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नैनीताल को बचाने के लिए होगा भू-तकनीकी सर्वेक्षण, केंद्र ने शुरू की प्रक्रिया।

देहरादून – जोशीमठ भू-धंसाव के बाद खतरे की जद में नजर आ रहे नैनीताल शहर को बचाने और भविष्य की निर्माण योजनाओं को तैयार करने के लिए इसका भू-तकनीकी एवं भू-भौतिकीय सर्वेक्षण होगा। इसके अलावा नैनीताल में स्लोप स्थायित्व का भी सर्वेक्षण होगा। इसके लिए भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही शहर का लाइडर मैप भी तैयार किया जाएगा।
दरअसल, जोशीमठ भू-धंसाव के बाद सरकार ने तय किया था कि सभी पर्वतीय शहरों की धारण क्षमता का आकलन कराया जाएगा। इस कड़ी में पहले चरण में 15 शहरों का चयन किया गया था। सबसे पहले नैनीताल की धारण क्षमता के आकलन के साथ ही इसे भू-धंसाव से बचाने के लिए सर्वेक्षण होगा। इसके तहत नैनीताल का लाइडर (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) मैप तैयार किया जाएगा। इस तकनीक का उपयोग उच्च-रिजॉल्यूशन वाले मानचित्र बनाने में किया जाता है।
यहां पैदा हो रहा है खतरा
नैनीताल की बुनियाद समझा जाने वाला बलिया नाला लगातार भू-स्खलन की जद में आ रहा है, इसका ट्रीटमेंट भी शुरू किया गया है। वहीं, नैनीताल का शीर्ष नैना पीक, भुजा टिफ्फन टॉप व स्नो व्यू की रमणीक पहाड़ी में भूस्खलन सक्रिय है।
यह होगा फायदा
भू-सर्वेक्षण के बाद लाइडर मैप बनने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शहर में कितनी ऊंचाई तक के भवन सुरक्षित हैं। पहले से जो भवन बने हुए हैं, उनका शहर पर कितना बोझ है। कितने ढलान पर कितनी मंजिल के ऐसे भवन हैं, जो आपदा के लिहाज से खतरे में हैं। कितने डिग्री ढलान पर कितनी मंजिल के भवन बनाए जाने चाहिए। पर्वतीय शहरों में वह कौन सी भूमि व स्थान हैं, जहां भवन बनाना खतरनाक हो सकता है। भविष्य में नए निर्माण से लेकर सीवर, पेयजल तक का पूरा काम उसी मैप के हिसाब से होगा। इसके लिए मास्टर प्लान भी उसी के अनुसार बनाया जाएगा।
पहले चरण में इन 15 शहरों का होगा अध्ययन
गोपेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, कर्णप्रयाग, नई टिहरी, उत्तरकाशी, लैंसडौन, रानीखेत, नैनीताल, कपकोट, धारचूला, चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, भवाली।
आपदा प्रबंधन सचिव डॉ रंजीत सिन्हा ने बताया कि हमने नैनीताल के भू-सर्वेक्षण व लाइडर मैपिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जल्द एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा। इसके बाद बाकी अन्य शहरों के लिए भी यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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खेल विश्वविद्यालय को मिली वन भूमि डायवर्जन की अंतिम स्वीकृति, खेल मंत्री बोलीं – उत्तराखंड के खेल भविष्य के लिए ये ऐतिहासिक उपलब्धि

Uttarakhand Sports University : उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय के निर्माण को बड़ी प्रशासनिक सफलता मिली है। भारत सरकार के वन मंत्रालय द्वारा खेल विश्वविद्यालय के लिए 12.317 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्जन को अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
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खेल विश्वविद्यालय को मिली वन भूमि डायवर्जन की अंतिम स्वीकृति
खेल विश्वविद्यालय को मिली वन भूमि डायवर्जन की अंतिम स्वीकृति मिल गई है। इस संबंध में जारी आदेश के अनुसार, नैनीताल जिले के हल्द्वानी वन प्रभाग अंतर्गत गोलापार क्षेत्र में प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय परियोजना के लिए वन भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी गई है।
उत्तराखंड के खेल भविष्य के लिए ये ऐतिहासिक उपलब्धि – रेखा आर्या
प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्या ने इस स्वीकृति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उत्तराखंड के खेल भविष्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार खेल अवस्थापना को मजबूत करने और युवाओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है।

उत्तराखंड को “खेलभूमि” के रूप में स्थापित करना है लक्ष्य
खेल मंत्री ने कहा कि खेल विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं होगा, बल्कि यह प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, अनुसंधान और उच्च स्तरीय प्रशिक्षक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा। इससे उत्तराखंड के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को “खेलभूमि” के रूप में स्थापित करना है और यह विश्वविद्यालय इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने मुख्यमंत्री का जताया आभार
खेल मंत्री रेखा आर्या ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरी तत्परता और गंभीरता से अग्रसारित किया जिसके चलते यह सफलता मिल पाई।
रेखा आर्या ने केंद्र सरकार एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस स्वीकृति से परियोजना के निर्माण कार्य को गति मिलेगी और शीघ्र ही प्रदेशवासियों को एक विश्वस्तरीय खेल विश्वविद्यालय की सौगात मिलेगी।
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इस दिन खुलेंगे श्री मद्महेश्वर मंदिर के कपाट, ऊखीमठ से 17 मई को रवाना होगी उत्सव डोली

Rudraprayag News : द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर के कपाट खुलने की तिथि का ऐलान हो गया है। मदमहेश्वर के कपाट 21 मई को भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे।
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21 मई को खुलेंगे श्री मद्महेश्वर मंदिर के कपाट
श्री मद्महेश्वर मंदिर के कपाट आगामी 21 मई को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी ने यात्रा कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया। कपाट खुलने के छह महीने तक श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर सकेंगे।
ऊखीमठ से 17 मई को रवाना होगी उत्सव डोली
मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि 17 मई को भगवान मद्महेश्वर की उत्सव मूर्ति ओंकारेश्वर मंदिर के गर्भगृह से बाहर आकर मंदिर स्थित सभामंडप में विराजमान होगी।

उन्होंने बताया कि 19 मई को भगवान मद्महेश्वर की उत्सव डोली प्रातः ओंकारेश्वर मंदिर से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम हेतु राकेश्वरी मंदिर पहुंचेगी।
20 मई को डोली रांसी से प्रस्थान करेगी डोली
20 मई को डोली रांसी से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम हेतु गौंडार पहुंचेगी। मुख्य कार्याधिकारी के अनुसार 21 मई को भगवान मद्महेश्वर की उत्सव डोली ग्राम गौंडार से प्रातः प्रस्थान करेगी तथा कर्क लग्न में श्री मद्महेश्वर मंदिर के कपाट विधि-विधान के साथ आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
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30 घंटे से पानी की टंकी पर चढ़ी नर्सिंग अभ्यर्थी नहीं उतरी नीचे, समर्थन में धरना स्थल पहुंचे करन माहरा

Dehradun News : प्रदेश में 159 दिनों से चल रहा नर्सिंग अभ्यर्थियों का धरना अब उग्र रूप ले रहा है। बीते दिन जहां नर्सिंग अभ्यर्थी पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। तो 30 घंटे बीत जाने के बाद भी नर्सिंग अभ्यर्थी टंकी से नीचे नहीं उतरे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती तब तक वो यहीं पर डटे रहेंगे।
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30 घंटे से पानी की टंकी पर चढ़ी नर्सिंग अभ्यर्थी नहीं उतरी नीचे
नर्सिंग अभ्यर्थियों का धरना जारी है। महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला और नर्सिंग अभ्यर्थी बीते 30 घंटों से पानी की टंकी पर चढ़े हुए हैं। लेकिन इतने घंटे बीत जाने के बाद भी वो नीचे नहीं आए हैं। नर्सिंग अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाती तब तक वो नीचे नहीं उतरेंगे।
समर्थन में धरना स्थल पहुंचे करन माहरा
नर्सिंग अभ्यर्थियों के धरने को समर्थन देने के लिए कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा भी धरना स्थल पर पहुंचे उन्होंने इन अभ्यर्थियों को समर्थन देते हुए कहा कि यह सरकार बहरी और गूंगी हो गई है। महिला सम्मान की बात करने वाली भाजपा यह नहीं देख रही है कि पिछले 30 घंटे से अधिक हो चुके हैं और एक प्रमुख विपक्षी दल की महिला प्रदेश अध्यक्ष टंकी पर बैठी हुई है।

करन माहरा ने अभ्यार्थियों की मांग को बताया जायज
माहरा ने आंदोलन कर रहे अभ्यार्थियों की मांग को जायज बताते हुए कहा कि जब उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों में धांधली होगी तो यह अभ्यर्थी कैसे अपने भविष्य को सुरक्षित मान पाएंगे। इसीलिए वह वर्षवार नियुक्ति की मांग कर रहे हैं समय-समय पर कई भर्तियों में ये धांधली देखने को मिली।
उन्होंने ऋषिकेश एम्स का उदाहरण देते हुए कहा कि अकेले एक राज्य के 70% से अधिक लोगों को नौकरी मिल जाना, एक राज्य के कई लोग डाक विभाग में नौकरी पर लग जाना कई संदेश उत्पन्न करता है,लिहाजा कांग्रेस सड़कों से लेकर सदन तक ऐसे जनहित के मुद्दों का समर्थन करेगी और सरकार के साथ लड़ाई लड़ेगी।

कांग्रेस की सता में आने की छटपटाहट दिख रही साफ
भाजपा ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस की सता में आने की छटपटाहट साफ देखी जा सकती है। इसीलिए लगातार नए-नए हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इन हथकंडों को जनता बखूबी समझती है और इनके बहकावे में आने वाली नहीं है।
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