Delhi
Thyroid Problem: जानें 5 सुपरफूड्स जो थायराइड को नियंत्रित करने में हैं मददगार….

नई दिल्ली: थायराइड एक ऐसी ग्रंथि है जो हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में मदद करती है। जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो वजन बढ़ने, थकावट, और मानसिक अवसाद जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। हालांकि, थायराइड को नियंत्रित करने के लिए सही खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे प्रभावी तरीका है। यदि आप थायराइड की समस्या से जूझ रहे हैं, तो अपनी डाइट में कुछ खास चीजें शामिल कर आप इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं।
यहां हम उन 5 खास खाद्य पदार्थों का जिक्र कर रहे हैं, जिन्हें अपनी डाइट में शामिल करके आप थायराइड की समस्या को नियंत्रित कर सकते हैं:
1. अखरोट और अलसी के बीज (Walnuts and Flaxseeds)
अखरोट और अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं। ये दोनों खाद्य पदार्थ थायराइड हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। रोजाना 1-2 चम्मच अलसी के बीज और कुछ अखरोट खाना थायराइड के लक्षणों में राहत दे सकता है। इनका सेवन शरीर में सूजन को कम करने और थायराइड ग्रंथि के कार्य को बेहतर बनाने में सहायक होता है।

2. साबुत अनाज (Whole Grains)
थायराइड को नियंत्रित करने के लिए साबुत अनाज, जैसे ओट्स, ब्राउन राइस और बाजरा बहुत फायदेमंद होते हैं। ये अनाज फाइबर, आयरन और बी विटामिन्स से भरपूर होते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखते हैं। साबुत अनाज से शरीर को ऊर्जा मिलती है और ये शरीर के वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद करते हैं।

3. हरी पत्तेदार सब्जियां (Leafy Greens)
पालक, सरसों का साग, मेथी और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां विटामिन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर होती हैं। इन सब्जियों में एंटीऑक्सिडेंट्स और मैग्नीशियम भी होते हैं, जो थायराइड ग्रंथि के सही तरीके से कार्य करने में मदद करते हैं। इन सब्जियों का सेवन करने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है, जो थायराइड को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

4. नारियल तेल (Coconut Oil)
नारियल तेल में प्राकृतिक फैटी एसिड्स होते हैं, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारने में मदद करते हैं। यह थायराइड ग्रंथि को बढ़ावा देने के साथ-साथ वजन को कंट्रोल करने में भी सहायक होता है। रोजाना एक चम्मच नारियल तेल का सेवन करने से थायराइड के लक्षणों में सुधार आ सकता है और वजन को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

5. दही (Yogurt)
दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के साथ-साथ थायराइड ग्रंथि को संतुलित रूप से कार्य करने में मदद करते हैं। दही में कैल्शियम और विटामिन डी की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर के लिए जरूरी होते हैं। रोजाना एक कटोरी दही का सेवन करने से थायराइड से संबंधित समस्याओं में राहत मिल सकती है।

थायराइड रोगियों के लिए खास सलाह:
- कैफीन और प्रोसेस्ड फूड्स से बचें: थायराइड के रोगियों को अधिक कैफीन और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह थायराइड ग्रंथि पर असर डाल सकता है।
- चीनी और नमक का सेवन सीमित करें: अधिक चीनी और नमक का सेवन थायराइड के लक्षणों को बढ़ा सकता है, इसलिए इसे सीमित करना महत्वपूर्ण है।
- बैलेंस डाइट और एक्सरसाइज: अपनी डाइट को संतुलित रखने के साथ-साथ नियमित व्यायाम भी थायराइड को नियंत्रित करने में सहायक होता है। डॉक्टर की सलाह से बैलेंस डाइट और एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करें।
निष्कर्ष:
थायराइड को नियंत्रित करने के लिए सही खानपान और जीवनशैली बेहद जरूरी है। अखरोट, अलसी के बीज, साबुत अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, नारियल तेल और दही जैसे खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करके आप थायराइड को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं। इसके साथ ही अपनी दिनचर्या में थोड़ी सी सावधानी और व्यायाम भी आपके स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
Tech
कैब इंडस्ट्री में बड़ा धमाका : 5 फरवरी से शुरू हुई ‘Bharat Taxi App’, ओला-उबर को देगी टक्कर!

Bharat Taxi App : कैब इंडस्ट्री में बड़ी क्रांति, अब न सर्ज प्राइसिंग का डर और न कमीशन का बोझ
भारतीय परिवहन (Transportation) के इतिहास में 5 फरवरी 2026 की तारीख एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर ‘भारत टैक्सी ऐप’ (Bharat Taxi App) का आधिकारिक आगाज़ हो चुका है। यह महज एक और कैब बुकिंग ऐप नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा ‘गेम चेंजर’ मॉडल है जो ओला और उबर जैसी दिग्गज कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने और ड्राइवर्स व यात्रियों के हितों की रक्षा करने के लिए मैदान में उतरा है।
सरकार के समर्थन और सहकारी (Cooperative) भावना के साथ शुरू हुई यह सेवा फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में अपनी दस्तक दे चुकी है, जिसे जल्द ही मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे महानगरों में चरणों में विस्तारित किया जाएगा।
क्यों चर्चा में है भारत टैक्सी ऐप? (Unique Value Proposition)
भारत में अब तक कैब एग्रीगेटर्स का जो मॉडल रहा है, उसमें अक्सर दो शिकायतें सबसे प्रमुख रही हैं: पहली, यात्रियों से वसूला जाने वाला बेतहाशा ‘सर्ज प्राइस’ (Surge Pricing) और दूसरी, ड्राइवर्स से लिया जाने वाला भारी-भरकम कमीशन (जो अक्सर 25% से 30% तक होता है)। भारत टैक्सी ऐप ने इन दोनों ही समस्याओं की जड़ पर प्रहार किया है।
ड्राइवर-ओनरशिप मॉडल: अब ड्राइवर ही बनेंगे मालिक
इस ऐप की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खूबी इसका ‘ड्राइवर-ओनरशिप मॉडल’ है। पारंपरिक प्लेटफॉर्म्स पर ड्राइवर केवल एक ‘पार्टनर’ के रूप में काम करते हैं, लेकिन भारत टैक्सी में वे प्लेटफॉर्म के सह-मालिक (Co-owners) होंगे।
- ज़ीरो कमीशन: भारत टैक्सी अपने ड्राइवर्स से किसी भी ट्रिप पर कोई कमीशन नहीं लेगा। यानी यात्री जो भुगतान करेगा, उसका पूरा हिस्सा सीधे ड्राइवर की जेब में जाएगा।
- शेयरहोल्डिंग: इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाले प्रत्येक ड्राइवर को सहकारी संस्था के 5 शेयर दिए जाएंगे। इससे ड्राइवर्स का संगठन के प्रति जुड़ाव बढ़ेगा और वे खुद को एक कर्मचारी के बजाय एक उद्यमी महसूस करेंगे।
- न्यूनतम मेंबरशिप फीस: कमीशन के बजाय, ड्राइवर्स को केवल एक मामूली मेंबरशिप फीस देनी होगी। इसे अपनी सुविधा के अनुसार दैनिक, साप्ताहिक या मासिक आधार पर चुकाया जा सकता है।
यात्रियों के लिए क्या है खास? (Passenger Benefits)
एक आम यात्री हमेशा दो चीजें चाहता है: सस्ता सफर और पारदर्शिता। भारत टैक्सी इन दोनों पैमानों पर खरी उतरती दिख रही है।
किराए में 30% तक की बचत
कंपनी का दावा है कि भारत टैक्सी का किराया मौजूदा मार्केट रेट्स से लगभग 20 से 30 फीसदी तक कम होगा। चूंकि कंपनी बीच में अपना कमीशन नहीं रख रही है, इसलिए उस बचत का सीधा लाभ यात्रियों को सस्ते किराए के रूप में दिया जा रहा है।
सर्ज प्राइसिंग का खात्मा
अक्सर देखा जाता है कि बारिश होने पर या ऑफिस ऑवर्स के दौरान कैब का किराया अचानक दोगुना या तिगुना हो जाता है। भारत टैक्सी ने स्पष्ट किया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर ‘नो सर्ज प्राइसिंग’ नीति लागू होगी। मौसम खराब हो या ट्रैफिक जाम, यात्री को वही किराया देना होगा जो बुकिंग के समय स्क्रीन पर दिखेगा।
विविध विकल्प
भारत टैक्सी ऐप केवल कारों तक सीमित नहीं है। इसमें यात्रियों को उनकी ज़रूरत और बजट के हिसाब से तीन प्रमुख विकल्प मिलेंगे:
- बाइक (Bike Taxi) – कम दूरी और ट्रैफिक से बचने के लिए।
- ऑटो (Auto Rickshaw) – किफायती और आसान सफर के लिए।
- कार (Cabs/Taxis) – कंफर्टेबल लंबी दूरी की यात्रा के लिए।
ड्राइवर्स की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा (Social Security)
भारत टैक्सी केवल बिजनेस पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि यह अपने ड्राइवर्स (जिन्हें ‘सारथी’ कहा जा सकता है) के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। प्लेटफॉर्म ने लॉन्च के साथ ही निम्नलिखित लाभों की घोषणा की है:
- दुर्घटना बीमा (Accidental Insurance): ड्यूटी के दौरान किसी भी अनहोनी की स्थिति में ड्राइवर को 5 लाख रुपये का कवर दिया जाएगा।
- स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance): ड्राइवर और उसके परिवार की सेहत का ख्याल रखते हुए 5 लाख रुपये का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा भी प्रदान किया जाएगा।
- पारदर्शी भुगतान: भुगतान प्रक्रिया को इतना सरल बनाया गया है कि ड्राइवर्स को उनके पैसे के लिए हफ्तों इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।
आंकड़ों में भारत टैक्सी का दबदबा
लॉन्चिंग के समय ही भारत टैक्सी ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले और उत्साहजनक हैं। यह दिखाता है कि मार्केट में इस तरह के विकल्प की कितनी सख्त ज़रूरत थी।
| विवरण | आंकड़े |
| लॉन्च की तारीख | 5 फरवरी 2026 |
| प्रारंभिक शहर | दिल्ली-एनसीआर |
| पंजीकृत ड्राइवर्स | 3 लाख से ज्यादा |
| शुरुआती यूजर्स | 1 लाख से ज्यादा |
| संभावित बचत | 30% तक (यात्रियों के लिए) |
| कमीशन दर | 0% (शून्य) |
कैब इंडस्ट्री पर क्या होगा असर?
भारत टैक्सी का आना भारतीय गिग इकोनॉमी (Gig Economy) के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इससे बड़ी विदेशी कंपनियों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा।
- प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी: जब ग्राहकों को सस्ता और ड्राइवर्स को बेहतर विकल्प मिलेगा, तो अन्य कंपनियां भी अपनी दरों और कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव करने पर मजबूर होंगी।
- ड्राइवर संतुष्टि: अगर ड्राइवर्स को बेहतर कमाई और सम्मान मिलता है, तो कैब कैंसिलेशन (Cancellation) जैसी समस्याएं कम होंगी, जिससे यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: सहकारी मॉडल होने के कारण, पैसा विदेशी कंपनियों के खातों में जाने के बजाय देश के भीतर और सीधे काम करने वाले लोगों के पास रहेगा।
निष्कर्ष: एक नई उम्मीद का उदय
भारत टैक्सी ऐप का उद्देश्य केवल एक कमर्शियल ऐप बनना नहीं, बल्कि एक समावेशी (Inclusive) पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। जहां तकनीक का इस्तेमाल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि सेवा और सशक्तिकरण के लिए किया जा रहा है। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो यह आने वाले समय में न केवल परिवहन, बल्कि अन्य डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सेवाओं के लिए भी एक मानक (Benchmark) बन जाएगा।
यदि आप भी दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और महंगे किराए व सर्ज प्राइसिंग से परेशान हैं, तो ‘भारत टैक्सी ऐप’ को आज़माना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह न केवल आपकी जेब पर बोझ कम करेगा, बल्कि देश के लाखों ड्राइवर्स को एक सम्मानजनक जीवन जीने में मदद भी करेगा।
Uttarakhand
भारत पर्व पर प्रदर्शित होगी उत्तराखंड की झांकी, “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की थीम पर है आधारित

Uttarakhand News : भारत पर्व पर उत्तराखंड की झांकी भी प्रदर्शित होगी। जो कि “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की थीम पर आधारित है। इसमें अल्मोड़ा और बागेश्वर की ताम्र कला को प्रदर्शित किया गया है।
Table of Contents
भारत पर्व पर प्रदर्शित होगी उत्तराखंड की झांकी
भारत पर्व के आयोजन के दौरान 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में उत्तराखण्ड की विकास यात्रा के दर्शन किए जा सकेंगे। इस वर्ष उत्तराखण्ड की झांकी की थीम “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” रखी गई है, जो आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप राज्य की सांस्कृतिक, आर्थिक एवं पारंपरिक आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।
“आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की थीम पर है आधारित
सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक एवं झांकी के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने बताया कि “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” झांकी के ट्रैक्टर सेक्शन में पारंपरिक वाद्ययंत्रों ढोल और रणसिंघा की आकर्षक तांबे की प्रतिकृतियां हैं, जो उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्पी कारीगरों की कलात्मक महारत का प्रतीक हैं।

ट्रेलर सेक्शन के पहले भाग में तांबे के मंजीरे की एक बड़ी मूर्ति दिखायी गई है, जो तांबे की कला की बारीकियों को विस्तार से उजागर करती है। बीच का सेक्शन खूबसूरती से बनाए गए तांबे के बर्तन जैसे गागर, सुरही, कुण्डी को दर्शाया गया है, जो उत्तराखण्ड के पारंपरिक घरेलू जीवन के आवश्यक तत्व हैं।
कौशल और श्रम की गरिमा का प्रतीक हैं ये बर्तन
इस सेक्शन के नीचे, साइड पैनल पारंपरिक वाद्ययंत्र भोंकोर के प्रमुख चित्रणों से सजाए गए हैं, जो सांस्कृतिक कहानी को और समृद्ध करते हैं। झांकी के पिछले सेक्शन में तांबे के कारीगर की एक आकर्षक और प्रभावशाली मूर्ति है, जो हाथ से तांबे के बर्तन बनाने की प्रक्रिया में लगा हुआ है। कारीगर के चारों ओर बारीकी से बनाए गए तांबे के बर्तन हैं, जो पीढ़ियों से मिले ज्ञान, कौशल और श्रम की गरिमा का प्रतीक हैं।
उत्तराखण्ड की ये झांकी उत्तराखण्ड के शिल्पी समुदाय की कारीगरी, सांस्कृतिक योगदान, आर्थिक आत्मनिर्भरता, आजीविका, कौशल एवं परम्परा को दर्शाती है। चौहान ने आगे बताया कि उत्तराखण्ड की झांकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उसकी प्राचीन शिल्प कला के माध्यम से प्रभावी रूप से प्रस्तुत करती है, जो आज भी जीवंत रूप में समाज का हिस्सा बनी हुई है।

उत्तराखण्ड की समृद्ध परंपराओं और रचनात्मक विरासत
स्थानीय कारीगरों द्वारा पारंपरिक तकनीकों से निर्मित तांबे के बर्तन और उपकरण न केवल उत्कृष्ट शिल्प कौशल का उदाहरण हैं, बल्कि राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक के साथ ही धार्मिक जीवन में भी इनका विशेष महत्व रहा है। सदियों से ये शिल्प उत्पाद घरेलू उपयोग और पारंपरिक अनुष्ठानों का अभिन्न अंग रहे हैं, जो उत्तराखण्ड की समृद्ध परंपराओं और रचनात्मक विरासत को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से शिल्पी समुदाय के अनेक परिवारों के लिए ये प्राचीन शिल्प केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि आजीविका का एक सशक्त माध्यम भी है। पीढ़ियों से चली आ रही उत्कृष्ट तकनीकें प्रत्येक कृति को एक साधारण उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर कला के विशिष्ट नमूने में परिवर्तित कर देती हैं, जो शिल्पी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को प्रतिबिंबित करती हैं।
National
कौन है गांधी परिवार की होने वाली बहू अवीवा, जानें उनके बारे में सबकुछ…

गांधी–नेहरू परिवार में जश्न का माहौल, रेहान वाड्रा ने की Aviva Baig से सगाई
नई दिल्ली : गांधी–नेहरू परिवार में एक बार फिर खुशियों का माहौल देखने को मिल रहा है। कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi और उद्योगपति Robert Vadra के बेटे Raihan Vadra ने अपनी करीबी दोस्त Aviva Baig से सगाई कर ली है। यह सादगी भरा आयोजन एक निजी समारोह में संपन्न हुआ, जिसकी चर्चा अब सोशल मीडिया पर तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, रेहान वाड्रा ने अपनी लंबे समय से दोस्त रही Aviva Baig को जीवनसाथी बनने का प्रस्ताव दिया, जिसे अवीवा ने खुशी के साथ स्वीकार किया। बताया जा रहा है कि दोनों एक-दूसरे को करीब सात वर्षों से जानते हैं और दोनों परिवारों की सहमति के बाद इस रिश्ते को औपचारिक रूप दिया गया।
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कौन हैं अवीवा बेग?
Aviva Baig दिल्ली की रहने वाली हैं और उनका परिवार सामाजिक रूप से वाड्रा परिवार के काफी नजदीक माना जाता है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के प्रतिष्ठित मॉडर्न स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी से मीडिया कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की पढ़ाई की।

प्रोफेशनल पहचान: कैमरे से समाज की कहानियां
Aviva Baig पेशे से एक फोटोग्राफर और प्रोड्यूसर हैं। उनकी फोटोग्राफी को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। उनकी क्लिक की गई तस्वीरें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुकी हैं।
आर्ट एग्जिबिशन और क्रिएटिव सफर
Aviva Baig ने बीते कुछ वर्षों में कई चर्चित कला प्रदर्शनियों में हिस्सा लिया है।
- ‘You Cannot Miss This’ (इंडिया आर्ट फेयर, 2023)
- ‘The Illusory World’ (2019)
इन प्रदर्शनियों में उनके काम को कला समीक्षकों और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
सामाजिक मुद्दों से जुड़ाव
Aviva Baig की फोटोग्राफी केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है। वे अपने कैमरे के माध्यम से सामाजिक विषयों, मानवीय संवेदनाओं और जमीनी सच्चाइयों को सामने लाने का प्रयास करती हैं। उनका मानना है कि कला समाज में संवाद और बदलाव का माध्यम बन सकती है।


खेल, प्रकृति और यात्रा का शौक
बहुत कम लोग जानते हैं कि अवीवा राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्हें प्रकृति से खास लगाव है। वे अक्सर जंगलों, पहाड़ों और रेगिस्तानी इलाकों की यात्राएं करती हैं और अपने लेंस के जरिए अनकही कहानियों को कैद करती हैं। घूमना और नई जगहों को समझना उनके रचनात्मक सफर का अहम हिस्सा है।
रैहान वाड्रा: शिक्षा और करियर की संक्षिप्त प्रोफाइल
Raihan Vadra कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi और उद्योगपति Robert Vadra के बेटे हैं। भले ही वे देश के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार से आते हों, लेकिन रैहान वाड्रा ने अब तक खुद को राजनीति की सीधी सुर्खियों से दूर रखा है।
शिक्षा (Education)
रैहान वाड्रा की शुरुआती पढ़ाई भारत और विदेश दोनों जगहों पर हुई है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा प्रतिष्ठित निजी संस्थानों से पूरी की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विदेश का रुख किया, जहां उन्होंने लिबरल आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज से जुड़े विषयों में अध्ययन किया।
शिक्षा के दौरान उनकी रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय मामलों और सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों में बताई जाती है।
करियर और रुचियां (Career & Interests)
रैहान वाड्रा फिलहाल किसी सक्रिय राजनीतिक भूमिका में नहीं हैं। वे सार्वजनिक मंचों पर बहुत कम नजर आते हैं और अपनी निजी व पेशेवर जिंदगी को मीडिया से दूर रखना पसंद करते हैं।
हालांकि, वे अपनी मां प्रियंका गांधी के साथ कभी-कभी सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में दिखाई देते हैं, लेकिन इसे राजनीतिक एंट्री के तौर पर नहीं देखा जाता।
अलग रास्ते, लेकिन मजबूत रिश्ता

जहां रेहान वाड्रा अक्सर अपनी मां प्रियंका गांधी के साथ राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में नजर आते हैं, वहीं अवीवा बेग पूरी तरह अपनी रचनात्मक दुनिया में सक्रिय हैं। दोनों ने अलग-अलग क्षेत्रों में रहते हुए भी अपने रिश्ते को निजी और संतुलित बनाए रखा।
निष्कर्ष
रेहान वाड्रा और अवीवा बेग की सगाई ने एक बार फिर गांधी–नेहरू परिवार को सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि दोनों ही अपनी निजी जिंदगी को लाइमलाइट से दूर रखना पसंद करते हैं, लेकिन यह रिश्ता सादगी, आपसी समझ और वर्षों की दोस्ती पर आधारित माना जा रहा है।
आने वाले समय में इस नए रिश्ते से जुड़ी और जानकारी सामने आ सकती है, लेकिन फिलहाल परिवार में खुशियों की दस्तक ने सभी का ध्यान जरूर खींच लिया है।
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