Politics
मौलाना तौकीर का बयान: छेड़ोगे तो दंगा भी न करे… सीएम धामी की सम्पति से होनी चाहिए हल्द्वानी में हुए नुकसान की भरपाई।

बरेली/उत्तरप्रदेश – बरेली में आईएमसी (इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने कहा कि जुल्म और ज्यादती की हद हो गई है। अगर हुकूमत दंगा-फसाद कराना चाहती है तो हम तैयार हैं। शुक्रवार को बिहारीपुर करोलान स्थित संगठन के एक पदाधिकारी के आवास पर मौलाना मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि हमें बहुत छेड़ा गया है, अब छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल पर पाबंदी लगाने की मांग भी की।

मौलाना ने कहा कि प्रदर्शन में आ रहे उनके समर्थकों को जगह-जगह रोका गया। उनमें खौफ पैदा करने की कोशिश की गई। यह जुल्म और ज्यादती है। हम गिरफ्तारी का एलान कर हुकूमत को यह दिखाना चाहते थे कि हमें परेशान न करो। हमारे सब्र का लावा फटेगा तो ठीक नहीं होगा। यह प्रदर्शन भी इसीलिए था कि प्रेशर कुकर की तरह जो गैस भर चुकी है, उसे बाइपास कर दिया जाए। हमने सेफ्टी वॉल्व का काम किया है, क्योंकि हम अमन चाहते हैं।
मौलाना ने कहा कि मुसलमानों से नफरत क्यों करते हो। हिंदुस्तान की रग में मुसलमान बसा हुआ है। नसों से खून खींच दोगे तो बचेगा क्या? उन्होंने मुफ्ती सलमान अजहरी को रिहा करने की मांग भी उठाई।
मौलाना ने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देखा कि मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र सिंह मोदी ने गुजरात में दंगा कराया, वह प्रधानमंत्री बन गए। इसी लिए धामी भी सोच रहे हैं कि वह भी प्रधानमंत्री बन जाएं। वहां जिन लोगों का नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई धामी की संपत्ति से की जाए। सुप्रीम कोर्ट को बुलडोजर के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। देश में अमन बनाए रखना है तो बुलडोजर को रोकना जरूरी है।
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नमामि गंगे की ऑडिट रिपोर्ट को लेकर गरमाई सियासत, कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन मे लगाए गंभीर आरोप

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड विधानसभा में नमामि गंगे की ऑडिट रिपोर्ट को लेकर सियासत गरमा गई है। रिपोर्ट में गंगा सफाई और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की मॉनिटरिंग और गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष सरकार पर आंकड़ों की बाजीगरी का आरोप लगा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि यह रिपोर्ट ही बताती है कि मॉनिटरिंग सिस्टम लगातार काम कर रहा है।
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नमामि गंगे की ऑडिट रिपोर्ट को लेकर गरमाई सियासत
नमामि गंगे योजना की शुरुआत साल 2014 से केंद्र सरकार ने गंगा की सफाई और संरक्षण के लिए की थी। इस मिशन के तहत गंगा में गिरने वाले सीवर को रोकने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, घाटों का विकास और नदी के पानी को प्रदूषण रहित करना था। इसके लिए हजारों करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसकी ऑडिट रिपोर्ट जैसे ही विधानसभा पटल पर रखी गई जिसको लेकर अब विधानसभा में सवाल खड़े हो गए हैं।
कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने सरकार को घेरते हुए कहा कि नमामि गंगे की ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में कई जगह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की मॉनिटरिंग तय मानकों के अनुसार नहीं हो पाई। रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि कई एसटीपी में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं हुआ और जिन लैब्स से पानी की जांच कराई जा रही है उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे हैं।

हरिद्वार में गंगा का जल अभी भी बी श्रेणी में दर्ज
रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि कुछ स्थानों पर गंगा के जल की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और हरिद्वार में गंगा का जल अभी भी बी श्रेणी में दर्ज किया गया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार गंगा की सफाई को लेकर केवल आंकड़ों की बाजीगरी कर रही है, जबकि जमीनी हालात अलग हैं।
सरकार गंगा की स्वच्छता को लेकर गंभीर – विधायक मुन्ना सिंह चौहान
वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया है। बीजेपी विधायक मुन्ना सिंह चौहान का कहना है कि ऑडिट रिपोर्ट का मतलब यही है कि मॉनिटरिंग सिस्टम सक्रिय है और लगातार एसटीपी की जांच की जा रही है। उनका कहना है कि जब भी कोई रिपोर्ट सामने आती है तो उसी के आधार पर सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है और सरकार गंगा की स्वच्छता को लेकर गंभीर है।
Haridwar
गैरसैंण बजट को लेकर हंगामा, कांग्रेस ने धामी सरकार पर लगाए भ्रष्टाचार का आरोप

Uttarakhand News: गैरसैंण में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्त मंत्री के तौर पर बजट पेश किया। सरकार इसे संतुलित बता रही है, लेकिन विपक्ष ने शुरू से ही जोरदार विरोध जताया है।
गैरसैंण में पेश किए गए बजट को लेकर हंगामा
उत्तराखंड में नौ मार्च से बजट सत्र की शुरूआत हो गई है। बजट सत्र के पहले ही दिन बजट पेश किया गया। जो कि राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बजट है। लेकिन कांग्रेस ने इसे लेकर विरोध शुरू कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि इसमें आम जनता के लिए कुछ भी नहीं है।
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कांग्रेस ने तो राज्यपाल अभिभाषण के ठीक बाद बजट पेश करने पर भी सवाल उठाए गए। हरिद्वार में प्रदेश प्रवक्ता आलोक शर्मा ने पत्रकार वार्ता कर पेश किए गए बजट को लेकर सवाल उठाए हैं।
सरकार उत्तराखंड के लोगों को रखना चाहती है धोखे में
गैरसैंण विधानसभा सत्र की शुरुआत ही हंगामे से हुई। कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान ‘गवर्नर गो बैक’ के नारे लगाए और वेल में उतर आए। सत्र की छोटी अवधि, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विरोध जताया गया।

कुछ विधायकों ने वॉकआउट भी किया। पेश किए गए बजट को लेकर हरिद्वार में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आलोक शर्मा ने पत्रकार वार्ता की जिसमें उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार उत्तराखंड के लोगों को धोखे में रखना चाहती है।
कांग्रेस ने धामी सरकार पर लगाए भ्रष्टाचार का आरोप
सरकार अपने मुखिया धामी का चेहरा चमकाने पर लगभग 1000 करोड रुपए विज्ञापन तो खर्च कर रही है लेकिन उत्तराखंड के विकास के लिए असलियत में धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है।
उन्होंने हरिद्वार के भाजपा विधायक मदन कौशिक और आदेश चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दोनों विधायक अपनी सरकार के सामने मौन हो जाते हैं और हरिद्वार के विकास के लिए उनके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकलता यह सरकार झूठी बेईमान और भ्रष्ट सरकार है।
Chamoli
भराड़ीसैंण में कांग्रेसी विधायकों का जोरदार प्रदर्शन, सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग, देखें वीडियो

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड सरकार का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है। सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए। कांग्रेसी विधायकों ने बजट सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की है।
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भराड़ीसैंण में कांग्रेसी विधायकों का जोरदार प्रदर्शन
भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन पहुंचे विपक्ष के सभी विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में हाथ में तख्ती लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया, इस दौरान सभी विपक्ष के विधायक विधानसभा की सीढ़ियों पर ही बैठ गए।
कांग्रेसी विधायकों की सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग
विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने कहा कि सरकार विपक्ष के सवालों से बचना चाहती है इसलिए सत्र की अवधि कम की गई है। उन्होंने राज्यपाल गुरमीत सिंह के अभिभाषण के तुरंत बाद बजट पेश करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ये राज्यपाल के प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।

पहली बार अभिभाषण के दिन ही हो रहा बजट पेश
कांग्रेसियों का कहना है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब अभिभाषण के दिन ही बजट पेश किया जा रहा है। कहा कि बजट सत्र कम से कम 20 से 22 दिन का होना चाहिए। नियमावली में एक साल में सत्र 60 दिन चलना चाहिए, लेकिन इन चार वर्षों में सत्र केवल 32 दिन ही चल पाया है।
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