health and life style
क्या आप भी हैं सफेद बालों से परेशान, तो इन उपायों को अपनाएं और पाएं काले बाल

पुरुष हों या महिलाएं सभी लोगों में काले घने बालों की चाहत होती है। आजकल कम उम्र के लोग भी सफेद बालों से परेशान हैं। वैसे तो उम्र के चढ़ाव के साथ साथ बालों का सफेद होना आम बात है। इसका मुख्य कारण आजकल की लाइफस्टाइल है। तनाव, पोषण की कमी, हानिकारक केमिकल्स युक्त उत्पादों का प्रयोग, हार्मोनल असंतुलन और जैनेटिक कारणों से भी बाल सफ़ेद होने लगते हैं। मार्केट में कई प्रकार के केमिकल युक्त उत्पाद जो बालों को काला करने का दावा करते हैं, अक्सर कुछ प्रभाशाली नहीं होते हैं उल्टा इनके उपयोग से अनेक प्रकार की परेशानियां होने लगती हैं। ऐसे में कुछ प्राकृतिक तरीकों से आप अपने बालों की देखभाल कर सकते हैं।
करी पत्ता और तेल
करी पता में कई प्रकार के औषधीय गुण होते हैं। इसका सही तरीके से उपयोग करके आप सफ़ेद बालों का इलाज कर सकते हैं। इसके लिए करी पत्ते को पीस कर नारियल या सरसों के तेल में धीमी आंच पर उबाल लीजिये इसके बाद इसे छान कर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। फिर इससे बालों की अच्छे से मालिश करें। ये आपके बालों की चमक वापस लाने में मदद कर सकता है।

कॉफी और मेहंदी
अगर कम उम्र में आप भी सफ़ेद बालों से परेशान हो गए हैं। तो इन नेचुरल तरीकों का इस्तेमाल कर के जरूर देखें। मेहंदी बालों को नेचुरल रंग देने का काम करती है, इसमें कॉफी पाउडर मिलाकर बालों को काला और चमकदार बनाया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले मेहंदी पाउडर में कॉफी पाउडर मिलाएं और इसमें पानी मिलकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बालों में लगाएं और 2-3 घंटे बाद धो लें।

भृंगराज
भृंगराज में कई प्रकार के औषधीय गुण मौजूद होते हैं। इससे सफेद बालों का इलाज करने के लिए कई प्रकार से उपयोग किया जा सकता है। जैसे कि तेल, हेयर मास्क और पाउडर के रूप में। हफ्ते में दो से तीन बार आप भृंगराज के तेल से सिर की मालिश कर सकते हैं। भृंगराज के पाउडर को दही या एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर हेयर मास्क भी बना सकते हैं। भृंगराज से बने नेचुरल शैम्पू का उपयोग करने से भी आपको फायदा मिल सकता है।

प्याज का रस
जवानी में बालों का सफ़ेद हो जाना आत्मविश्वास को भी कम कर देता है। इस समस्या के निदान के लिए प्याज का रस एक अच्छा उपाय हो सकता है। प्याज का रस कैटालेज का एक बेहतरीन स्रोत है, ये एक ऐसा एंजाइम है जो हाइड्रोजन पेरोक्साइड को तोड़ने में मदद करता है, जो समय से पहले बालों के सफेद होने का एक मुख्य कारण है। प्याज में मौजूद कैटालेज बालों के रोम में मौजूद हाइड्रोजन पेरोक्साइड के स्तर को कम करता है। जो बालों को समय से पहले सफेद होने से बचाने में मदद कर सकता है।

काली चाय का उपयोग
काली चाय में टैनिन प्रचुर मात्रा में होता है। टैनिन एक प्रकार का रासायनिक यौगिक है जो बालों को नेचुरल रंग देता है। काली चाय का उपयोग करने के लिए सबसे पहले दो चमच काली चाय को एक कप पानी में उबालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। इसके बाद इसे बालों पर लगाएं और 20 मिनट के लिए छोड़ दें बाद में साफ़ पानी से बालों को अच्छे तरीके से धो लें।

बेहतर लाइफस्टाइल अपनाएं
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद मुश्किल हो गया है। काले घने बालों के लिए उपयुक्त मात्रा में पोषण मिलना बहुत आवश्यक है। इसलिए आपको कुछ जरुरी बातों का विशेष ध्यान रखने की जरुरत है। अपने भोजन में प्रोटीन, आयरन, और विटामिन B12 से भरपूर खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन करें। केमिकल युक्त ब्यूटी और हेयर प्रोडक्ट्स का कम इस्तेमाल करें, तनाव लेने से बचें।

( डिस्क्लेमर: ये लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए दिया गया है, इसकी वैज्ञानिक वैधता या चिकित्सकीय उपयोग की पुष्टि जनमंच टीवी नहीं करता है। कृपया उपयुक्त जानकारी के प्रयोग से पहले विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लें। )
National
आज से नौतपा शुरू, अगले नौ दिन पड़ेगी भीषण गर्मी, लू से बचना है तो भूलकर भी न करें ये गलतियां

Nautapa 2026 : 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो चुकी है। नौतपा का संबंध सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने से माना जाता है। मान्यता के अनुसार जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब धरती पर गर्मी का असर सबसे अधिक महसूस होता है। इसी वजह से इन शुरुआती नौ दिनों को नौतपा कहा जाता है।
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आज से नौतपा शुरू, अगले नौ दिन पड़ेगी भीषण गर्मी
Nautapa 2026 शुरू होते ही कई इलाकों में भीषण गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। भारतीय पंचांग के अनुसार ये नौ दिन साल के सबसे गर्म दिनों में शामिल होते हैं। इस दौरान लू लगना, शरीर में पानी की कमी, पेट संबंधी समस्याएं और थकान जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।
लू से बचना है तो भूलकर भी न करें ये गलतियां
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जो शरीर को ठंडा रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी की पूर्ति करें। वहीं, शरीर की गर्मी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है। सही खानपान अपनाकर गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

नौतपा में क्या करें और क्या ना करें ?
खाने-पीने में ज्यादा तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन कम लेना चाहिए, क्योंकि यह शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है। भारी नॉनवेज भोजन जैसे मटन से भी परहेज करना बेहतर माना जाता है। इसकी जगह हल्का भोजन जैसे दाल, हरी सब्जियां और ताजे फल शामिल किए जा सकते हैं।
चाय और कॉफी का अधिक सेवन करने के बजाय पानी, जूस और अन्य तरल पदार्थों को प्राथमिकता देना चाहिए। साथ ही शराब और धूम्रपान से दूरी बनाए रखना बेहतर रहता है।

नौतपा के दौरान इन चीजों को डाइट में करें शामिल
- छाछ और लस्सी
- नारियल पानी
- तरबूज, खरबूजा और खीरा
- नींबू पानी
- दही और हल्का भोजन
- मौसमी फल
- अधिक पानी और ORS

गर्मी से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
इसके अलावा गर्मी से बचाव के लिए हल्के और सूती कपड़े पहनना फायदेमंद माना जाता है। दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि धूप में बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को कपड़े, टोपी या अन्य साधनों से ढककर रखना चाहिए।
Lifestyle
उत्तराखंड में हीटवेव का कहर, ऐसे में रखें अपना खास ख्याल, डिहाईड्रेशन को हल्के में ना लें !

Uttarakhand Heat Alert : उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में इन दिनों आसमान से आग बरस रही है। तापमान 40 डिग्री तक पहुंच रहा है। जिस कारण लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। हीटवेव के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया है।
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उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में हीटवेव का कहर
उत्तराखंड में इस समय जनता हीटवेव से जूझ रही है। अस्पतालों में डिहाईड्रेशन जैसी बीमारी की ओपीडी दिन प्रतिदिन बढ़ने लगी है। जब हीट वेव के विषय में नगर के सहोता हॉस्पिटल के स्वामी और बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रवि सहोता से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। ऐसे में सावधानी बरतनी जरूरी है।
डिहाईड्रेशन को हल्के में ना लें !
बता दें कि हमारी बॉडी 30 से 35 डिग्री गर्मी बर्दाश्त कर सकती है। इससे ऊपर 40 से 42 डिग्री गर्मी लोगों के लिए घातक साबित हो सकती है। हीट वेव के चलते लोगों को पानी की कमी हो जाती है जिसके चलते डिहाइड्रेशन जैसी बीमारी हो सकती है, जिसमें व्यक्ति को दस्त, उल्टी, जी मिचलाना, होता है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लेना चाहिए।

12:00 से 4:00 के बीच जरूरी ना हो तो घर से बाहर ना निकलें
दोपहर 12:00 से 4:00 बजे तक खुद और अपने बच्चों को घर से न निकलने दें। इमरजेंसी के चलते सर को ढक कर चले और तरल पदार्थ का उपयोग समय-समय पर करते रहें। बाल विशेषज्ञ डॉक्टर रवि सहोता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां दवाई उपलब्ध या ओआरएस नहीं मिल पाता है तो घर में भी महिलाएं ओआरएस बना सकती हैं।

ऐसे रखें अपना खास ख्याल
ओआरएस बनाने की विधि 1 लीटर पानी में एक मुट्ठी चीनी और पांच चुटकी नमक और नींबू मिलकर ओआरएस बनाकर डिहाइड्रेशन के मरीज को पिला सकते हैं और अपने नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लेकर इलाज करा सकते हैं।

कृष्णा हॉस्पिटल की फिजिशियन चिकित्सक सारिका भदोरिया ने बताया कि इस समय हीट वेव को लेकर ओपीडी में इजाफा हुआ है। डिहाइड्रेशन की बीमारी से ग्रस्त लोग अपना ख्याल रखें और नजदीकी चिकित्सकों से परामर्श लेकर ही अपना इलाज कराएं।
Blog
Whisky vs Wine 2026 : कौन बेहतर है? पढ़े पूरी तुलना, फायदे-नुकसान और अंतर…

Whisky vs Wine
शराब पीने वालों के बीच एक आम सवाल होता है – Whisky और Wine में कौन बेहतर है? कुछ लोग व्हिस्की को उसकी स्ट्रॉन्गनेस और तेज़ असर के कारण पसंद करते हैं, जबकि कई लोग वाइन को उसके हल्के स्वाद और स्वास्थ्य लाभों के कारण चुनते हैं।
असल में Whisky vs Wine की तुलना कई आधारों पर की जा सकती है – जैसे अल्कोहल की मात्रा, स्वाद, स्वास्थ्य प्रभाव, कीमत, पीने का तरीका और शरीर पर असर। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि दोनों में क्या अंतर है और किस स्थिति में कौन बेहतर है।
Table of Contents
Whisky क्या होती है?

Whisky एक distilled alcoholic drink है, जो आमतौर पर जौ, गेहूं, मक्का या राई जैसे अनाज से बनाई जाती है। इसे लकड़ी के बैरल में लंबे समय तक रखा जाता है जिससे इसका स्वाद गहरा और मजबूत हो जाता है।
Whisky की मुख्य विशेषताएं
- अल्कोहल मात्रा: लगभग 40% या उससे अधिक
- स्वाद: तेज़ और स्ट्रॉन्ग
- रंग: हल्का सुनहरा से गहरा भूरा
- पीने का तरीका: Neat, on the rocks या पानी/सोडा के साथ
Whisky कैसे बनती है?
- अनाज को पीसकर तैयार किया जाता है
- उसे फर्मेंट किया जाता है
- फिर डिस्टिलेशन किया जाता है
- लकड़ी के बैरल में एजिंग होती है
- अंत में बोतल में भरा जाता है
Wine क्या होती है?


Wine एक fermented alcoholic drink है, जो मुख्य रूप से अंगूर से बनाई जाती है। यह व्हिस्की की तुलना में हल्की होती है और आमतौर पर खाने के साथ पी जाती है।
Wine की मुख्य विशेषताएं
- अल्कोहल मात्रा: लगभग 8% से 15%
- स्वाद: हल्का और मीठा या खट्टा
- रंग: लाल, सफेद या गुलाबी
- पीने का तरीका: ग्लास में धीरे-धीरे
Wine कैसे बनती है?
- अंगूर को कुचला जाता है
- रस को फर्मेंट किया जाता है
- कुछ समय के लिए स्टोर किया जाता है
- फिल्टर करके बोतल में भरा जाता है
Whisky vs Wine: बेसिक तुलना
| आधार | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| बनाने का तरीका | Distillation | Fermentation |
| मुख्य सामग्री | अनाज | अंगूर |
| अल्कोहल मात्रा | 40%+ | 8–15% |
| स्वाद | तेज़ | हल्का |
| पीने की मात्रा | कम | ज्यादा |
| नशा | जल्दी | धीरे |
Alcohol Content की तुलना
| पेय | औसत Alcohol % | असर |
|---|---|---|
| Whisky | 40–50% | तेज़ नशा |
| Red Wine | 12–15% | मध्यम नशा |
| White Wine | 8–12% | हल्का नशा |
निष्कर्ष:
Whisky में alcohol ज्यादा होता है इसलिए उसका असर जल्दी होता है, जबकि Wine धीरे-धीरे असर करती है।
स्वाद (Taste) की तुलना
| विशेषता | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| स्वाद | स्ट्रॉन्ग | हल्का |
| मिठास | कम | ज्यादा हो सकती है |
| खुशबू | स्मोकी या वुडी | फ्रूटी |
| आफ्टर टेस्ट | लंबा | हल्का |
अगर आपको strong taste पसंद है तो Whisky बेहतर है।
अगर आपको smooth taste पसंद है तो Wine बेहतर है।
स्वास्थ्य के हिसाब से तुलना
| पहलू | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| कैलोरी | ज्यादा | कम |
| Antioxidants | कम | ज्यादा |
| दिल के लिए | सीमित | बेहतर मानी जाती |
| शुगर | कम | ज्यादा हो सकती |
| हैंगओवर | ज्यादा | कम |
Wine के फायदे
- Red wine में antioxidants होते हैं
- दिल की सेहत के लिए बेहतर मानी जाती
- धीरे असर करती है
Whisky के फायदे
- कम sugar
- ठंड में गर्माहट
- कम मात्रा में पी जाती है
शरीर पर असर
| प्रभाव | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| नशा | जल्दी | धीरे |
| डिहाइड्रेशन | ज्यादा | कम |
| सिरदर्द | हो सकता | कम |
| एसिडिटी | कम | ज्यादा हो सकती |
कौन ज्यादा स्ट्रॉन्ग है?
Whisky Wine से कई गुना ज्यादा स्ट्रॉन्ग होती है।
उदाहरण:
- 30 ml Whisky = लगभग 1 ग्लास Wine के बराबर alcohol
इसका मतलब Whisky कम मात्रा में भी ज्यादा असर करती है।
किस मौके पर क्या बेहतर है?
| मौका | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| पार्टी | ✔ | ✔ |
| डिनर | ✖ | ✔ |
| ठंड | ✔ | ✖ |
| रिलैक्स | ✔ | ✔ |
| डेट | ✖ | ✔ |
कीमत की तुलना
| पेय | कीमत |
|---|---|
| Whisky | मध्यम से महंगी |
| Wine | सस्ती से महंगी |
Wine सस्ती भी मिल सकती है जबकि अच्छी Whisky अक्सर महंगी होती है।
नशे की तुलना
| पहलू | Whisky | Wine |
|---|---|---|
| असर | तेज़ | धीमा |
| कंट्रोल | मुश्किल | आसान |
| समय | कम | ज्यादा |
कैलोरी तुलना
| पेय | कैलोरी (प्रति ग्लास) |
|---|---|
| Whisky | ~100 |
| Wine | ~120 |
हालांकि Wine में कैलोरी ज्यादा हो सकती है, लेकिन Whisky ज्यादा स्ट्रॉन्ग होती है।
पुरुष और महिलाओं के लिए
| व्यक्ति | बेहतर विकल्प |
|---|---|
| पुरुष | Whisky या Wine |
| महिलाएं | Wine |
| नए पीने वाले | Wine |
| अनुभवी | Whisky |
फायदे और नुकसान
Whisky के फायदे
- स्ट्रॉन्ग
- कम मात्रा में काफी
- ठंड में अच्छी
Whisky के नुकसान
- जल्दी नशा
- लिवर पर असर
- डिहाइड्रेशन
Wine के फायदे
- हेल्थ के लिए बेहतर मानी जाती
- हल्की
- स्वाद अच्छा
Wine के नुकसान
- ज्यादा पी सकते हैं
- शुगर ज्यादा
- एसिडिटी
कौन ज्यादा सुरक्षित है?
अगर सीमित मात्रा में पी जाए तो दोनों सुरक्षित हो सकते हैं।
लेकिन अधिक मात्रा में दोनों ही नुकसानदायक हैं।
कौन बेहतर है?
| स्थिति | बेहतर विकल्प |
|---|---|
| हेल्थ | Wine |
| नशा | Whisky |
| स्वाद | Wine |
| स्ट्रॉन्ग | Whisky |
| शुरुआत | Wine |
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
अधिकतर विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- सीमित मात्रा में Wine बेहतर विकल्प है
- ज्यादा मात्रा में कोई भी शराब नुकसानदायक है
Whisky या Wine – क्या चुनें?
अगर आप:
- हल्का पीना चाहते हैं → Wine
- स्ट्रॉन्ग चाहते हैं → Whisky
- हेल्थ सोचते हैं → Wine
- जल्दी नशा चाहते हैं → Whisky
निष्कर्ष
Whisky और Wine दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं।
Whisky ज्यादा स्ट्रॉन्ग होती है और जल्दी असर करती है, जबकि Wine हल्की होती है और धीरे असर करती है।
अगर स्वास्थ्य और हल्के नशे की बात करें तो Wine बेहतर मानी जाती है।
अगर स्ट्रॉन्ग ड्रिंक की बात करें तो Whisky बेहतर है।
अंत में सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी शराब का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, तभी वह सुरक्षित माना जाता है।
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