Haridwar
देवभूमि रजत उत्सव का भव्य शुभारंभ, सांसद नरेश बंसल ने दीप-शंखनाद के साथ किया शुभारंम्भ

राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय देवभूमि रजत उत्सव कार्यक्रम का मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने दीप जलाकर एवं शंखनाद के साथ शुभारंम्भ किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा उत्तराखण्ड।
राज्य ने 25 वर्षों मे कई उच्च मुकाम किये हैं हासिल।
देवभूमि रजत उत्सव के अवसर पर जनपद के राज्य आन्दोलनकारियों को किया गया सम्मानित।
कार्यक्रम में डिजिटल प्रदर्शनी का मुख्य अतिथि द्वारा किया गया शुभारंभ।
मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने पुष्पगुच्छ भेंट कर किया स्वागत।

हरिद्वार: उत्तराखण्ड राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग की ओर से रोड़ीबेलवाला पार्किंग स्थल में आयोजित तीन दिवसीय देवभूमि रजत उत्सव कार्यक्रम का शुभारम्भ राज्यसभा संासद नरेश बंसल ने दीप जलाकर एवं शंखनाद ध्वनि के साथ किया गया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राज्य सांसद ने कहा कि राज्य आंदोलनकरियों के संघर्ष एवं बलिदान से हि उत्तराखण्ड राज्य हमें प्राप्त हुआ है तथा आज बडे हर्ष का विषय है कि उत्तराखण्ड राज्य अपने 25 वर्ष 09 नवम्बर को पूर्ण कर रहा है तथा इन 25 वर्षों में राज्य ने कई कई उच्च मुकाम हासिंल किए है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश निरन्तर विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि जिस समय उत्तराखण्ड राज्य का गठन हुआ था उस समय समित संसाधनों में राज्य का कार्य शुरू किया गया था तथा आज प्रदेश भारत के अग्रीणीय राज्यों में सामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य के गठन के बाद प्रेदश में शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार के क्षेत्र में उच्च मुकाम हासिल किया है। उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 08 मेडिकल कॉलेज खोले गये है, तथा सभी सड़को को ऑलवेदर रोड़ से जोड़ा गया है तथा ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाईन परि योजना का कार्य किया जा रहा है। जिससे प्रदेश में पर्यटन को बढ़ाव मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में विगत चार वर्षों में 25 हजार से अधिक बेरोजगार युवाओं को नौकरियां उपलब्ध करायी गयी है। हिमालयी राज्यों में वित्तीय प्रबन्धन में राज्य ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है कैपिटल इनकम में प्रतिव्यक्ति आय में वृद्वि हुई है अपराध तथा भ्रटाचार के विरूद्व सरकार जीरों टोरेन्स की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य देश का पहला राज्य है जिसने यूसीसी लागू करने तथा नकल विरोधी एवं भू-कानून को लागू किया है।

उन्होंने कहा कि आज उत्तराखण्ड प्रदेश के हर क्षेत्र में बेहत्तर ढ़ग से कार्य करते हुए विकास के आयाम की ऊचाई को छू रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री ने कहा कि तिसरा दशक उत्तराखण्ड का होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में 4 प्रतिशत गरीबी कम हुई है तथा राज्य में पलायन भी रिवर्स हुआ है। उन्होंने कहा कि खनन नीति में केंद्र ने राज्य की प्रशंसा की तथा 100 करोड़ रूपये का पुरस्कार भी प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन है कि 2047 तक भारत विकसित राष्ट्र में शामिल होगा तथा हर गाँव खुशहाल एवं विकसित हो इस विजन को साकार करने के लिए सभी को अपना सकारात्मक योगदान के सहयोग की आवश्यकता है इस अवसर पर राज्य सभा संसद द्वारा डिजिटल प्रर्दशनी का शुभारंभ किया तथा राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के लगाये गये प्रर्दशनी स्टॉलों का भा अवलोकन किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथियों द्वारा उत्तराखण्ड राज्य के आंदोलन में शामिल हुए आंदोलनकारियों को भी सम्मानित किया गया। जिसमें जगत सिंह रावत, जसवंत सिंह बिष्ट, भोपाल सिंह बिष्ट, अंजू उपरेती, बीना नौटियाल, आशु बत्तर्वाल, भगवान जोशी, सुरेन्द्र सैनी, मदन गौड़, आंनद सैनी, साकेत वशिष्ठ, भीम सिंह रावत, रोहित तथा विषणुदत्त सेमवाल आदि सामिल है।

देवभूमि रजत उत्सव के अवसर पर विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं द्वारा चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें जीपीएस 41, पीबीम्यू इंटर कॉलेज तथा गुरूकुल कांगड़ी के छात्र-छात्राओं द्वारा चित्रकला प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया।
देवभूमि रजत उत्सव कार्यक्रम में मेयर किरन जैसल, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, जिलाध्यक्ष भाजपा आशुतोष शर्मा, विधयाक आदेश चौहान, नगर पालिकाध्यक्ष राजीव शर्मा, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डे, डीजी सूचना एवं अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल, एसपी क्राइम जितेंद्र मेहरा,दर्जा राज्यमंत्री श्यामवीर सैनी, शोभाराम प्रजापति सहित बीजेपी जिला उपाध्यक्ष लव शर्मा, महामंत्री हीरा सिंह बिष्ट, अरविंद कुशवाहा, सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान, उप जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, जिला विकास अधिकारी वेदप्रकाश, एपीडी नलनीत घिल्डियाल सहित जनसमूह एवं विभिन्न स्कूलों के छात्र –छात्राएं मौजूद रहे।
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हरिद्वार में भीषण सड़क हादसा, रोडवेज बस और पिकअप की हुई भिड़ंत, तीन की मौत, 4 घायल

Haridwar Accident : उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में सोमवार देर रात एक भीषण सड़क हादसा हो गया। इस हादसे ने तीन लोगों की जान ले ली, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
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हरिद्वार में रोडवेज बस और पिकअप की हुई भिड़ंत
हरिद्वार में बीती रात रोडवेज बस और पिकअप वाहन में भिड़ंत हो गई। इस हादसे में तीन की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि टनकपुर डिपो की रोडवेज बस नजीबाबाद से हरिद्वार की ओर आ रही थी।
वहीं पिकअप वाहन हरिद्वार से बिजनौर की दिशा में जा रहा था। श्यामपुर क्षेत्र स्थित फ्लाईओवर के मोड़ पर दोनों वाहन आमने-सामने टकरा गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी तेज थी कि पिकअप वाहन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार दो लोग फ्लाईओवर से नीचे जा गिरे।
दर्दनाक सड़क हादसे में तीन की मौके पर ही मौत
बताया जा रहा है कि हादसे के समय पिकअप वाहन में कुल 10 लोग मौजूद थे। दुर्घटना के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों की चीख-पुकार सुनाई देने लगी। स्थानीय लोगों ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी।

घायलों का अस्पताल में इलाज जारी
सूचना मिलते ही श्यामपुर थाना पुलिस और 108 एंबुलेंस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को वाहन से बाहर निकालकर जिला चिकित्सालय हरिद्वार भेजा। चिकित्सकों के अनुसार, कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका उपचार जारी है।
यातायात हुआ प्रभावित, क्रेन से हटाए गए वाहन
हादसे के कारण हाईवे पर कुछ समय के लिए लंबा जाम लग गया। पुलिस ने क्रेन की सहायता से दुर्घटनाग्रस्त बस और पिकअप को सड़क से हटाया, जिसके बाद यातायात को सामान्य किया गया।
Uttarakhand
Haridwar News : गंगा पार कर हाथियों के साथ सेल्फी लेना युवकों को पड़ा भारी, बाल-बाल बची जान…

Haridwar News : गंगा पार कर हाथियों के साथ सेल्फी लेने पहुंचे युवक
हरिद्वार। वन्यजीवों के साथ सेल्फी लेने और रोमांच के शौक में छह युवकों ने अपनी जान जोखिम में डाल दी। हरिद्वार के सप्तऋषि घाट क्षेत्र में गंगा पार कर हाथियों के झुंड के करीब पहुंचना युवकों को भारी पड़ गया। हाथी अचानक आक्रामक हो गए और युवकों के पीछे दौड़ पड़े। इस दौरान दो युवकों की जान बाल-बाल बची। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार सोमवार को गंगा स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचे छह युवक सप्तऋषि घाट के सामने स्नान कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें गंगा पार हाथियों का एक झुंड दिखाई दिया। झुंड में शिशु हाथियों समेत करीब आठ से दस हाथी मौजूद थे, जो गंगा किनारे विचरण कर रहे थे। युवकों ने हाथियों के साथ फोटो और वीडियो बनाने के लिए गंगा पार कर उनके बेहद करीब पहुंचने का फैसला किया।
हाथियों ने किया चार्ज, मच गई अफरा-तफरी
हाथियों के पास पहुंचकर युवक तस्वीरें और वीडियो बनाने लगे। खुद को असुरक्षित महसूस करते ही हाथी आक्रामक हो गए और युवकों की ओर दौड़ पड़े। हाथियों को अपनी तरफ आते देख युवकों में अफरा-तफरी मच गई और सभी अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। इस दौरान दो युवक हाथियों के बेहद करीब पहुंच गए, जिससे उनकी जान पर खतरा मंडराने लगा। हालांकि उन्होंने तेजी से भागकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचते हुए खुद को बचा लिया।
घटना के बाद सभी युवक वापस लौट आए। उनकी लापरवाही एक बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। सप्तऋषि घाट पर मौजूद एक युवक ने पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। वायरल वीडियो में हाथी युवकों के पीछे दौड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाथी कुछ और करीब पहुंच जाते तो बड़ा हादसा हो सकता था।
पुलिस और वन विभाग ने दी चेतावनी
सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने युवकों को कड़ी फटकार लगाई और भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा न करने की चेतावनी दी।
रेंज अधिकारी शीशपाल सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर खदेड़ा गया। उन्होंने कहा कि जंगल और वन्यजीव क्षेत्रों में इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। बिना अनुमति वन क्षेत्र में प्रवेश करना और वन्यजीवों के करीब जाना जानलेवा साबित हो सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि फोटो या वीडियो बनाने के लिए वन्यजीवों के नजदीक न जाएं और वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। इससे न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि वन्यजीवों को भी अनावश्यक तनाव और खतरे से बचाया जा सकेगा।
Uttarakhand
Nirjala Ekadashi 2026: हरिद्वार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, गंगा में लगाई आस्था की डुबकी

Nirjala Ekadashi 2026 : तीर्थनगरी हरिद्वार में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
हरिद्वार, भारत — सनातन धर्म में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माने जाने वाले निर्जला एकादशी 2026 के पावन अवसर पर तीर्थनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी के बावजूद, देश के कोने-कोने से आए हजारों भक्तों ने पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई। पूरी धर्मनगरी वैदिक मंत्रोच्चार, भजनों और ‘हर-हर गंगे’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठी।
हर की पैड़ी पर दिखा भक्ति का अनूठा संगम
सुबह के ब्रह्ममुहूर्त से ही हर की पैड़ी समेत हरिद्वार के तमाम प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। पवित्र गंगा स्नान के बाद भक्तों ने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
इस विशेष पर्व पर दान-पुण्य का अत्यधिक महत्व होने के कारण घाटों पर जल, मौसमी फल, वस्त्र और मिट्टी के घड़ों का दान करने वालों की लंबी कतारें देखी गईं।
प्रशासनिक मुस्तैदी: श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए हरिद्वार पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष रूट डायवर्जन लागू किया गया था।
क्यों खास है निर्जला एकादशी का व्रत?
शास्त्रों के अनुसार, वर्ष में आने वाली सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है। ‘निर्जला’ का अर्थ है बिना जल के। जहां अन्य एकादशी व्रतों में फलाहार या दूध का सेवन किया जा सकता है, वहीं इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक अन्न और जल का पूर्ण त्याग करना होता है।
भीमसेनी एकादशी की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडव भाई भीमसेन (भीम) के लिए अपनी अत्यधिक भूख (वृकोदर प्रवृत्ति) के कारण महीने में दो बार आने वाले एकादशी व्रतों को रखना असंभव था।
जब उन्होंने अपनी इस विवशता को लेकर महर्षि वेदव्यास जी से मार्गदर्शन मांगा, तो व्यास जी ने उन्हें वर्ष में केवल एक बार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का पूर्ण निर्जला व्रत रखने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस एकमात्र कठिन व्रत को पूरी निष्ठा से करने पर वर्ष की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है।
निर्जला एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण का समय
व्रत की पूर्णता और उसका आध्यात्मिक लाभ उठाने के लिए तिथियों और शुभ मुहूर्त का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है:
| विशेष आयोजन / तिथि | शुभ समय और दिनांक |
| निर्जला एकादशी व्रत तिथि | गुरुवार, 25 जून 2026 |
| एकादशी तिथि का प्रारंभ | 24 जून 2026 को शाम 06:12 बजे से |
| एकादशी तिथि की समाप्ति | 25 जून 2026 को रात 08:09 बजे तक |
| पारण (व्रत तोड़ने) का समय | 26 जून 2026 (शुक्रवार) सुबह 05:43 बजे से 08:26 बजे तक |
नोट: हिंदू शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि के भीतर और सूर्योदय के बाद ही किया जाना चाहिए। व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान विष्णु को भोग लगाकर जल ग्रहण करना चाहिए।
मुख्य नियम और धार्मिक परंपराएं
इस दिन दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु निम्नलिखित परंपराओं का पालन करते हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त स्नान: सुबह सूर्योदय से पूर्व (04:04 AM से 04:45 AM के बीच) उठकर पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना।
- मंत्र साधना: पूरे दिन मन ही मन
ॐ नमो भगवते वासुदेवायमहामंत्र का जाप या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना। - शीतलता का दान: जेठ की भीषण गर्मी को देखते हुए भूखे-प्यासों को पानी पिलाना, शर्बत बांटना, तथा मिट्टी के घड़े, हाथ के पंखे और छतरियों का दान करना सर्वोत्तम माना जाता है।
- तुलसी दल निषेध: एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित नहीं किया जाता और न ही पत्तियां तोड़ी जाती हैं, क्योंकि माना जाता है कि माता तुलसी भी इस दिन भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
संध्याकाल में गंगा आरती के दर्शन और रात में हरि-कीर्तन (जागरण) के साथ श्रद्धालु इस कठिन व्रत को पूर्ण कर आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना करते हैं।
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