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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय अकादमी के समापन समारोह को किया संबोधित।
देहरादून/मसूरी – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी में सिविल सेवा के 97वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह को संबोधित किया।

प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जब वह उन्हें संबोधित कर रही थीं, तो उनकी स्मृति में सरदार बल्लभ भाई पटेल के शब्द गूंज रहे थे। अप्रैल 1947 में सरदार पटेल ने आई.ए.एस. प्रशिक्षुओं के एक बैच से मिलते समय कहा था कि ‘‘ हमें उम्मीद करनी चाहिए और हमें अधिकार है कि हम हर सिविल सेवक से सर्वश्रेष्ठ की अपेक्षा करें, चाहे वह किसी भी जिम्मेदारी के पद पर हो। ’’ राष्ट्रपति ने कहा कि आज हम गर्व से कह सकते है कि लोक सेवक इन अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस फाउंडेशन कोर्स का मूल मंत्र ‘‘ मैं नहीं, हम हैं ’’। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कोर्स के प्रशिक्षु अधिकारी सामूहिक भावना के साथ देश को आगे ले जाने की जिम्मेदारी उठाएंगे। उन्होंने कहा कि उनमें से कई आने वाले 10-15 वर्षों तक देश के एक बड़े हिस्से का प्रशासन चलाएंगे और जनता से जुड़ेंगे। वे अपने सपनों के भारत को एक ठोस आकार दे सकते हैं।

अकादमी के आदर्श वाक्य ’शीलम परम भूषणम’ का उल्लेख करते हुए, जिसका अर्थ है ’चरित्र सबसे बड़ा गुण है’, राष्ट्रपति ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण की पद्धति कर्म-योग के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें चरित्र का बहुत महत्व है। उन्होंने सलाह दी कि प्रशिक्षु अधिकारियों को समाज के वंचित वर्ग के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ’गुमनामी’, ’क्षमता’ और ’आत्मसंयम’ एक सिविल सेवक के आभूषण हैं। ये गुण उन्हें पूरी सेवा अवधि के दौरान आत्मविश्वास देंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान अधिकारी प्रशिक्षुओं ने जो मूल्य सीखे हैं, उन्हें सैद्धांतिक दायरे तक सीमित नहीं रखना चाहिए। देश के लोगों के लिए काम करते हुए उन्हें कई चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में उन्हें इन मूल्यों का पालन करते हुए पूरे विश्वास के साथ काम करना होगा। भारत को प्रगति और विकास के पथ पर अग्रसर करना तथा देश की जनता के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करना उनका संवैधानिक कर्तव्य के साथ-साथ नैतिक दायित्व भी है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के हित के लिए कोई भी कार्य कुशलतापूर्वक तभी पूरा किया जा सकता है जब सभी हितधारकों को साथ लिया जाए। जब अधिकारी समाज के हाशिए पर पड़े और वंचित वर्ग को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेंगे तो निश्चय ही वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि सुशासन समय की मांग है। सुशासन का अभाव हमारी अनेक सामाजिक और आर्थिक समस्याओं की जड़ है। लोगों की समस्याओं को समझने के लिए आम लोगों से जुड़ना जरूरी है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को लोगों से जुड़ने के लिए विनम्र होने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तभी वे उनसे बातचीत कर पाएगें और उनकी जरूरतों को समझ सकेंगे और उनकी बेहतरी के लिए काम कर सकेंगे। सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने का दायित्व भी आपको निभाना हैं।

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि पूरी दुनिया इन मुद्दों से जूझ रही है। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे भविष्य को बचाने के लिए पर्यावरण संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को पूरी तरह से लागू करने में मददगार बने।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की आजादी के अमृत काल में 97वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के अधिकारी सिविल सेवाओं में प्रवेश कर रहे हैं। अगले 25 वर्षों में, वे देश के सर्वांगीण विकास के लिए नीति-निर्माण और उसके कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस संबंध में राष्ट्रपति ने अकादमी में आज उद्घाटन किए गए ’वाक वे ऑफ सर्विस’ का जिक्र करते हुए कहा कि जहां हर साल, अधिकारी प्रशिक्षुओं द्वारा निर्धारित राष्ट्र निर्माण लक्ष्यों को टाइम कैप्सूल में रखा जाएगा, राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपने द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को हमेशा याद रखें और उन्हें प्राप्त करने के लिये समर्पित रहें। उन्होंने कहा कि जब वे वर्ष 2047 में टाइम कैप्सूल खोलेंगे, तो उन्हें अपने लक्ष्य को पूरा करने पर गर्व और संतोष होगा।

राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों के इस बैच में 133 बेटियां के शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे देश के सर्वांगीण विकास के लिए महिलाओं और पुरूषों दोनों का योगदान महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विशेषकर बेटियों से अपील की कि अपनी सेवा के दौरान वह जहां भी रहे, लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते रहें। जब हमारी बेटियाँ विभिन्न क्षेत्रों में आगे आएंगी तो हमारा देश और समाज सशक्त बनेगा।

राष्ट्रपति ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के पूर्व और वर्तमान अधिकारियों की देश के प्रतिभाशाली लोगों को सक्षम सिविल सेवकों में ढालने में उनके महान समर्पण और कड़ी मेहनत के लिए सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अकादमी के नए छात्रावास ब्लॉक और मैस, एरिना पोलो फील्ड सहित आज उद्घाटन की गई सुविधाओं से प्रशिक्षु अधिकारियों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि “पर्वतमाला हिमालयन एंड नॉर्थ ईस्ट आउटडोर लर्निंग एरिना“, जिसका निर्माण आज शुरू हो गया है, हिमालय और भारत के उत्तर-पूर्व क्षेत्र के बारे में सिविल सेवकों और प्रशिक्षुओं के लिए एक ज्ञान आधार के रूप में कार्य करेगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्वारा प्रशिक्षण के दौरान सराहनीय एवं बेहतर कार्य व्यवहार वाले प्रशिक्षु अधिकारियों को सम्मानित भी किया।

इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी परिसर में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल की मूर्तियों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा अकादमी परिसर में स्थापित पोलो ग्राउंड के उन्नयन एवं पोलो एरिना, अकादमी कर्तव्य पथ, अकादमी अमृत टेलीमेडिसिन परामर्श सेवा केन्द्र एवं मोनेस्टी परिसर तथा वॉक-वे ऑफ सर्विस का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति द्वारा पर्वतमाला हिमालय एवं पूर्वोत्तर आउटडोर लर्निंग एरिना का भी शिलान्यास किया गया। इन योजनाओं के सम्बन्ध में अकादमी निदेशक द्वारा राष्ट्रपति को विस्तार से जानकारी भी दी गई।
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Agnipath Yojna 2026: अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी! देखें लेटेस्ट अपडेट…

Agnipath Yojna 2026 Latest Updates
भारतीय सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) में युवाओं की भर्ती के लिए शुरू की गई अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) एक बार फिर देश भर में चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई है। साल 2022 में शुरू हुई इस क्रांतिकारी योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर साल 2026 के अंत तक अपना 4 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। इसी बीच, रक्षा गलियारों से अग्निवीरों के भविष्य को लेकर कई बड़ी और सकारात्मक खबरें सामने आ रही हैं, जो इस योजना का स्वरूप बदल सकती हैं।
यदि आप भी भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा का जज्बा रखते हैं या अग्निवीर भर्ती 2026 की तैयारी कर रहे हैं, तो यह विस्तृत और व्यापक लेख आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं अग्निपथ योजना क्या है, इसकी चयन प्रक्रिया, सैलरी स्ट्रक्चर, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ और 2026 में इसमें होने वाले बड़े बदलावों के बारे में।
Table of Contents
1. अग्निपथ योजना क्या है? (What is Agnipath Yojna?)
अग्निपथ योजना भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा 14 जून 2022 को शुरू की गई एक अल्पकालिक सैन्य भर्ती प्रणाली है। इसके तहत देश के युवाओं को 4 साल की अवधि के लिए भारतीय थल सेना (Indian Army), नौसेना (Indian Navy) और वायु सेना (Indian Air Force) में सेवा करने का अवसर मिलता है। इस योजना के माध्यम से सेना में भर्ती होने वाले जवानों को ‘अग्निवीर’ (Agniveers) के नाम से जाना जाता है।
सरकार का इस योजना को लाने के पीछे मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के प्रोफाइल को और अधिक युवा (Youthful Profile) बनाना, औसत आयु को 32 वर्ष से घटाकर 26 वर्ष करना और सेना को आधुनिक तकनीकों (जैसे ड्रोन, एआई, और डिजिटल युद्ध प्रणालियों) से लैस करना है।
2. साल 2026 में सबसे बड़ा बदलाव: क्या 25% से ज्यादा जवान होंगे परमानेंट?
अग्निपथ योजना के मूल नियमों के अनुसार, 4 साल की सेवा पूरी होने के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थायी कैडर (15 साल की नियमित सेवा के लिए) में बरकरार रखा जाना था, जबकि शेष 75 प्रतिशत को सेवामुक्त कर दिया जाना तय था।
लेकिन वर्ष 2026 में सबसे बड़ी ‘गुड न्यूज’ यह आ रही है कि तीनों सेनाओं ने परिचालन आवश्यकताओं और जमीनी अनुभवों के आधार पर इस रिटेंशन दर (Retention Rate) को बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है:
- भारतीय नौसेना (Indian Navy): तकनीकी और विशिष्ट कार्यप्रणाली को देखते हुए नौसेना लगभग 75 प्रतिशत तक अग्निवीरों को स्थायी रूप से बनाए रखने की मांग कर रही है।
- थल सेना और वायु सेना (Army & IAF): दोनों सेनाएं वर्तमान 25% की सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने के पक्ष में हैं।
ऐसा क्यों किया जा रहा है?
सेना के अधिकारियों का मानना है कि पिछले 4 वर्षों में अग्निवीरों ने कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया है, कई बड़े अभियानों में हिस्सा लिया है और आधुनिक हथियारों का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया है। ऐसे में पूरी तरह से प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम इन जवानों को केवल 4 साल बाद बाहर करना व्यावहारिक नहीं होगा। अधिक रिटेंशन से सेना के पास अनुभवी सैनिकों का एक मजबूत पूल हमेशा उपलब्ध रहेगा।
3. अग्निवीर पात्रता और चयन प्रक्रिया 2026 (Eligibility & Selection Process)
यदि आप अग्निपथ योजना के तहत आवेदन करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित योग्यताओं को पूरा करना आवश्यक है:
पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria):
- आयु सीमा: उम्मीदवार की आयु 17.5 वर्ष से 21 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- शैक्षणिक योग्यता: पदों के अनुसार (जैसे जनरल ड्यूटी, टेक्निकल, क्लर्क आदि) उम्मीदवार का 10वीं या 12वीं पास होना अनिवार्य है।
- लिंग: इस योजना के तहत पुरुष और महिला दोनों उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं।
चयन प्रक्रिया के चरण:
- केंद्रीयकृत ऑनलाइन परीक्षा (CEE): सबसे पहले उम्मीदवारों को कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा पास करनी होती है।
- शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) और मापन (PMT): लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को दौड़, बीम, और अन्य शारीरिक परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।
- चिकित्सीय परीक्षण (Medical Test): अंतिम चरण में पूर्ण चिकित्सा जांच की जाती है, जिसके बाद मेरिट लिस्ट जारी होती है।
4. अग्निवीर सैलरी और ‘सेवा निधि’ पैकेज (Salary Structure & Seva Nidhi)
अग्निवीरों को 4 साल की सेवा के दौरान एक आकर्षक और कस्टमाइज्ड मासिक पैकेज दिया जाता है, जो हर साल बढ़ता है। इसके साथ ही उन्हें रिस्क और हार्डशिप अलाउंस भी मिलता है।
| वर्ष | मासिक वेतन (Gross Salary) | इन-हैंड सैलरी (70%) | अग्निवीर कॉर्पस फंड (30%) |
| प्रथम वर्ष | ₹30,000 | ₹21,000 | ₹9,000 |
| द्वितीय वर्ष | ₹33,000 | ₹23,100 | ₹9,900 |
| तृतीय वर्ष | ₹36,500 | ₹25,550 | ₹10,950 |
| चतुर्थ वर्ष | ₹40,000 | ₹28,000 | ₹12,000 |
सेवा निधि पैकेज (Seva Nidhi Package):
अग्निवीर के वेतन से जो 30% हिस्सा काटा जाता है, उतना ही योगदान (Matching Contribution) भारत सरकार भी देती है। 4 साल की अवधि समाप्त होने पर, संचित ब्याज सहित प्रत्येक अग्निवीर को लगभग ₹11.71 लाख का एकमुश्त ‘सेवा निधि’ पैकेज दिया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी राशि पूरी तरह से आयकर (Income Tax) से मुक्त होती है।
5. जीवन सुरक्षा और अन्य वित्तीय लाभ
अग्निपथ योजना के तहत जवानों की सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है:
- गैर-अंशदायी जीवन बीमा: सेवा अवधि के दौरान अग्निवीरों को ₹48 लाख का मुफ्त जीवन बीमा कवर मिलता है।
- ड्यूटी के दौरान शहादत पर: यदि कोई अग्निवीर सेवा के दौरान शहीद होता है, तो उसके परिवार को ₹1 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता (सेवा निधि और गैर-सेवा अवधि का वेतन मिलाकर) दी जाती है।
- दिव्यांगता की स्थिति में: ड्यूटी के दौरान अक्षमता की गंभीरता के आधार पर ₹44 लाख तक की अनुग्रह राशि का प्रावधान है।
6. 4 साल बाद क्या हैं करियर के विकल्प? (Future Opportunities)
जो 75% या 50% अग्निवीर (नए नियमों के आधार पर) 4 साल बाद सेवामुक्त होंगे, उन्हें समाज में पुनर्वास के लिए कई तरह के विशेष अवसर दिए जा रहे हैं:
- सुरक्षा बलों में आरक्षण: गृह मंत्रालय (MHA) ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) जैसे BSF, CISF, CRPF और असम राइफल्स में पूर्व-अग्निवीरों के लिए 10% रिक्तियां आरक्षित की हैं।
- राज्य पुलिस में प्राथमिकता: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे कई राज्यों ने अपनी पुलिस और संबद्ध सेवाओं की भर्तियों में पूर्व-अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की घोषणा की है।
- कॉर्पोरेट और बैंक लोन: कई बड़ी निजी कंपनियों (जैसे टाटा, महिंद्रा) ने पूर्व-अग्निवीरों को नौकरी देने की इच्छा जताई है। इसके अलावा, जो युवा अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें बैंक ‘सेवा निधि’ के आधार पर प्राथमिकता से लोन प्रदान करते हैं।
- शैक्षणिक डिग्री: रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के समन्वय से पूर्व-अग्निवीरों के लिए विशेष डिप्लोमा और ग्रेजुएशन क्रेडिट सिस्टम तैयार किया गया है, ताकि वे अपनी आगे की पढ़ाई आसानी से पूरी कर सकें।
निष्कर्ष (Conclusion)
अग्निपथ योजना 2026 न केवल भारतीय सेना को अत्याधुनिक और युवा बना रही है, बल्कि देश के युवाओं के लिए करियर के नए द्वार भी खोल रही है। वर्ष 2026 में सेना द्वारा रिटेंशन रेट (स्थायी होने की सीमा) को 25% से बढ़ाकर 50% या 75% करने की मांग ने युवाओं के बीच इस योजना के प्रति आकर्षण और भरोसे को और मजबूत कर दिया है। यदि आप अनुशासित जीवन, देश सेवा और एक सुरक्षित वित्तीय भविष्य की चाह रखते हैं, तो अग्निपथ योजना आपके सपनों को उड़ान देने का एक बेहतरीन माध्यम है।
अस्वीकरण: यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक सूचनाओं के विश्लेषण पर आधारित है। भर्ती की सटीक तारीखों और नियमों में बदलाव की अंतिम पुष्टि के लिए हमेशा भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट (joinindianarmy.nic.in) पर जाएँ।
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एक रील और 1 साल पुरानी चोरी का राज बेनकाब!, सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह से ने पहुंचाया जेल

Dehradun News : देहरादून के जाखन इलाके से चोरी का ऐसा मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह ने एक साल पुरानी चोरी का राज खोल दिया।
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एक रील और 1 साल पुरानी चोरी का राज बेनकाब !
देहरादून के जाखन की रहने वाली नितीशा वत्स के फ्लैट से करीब एक साल पहले दो डायमंड की अंगूठियां, एक सोने की चेन और डायमंड हार्ट पेंडेंट रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे।
उन्हें शुरू से अपनी घरेलू सहायिका विमला देवी पर शक था, लेकिन सबूत न होने के कारण वे कुछ नहीं कर पा रही थीं। लेकिन कहते हैं, अपराधी कोई न कोई गलती जरूर करता है। इस मामले में भी यही हुआ।
सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह से ने पहुंचाया जेल
हाल ही में नितीशा सोशल मीडिया देख रही थीं, तभी उनकी नजर विमला देवी के व्हाट्सएप स्टेटस और इंस्टाग्राम रील पर पड़ी। वीडियो में विमला के गले में वही चोरी हुई सोने की चेन और डायमंड हार्ट पेंडेंट साफ दिखाई दे रहे थे। रील बनाकर दिखावा करने की कोशिश में वो खुद ही अपने खिलाफ सबसे बड़ा सबूत छोड़ बैठी।

डिजिटल सबूतों की जांच में जुटी पुलिस
इसके बाद नितीशा ने बिना देर किए रील के स्क्रीनशॉट सुरक्षित किए। गहनों के बिल जुटाए और राजपुर थाने में शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी नौकरानी को गिरफ्तार कर लिया है। अब पुलिस आरोपी तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया से मिले इन डिजिटल सबूतों की भी जांच कर रही है।
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मुनकटिया में पत्थर गिरने से केदारनाथ पैदल मार्ग बाधित, अस्थाई रूप से रोकी गई केदारनाथ यात्रा

Kedarnath Yatra Update : प्रदेश में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। जिसके चलते पहाड़ों पर जमकर बारिश हो रही है। बारिश के कारण केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भूस्खलन हो गया। जिस कारण केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
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मुनकटिया में पत्थर गिरने से केदारनाथ पैदल मार्ग बाधित
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर गुरुवार सुबह सोनप्रयाग और मुनकटिया के बीच पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरने की घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पैदल यात्रा कुछ समय के लिए रोक दी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मार्ग पर आवाजाही फिलहाल बंद कर दी गई है।
अस्थाई रूप से रोकी गई केदारनाथ यात्रा
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि सुबह संबंधित अधिकारियों से मुनकटिया क्षेत्र में पहाड़ी से पत्थर गिरने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही संबंधित विभाग की टीमें जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गईं और मार्ग पर गिरे मलबे व बड़े पत्थरों को हटाने का कार्य शुरू कर दिया।

यात्रियों से अफवाहों पर ध्यान ना देने की अपील
प्रशासन का कहना है कि रास्ते का पूरी तरह निरीक्षण कर उसे सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही श्रद्धालुओं की आवाजाही दोबारा शुरू की जाएगी। अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक अपडेट का इंतजार करें और सुरक्षा संबंधी सभी निर्देशों का पालन करें।
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