्र ।
- आधार के संबंध में, आयोग के निर्देश, पत्र संख्या 23/2025-ERS/Vol-II दिनांक 09.09.2025 के माध्यम से जारी, लागू होंगे।
Rishikesh
ऋषिकेश फोरलेन के लिए चली आरी, आज काटे गए 100 पेड़, रो पड़े पर्यावरण प्रेमी

Rishikesh News : भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना के तहत जैसे ही पेड़ों की कटाई दोबारा शुरू हुई, मौके पर भावुक माहौल बन गया। कई वर्षों से खड़े पेड़ एक-एक कर गिरते रहे और उन्हें बचाने की मांग कर रहे पर्यावरण प्रेमी व स्थानीय लोग मायूस नजर आए।
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ऋषिकेश फोरलेन के लिए चली आरी, आज काटे गए 100 पेड़
भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना के लिए चार दिन के अंतराल के बाद सोमवार को दोबारा पेड़ों का कटान शुरू कर दिया गया। किसी भी तरह के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया था। हल्के विरोध और प्रदर्शन के बीच पहले दिन करीब 100 पेड़ों की कटाई की गई।
पेड़ों के कटते ही रो पड़े पर्यावरण प्रेमी
फोरलेन परियोजना के तहत 3,000 से अधिक संरक्षित पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। इस निर्णय का पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग लगातार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की बलि नहीं दी जानी चाहिए और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

पिछले सप्ताह विरोध के चलते रोक दिया था काम
पिछले सप्ताह विरोध-प्रदर्शन के चलते पेड़ों का कटान अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। हालांकि सोमवार को वन निगम और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पुलिस सुरक्षा के बीच दोबारा कटाई का कार्य शुरू कराया। इस दौरान कुछ लोगों ने विरोध दर्ज कराया, लेकिन प्रशासन की मौजूदगी में कटान की प्रक्रिया जारी रही।परियोजना को लेकर क्षेत्र में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस लगातार जारी है।
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